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स्वाइन फ्लू भ्रम को दूर करें

स्वाइन फ्लू देश के कई हिस्सों में पैर पसार रहा है. इससे बचने के लिए सावधानी बरतने की जरूरत तो है, लेकिन उन अफवाहों से भी बचना चाहिए, जो इसके बारे में अलग-अलग स्रोतों से फैल रही हैं. आइए जानते हैं, स्वाइन फ्लू से जुड़ी 5 अफवाहों के बारे में.

312023-swine-flu-manitनहीं हो सकता इलाज
यह एक अफवाह है. स्वाइन फ्लू का आसानी से इलाज संभव है. टेमीफ्लू नाम से स्वाइन फ्लू की दवा आती है, जो इस पर तेजी से काबू करती है. लक्षण दिखाई देने के 48 घंटे के अंदर इलाज शुरू हो जाना चाहिए. यह दवाई तेजी से इनफेक्शन को कम करती है. पांच दिन का इलाज होता है, जिसमें मरीज को टेमीफ्लू दी जाती है.

भारत में है दवाई की कमी
ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास अभी 60 हजार से ज्यादा डोज हैं. इसके अलावा बच्चों के लिए अलग से एक हजार सिरप डोज हैं. हेटेरो, नैटको और स्ट्राइडस एक्रोलैब जैसी फार्मा कंपनियां बहुत कम समय में और डोज तैयार कर सकती है.

जिंदगी में सिर्फ एक बार होता है
यह एक भ्रम है. यह जरूर है कि एक बार आप एच1एन1 वायरस की चपेट में आकर उबरने के बाद आपका शरीर भीतर ही उस वायरस विशेष के खिलाफ प्रतिरोधी ताकत पैदा करने की कोशिश करता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको दोबारा इस वायरस का संक्रमण नहीं होगा. अगर आप अकसर संक्रमित लोगों के संपर्क में आ रहे हैं तो आप दोबारा-तिबारा इसके शिकार हो सकते हैं. हालांकि वैक्सीनेशन का विकल्प भी है, जो एक साल तक आपको इस वायरस से बचाए रखता है.

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पोर्क खाने से संक्रमण
स्वाइन फ्लू का जन्म भले ही सुअरों से हुआ हो, लेकिन इसके संक्रमण का पोर्क खाने या न खाने से कोई लेना-देना नहीं है. एच1एन1 वायरस सबसे ज्यादा हवा के जरिये फैलता है. जब आप खांसते या छींकते हैं तो हवा में या जमीन पर या किसी भी सतह पर मुंह और नाक से निकले द्रव कण गिरते हैं. यह कण हवा के जरिये या किसी के छूने से दूसरे व्यक्ति के शरीर में मुंह या नाक के जरिए प्रवेश कर जाते हैं. यानी स्वाइन फ्लू का वायरस हाथ मिलाने और गले लगने के अलावा किसी दरवाजे, फोन, की-बोर्ड, रिमोट कंट्रोल के जरिये भी फैल सकता है.
वायरस का हो गया है म्यूटेशन
भारत की दो प्रमुख लैब-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे और नेशनल सेंटर ऑफ डिसीज कंट्रोल दिल्ली के हफ्ते भर पुराने शोध के मुताबिक, वायरस का म्यूटेशन नहीं हुआ है. किसी जीन के डीएनए में कोई स्थायी परिवर्तन होने की प्रक्रिया को बायोलॉजी में म्यूटेशन कहते हैं. जरूरी नहीं है कि हर संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर आपको अनिवार्य रूप से यह वायरस अपनी चपेट में ले ले. कम इम्युनिटी के लोगों पर एच1एन1 का शिकार होने का खतरा ज्यादा होता है. स्वाइन फ्लू के अहम लक्षणों में 101 डिग्री से ज्यादा का बुखार तीन दिन से ज्यादा समय तक रहता है. सांस लेने में तकलीफ, कफ, छाती में दर्द, सुस्ती, थकान, उल्टी और भूख का न लगना भी इसके अहम लक्षण हैं.

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स्वाइन फ्लू से जुड़े कुछ सवाल
अगर किसी को स्वाइन फ्लू है और मैं उसके संपर्क में आया हूं, तो क्या करूं?
सामान्य जिंदगी जीते रहें, जब तक फ्लू के लक्षण नजर नहीं आने लगते. अगर मरीज के संपर्क में आने के % दिनों के अंदर आपमें लक्षण दिखते हैं, तो डॉक्टर से सलाह करें.
अगर साथ में रहने वाले किसी शफ्स को स्वाइन फ्लू है, तो क्या ऑफिस जाना चाहिए?
हां, आप ऑफिस जा सकते हैं, मगर आपमें फ्लू का कोई लक्षण दिखता है, तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं और मास्क का इस्तेमाल करें.
स्वाइन फ्लू होने के कितने दिनों बाद मैं ऑफिस या स्कूल जा सकता हूं?
अस्पताल वयस्कों को स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखने पर सामान्यत: 5 दिनों तक ऑब्जर्वेशन में रखते हैं. बच्चों के मामले में % से 10 दिनों तक इंतजार करने को कहा जाता है. सामान्य परिस्थितियों में व्यक्ति को % से 10 दिन तक रेस्ट करना चाहिए, ताकि ठीक से रिकवरी हो सके. जब तक फ्लू के सारे लक्षण खत्म न हो जाएं, वर्कप्लेस से दूर रहना ही बेहतर है.
क्या किसी को दो बार स्वाइन फ्लू हो सकता है?
जब भी शरीर में किसी वायरस की वजह से कोई बीमारी होती है, शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र उस वायरस के खिलाफ एक प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेता है. जब तक स्वाइन फ्लू के वायरस में कोई ऐसा बदलाव नहीं आता, जो अभी तक नहीं देखा गया, किसी को दो बार स्वाइन फ्लू होने की आशंका नहीं रहती. लेकिन इस वक्त फैले वायरस का स्ट्रेन बदला हुआ है, जिसे हो सकता है शरीर का प्रतिरोधक तंत्र इसे न पहचानें. ऐसे में दोबारा बीमारी होने की आशंका हो सकती है.

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