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खुद को विश्‍व योग गुरु घोषित करने की ल़डाई
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खुद को विश्‍व योग गुरु घोषित करने की ल़डाई

yog guru21 जून के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित होने के बाद से खुद को विश्‍व योग गुरु घोषित करने को लेकर उत्तराखंड में चार से अधिक योग गुरुओं के बीच प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है. नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही योग को जो प्रतिष्ठा दिलाई उसके परिणामस्वरूप ही वैश्‍विक स्तर पर योग को सम्मान हासिल हुआ है.

नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव पर ही दुनिया के ज्यादातर देशों ने 21 जून को विश्‍व योग दिवस बनाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है. इसी के साथ ही विभिन्न देशों में पतंजलि योगपीठ की इकाईयों ने कमर कस ली है. योग गुरु बाबा रामदेव, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष चिदानन्द मुनी जी महराज, श्रीश्री रविशंकर जी महराज एवं विदेशी शिष्याओं के लिए चर्चा में रहे पायलट बाबा की नज़र योग को पूरी दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने पर है. वहीं परमार्थ निकेतन के योगी चिदानन्द मुनी जी भी अमेरिका के सेंट्रल पार्क में अपने विदेशी शिष्यों को योग कराएंगे. जिस दिन भारत को योग के क्षेत्र में मोदी जी के प्रयास से यह महान उपलब्धि मिली, उसी दिन से योग की मार्केटिंग कर अरबों-खरबों की कमाई जुटाने की लालसा की वजह से धर्मनगरी के इन मुनियों की लार टपक रही है.
पतंजलि योगपीठ में पत्रकारों से वार्ता में बाबा रामदेव ने कहा कि न्यूयार्क टाइम्स स्न्वायर पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून, राष्ट्रपति बराक ओबामा और संयुक्त राष्ट्र संघ में सभी देशों के स्थायी प्रतिनिधि योग करने आएंगे. इसी दिन विश्‍व की सभी राजधानियों में योग शिविर लगाए जाएंगे. देश के कई योगी कार्यक्रम में भाग लेंगे. जहां तक भारत का सवाल है, बाबा का दावा है कि 21 जून को हर गांव और शहर में योग कराया जाएगा.
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष चिदानंद मुनि ने जानकारी दी कि 21 जून को अमेरिका के सेंट्रल पार्क में भी निकेतन के योगी योग कराएंगे. संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से योग दिवस घोषित करने पर भारत के योगियों का दायित्व और बढ़ गया है. उन्होंने बताया कि फिलहाल अमेरिका में ही 10 हजार केंद्रों पर योग सिखाया जा रहा है. ये सभी केंद्र 21 जून के आयोजन से जुड़ेंगे.
योग दिवस घोषित होने पर जो मुनीगण विजय दिवस मनाते दिखे थे, वे ही अब अपने राजनीतिक आकाओं की मदद से विश्‍व गुरु बनने का ख्वाब देख रहे है. जिसमें अब तक योग गुरु बाबा राम देव सबसे आगे दिख रहे हैं. बाबा को स्थापित करने में विदेशी शिष्याओं के लिए चर्चित पायलट बाबा ने रामदेव की मदद करने का भरोसा दिया है. रामदवे ने इसी अपेक्षा से अपनी गंगोत्री यात्रा के समय ही वापसी के समय पायलट बाबा के उत्तरकाशी आश्रम पर रात्रि विश्राम करके गहन मंत्रणा के साथ अपनी विश्‍वसनीयता बढ़ाई थी. योग गुरु को अपने मोदी जी से भी कुछ ज्यादा ही उम्मीद है. उनका विश्‍वास है कि संघ परिवार, जिसकी बाबा ने मुक्त कंठ से प्रसंशा की है, उनके साथ रहेगा.

नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव पर ही दुनिया के ज्यादातर देशों ने 21 जून को विश्‍व योग दिवस बनाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है. इसी के साथ ही विभिन्न देशों में पतंजलि योगपीठ की इकाईयों ने कमर कस ली है. योग गुरु बाबा रामदेव, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष चिदानन्द मुनी जी महराज, श्रीश्री रविशंकर जी महराज एवं विदेशी शिष्याओं के लिए चर्चा में रहे पायलट बाबा की नज़र योग को पूरी दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने पर है. वहीं परमार्थ निकेतन के योगी चिदानन्द मुनी जी भी अमेरिका के सेंट्रल पार्क में अपने विदेशी शिष्यों को योग कराएंगे.

इसी के साथ पर्यारण संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले चिदानन्द मुनी जी भी ताल ठोंक रहे हैं. मुनी जी पूरे देश में ही नहीं, बल्कि विश्‍व में अपने भक्तों, समर्थकों के लिए जाने जाते हैं. परमार्थ निकेतन ने सर्वाधिक विदेशियों में सनातन धर्म, गंगा और योग के प्रति भाव भरा है, जो निरर्थक नहीं सिद्ध होगा. राजनीति में वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी से लेकर सुषमा तक कई दिग्गज उनके यहां ही रुक कर अपनी राजनीति की थकान दूर करते रहे हैं. जो उन्हें स्थापित होने में मदद करेंगे. धर्म नगरी की पूरी मुनियों की मंडली दो गुटों में बंट गई है.
एक गुट में योग गुरुबाबा रामदेव हैं, तो दूसरी ओर चिदानन्द मुनी जी हैं. चिदानन्द को स्थापित करने में श्रीश्री रविशंकर जैसे देश के कई दिग्गज संत हैं. कल तक जो साथ में मिठाइयां बांट रहे थे वही अब आपस में जोर आजमाइश कर रहे हैं. अब योग का जो होना था, वह तो होगा ही. योग के बाजारीकरण से तिजोरी कितनी भर ली जाय, यह भी चर्चा का विषय बना है.भारत विश्‍व गुरु बनेगा या नहीं, यह तो भविष्य के गर्भ में है. धर्मनगरी के ये चर्चित संत अपने को विश्‍व योग गुरु के रूप में स्थापित करने में कोई कसर नही छोड़ना चाहते.
योग,संस्कृत एंव संस्कृति के लिए धर्मनगरी में अपनी अलग पहचान रखने वाली जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी जी का मानना है कि योग का व्यापार फैलाने से योग और योगी दोनों की प्रतिष्ठा चोटिल होगी. प्रधानमंत्री मोदी के सार्थक प्रयास से विश्‍व में योग को सम्मान मिला है. इस सम्मान को बचाते हुए योगियों को स्वस्थ समाज की संरचना के साथ युवकों को स्वाभिमानी एंव स्वावलंबी बनाने का प्रयास सभी को मिल कर करना चाहिए. उल्लेखनीय है कि ब्रह्मचारी जी की प्रेरणा से धर्मनगरी ॠषिकेश में योग की शिक्षण संस्थाएं संचालित होती हैं. इस संस्था से निकली कई योग की प्रतिभाओं ने योग का नाम रोशन किया है. संत का मत है कि मुनियों को गरिमा का ध्यान रखना चाहिए. इसी तरह का विचार विन्ध्य क्षेत्र के प्रख्यात पुरोहित पंडा समाज के अध्यक्ष भगवान दत्त पाठक ने धर्मनगरी के संतों को जोश में होश न खोने की बात कहते हुए कहा कि व्यक्ति से बड़ा देश है, प्रधानमंत्री देश को प्रतिष्ठा दिलाना चाहते हैं, हमारे मुनियों को आत्म प्रलोभन में देश के गरिमा के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए. गीतास्वामी दिव्यधाम के पिठाधीश्‍वर स्वामी कमलेशानन्द जी मोदी के सार्थक प्रयास के लिए मन से गद-गद हैं और चाहते हैं कि योग के मामले में संतों को राजनीति और व्यापार न करके देश को विश्‍वगुरु का सम्मान दिलाने का संपूर्ण प्रयास करना चाहिए.

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