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मोदी जी आखिर क्यों चपरासी बनने के लिए बेताब हैं देश की डिग्रीधारक युवा आबादी

मोदी जी आखिर क्यों चपरासी बनने के लिए बेताब हैं देश की डिग्रीधारक युवा आबादी

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देश की सरकार युवाओं के लिए रोज़गार पैदा करने को लेकर बड़े-बड़े वादे कर रही है लेकिन सर्कार को भी शायद इस बात की जानकारी नहीं है कि आखिर ये रोज़गार आएँगे कहाँ से. बता दें पूरे देश में बेरोजगार युवक युवतियों की संख्या तेज़ी से बढती चली जा रही है और आने वाले समय में शायद यह संख्या और अधिक हो जाएगी, लेकिन इस बात से सरकार की कान पर जूं नहीं रेंग रही है.

देश में बेरोज़गारी का आलम क्या है इसकी बानगी हाल ही में देखने को मिली जब ग्वालियर जिला कोर्ट में चपरासी के महज 57 पदों के लिए 60 हजार आवेदन आए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पद का मानदेय सिर्फ साढ़े सात हजार रुपए है, लेकिन अधिकतर उम्मीदवार इंजीनियर, एमबीए और यहां तक कि पीएचडी डिग्रीधारी हैं।

इन आवेदनों को देखकर जिला कोर्ट प्रशासन भी पसीना-पसीना हो रहा है, क्योंकि चपरासी के लिए शैक्षणिक योग्यता 8वीं पास रखी गई है। इसलिए सभी को स्क्रीनिंग और पर्सनल इंटरव्यू के लिए जज के सामने से गुजरना होगा जो बड़ी चुनौती है।

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सेना भर्ती के बराबर शहर में उमड़ने वाली इस बेरोजगारों की भीड़ को कैसे नियंत्रित करेंगे, इसको लेकर प्रशासन के भी हाथ-पांव फूल गए हैं। पड़ोसी राज्यों से भी युवाओं ने इसके लिए आवेदन किया है।

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