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आतंक के साए में जी रहा है कटनी
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आतंक के साए में जी रहा है कटनी

कटनी ज़िला इन दिनों विभिन्न आपराधिक वारदातों का केंद्र बनता जा रहा है. इस क्षेत्र में जुए, सट्टे और नशीली दवाओं से संबंधित अपराधों का खूब बोलबाला है. पुलिस की निष्क्रियता के वज़ह से यहां अवैध शस्त्रों का आवागमन और व्यापार भी आम है. पिछले दिनों राज्य के गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता के प्रवास के दौरान भी इन समस्याओं से निपटने की दिशा में कोई विशेष कदम नहीं उठाया गया.

मध्य प्रदेश के गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता पिछले दिनों कटनी प्रवास पर आए थे. स्थानीय पत्रकारों द्वारा बार-बार इन घटनाओं के बारे में पूछे जाने पर वो कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके. गुप्ता अपनी यात्रा के दौरान स्वजातीय बंधुओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच खोए रहे. कटनी में क़ानून की स्थिति के बारे में बार-बार पूछे जाने पर उन्होंने नक्सलवाद के विरुद्ध राज्य शासन द्वारा निर्धारित नीतियों के बारे में एक विस्तृत व्याख्यान दे डाला.

मध्य प्रदेश का औद्योगिक ज़िला कटनी इन दिनों आपराधिक वारदातों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों की संख्या में इस क्षेत्र में भारी वृद्धि हुई है. ज़िले के बहोरीबंद क्षेत्र में पिछले फरवरी माह में चंदाबाई नाम की एक दलित महिला को जिंदा जलाकर मार डालने की वारदात पर पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है. इसके अलावा रीठी क्षेत्र में पुलिसवालों द्वारा रात के अंधेरे में घरों में घुसकर महिलाओं के साथ अभद्रता करने और बाद में गांववालों द्वारा पुलिस की पिटाई की वारदात भी जांच के अभाव में लंबित है. पिटे हुए पुलिसवालों ने अपनी पहचान छिपाने की पूरी कोशिश की.

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ज़िला मुख्यालय के हाउसिंग बोर्ड में मां की उपस्थिति में बेटी के साथ अश्लील हरकत करने वाले पुलिसवाले की पिटाई की घटना भी वर्तमान में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है. शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में संपत्ति विवाद में एक पूंजीपति के प्रभाव में आकर दूसरे पक्ष की महिलाओं के साथ पुलिस द्वारा की गई अभद्रता की घटना की जांच भी अब तक नहीं हो पाई है. ऐसे शहर में जहां जुआ सट्टा, गांजा, स्मेक, अवैध  क़ब्ज़े,  अवैध शस्त्रों का परिवहन और अन्य सामाजिक अपराध बड़ी संख्या में हो रहे है. यहां पुलिस तंत्र का निष्क्रिय होना चिंता का विषय है.

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मध्य प्रदेश के गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता पिछले दिनों कटनी प्रवास पर आए थे. स्थानीय पत्रकारों द्वारा बार-बार इन घटनाओं के बारे में पूछे जाने पर वो कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके. गुप्ता अपनी यात्रा के दौरान स्वजातीय बंधुओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच खोए रहे. कटनी में क़ानून की स्थिति के बारे में बार-बार पूछे जाने पर उन्होंने नक्सलवाद के विरुद्ध राज्य शासन द्वारा निर्धारित नीतियों के बारे में एक विस्तृत व्याख्यान दे डाला. मंत्री जी ने अपने प्रवास के दौरान विभागीय ज़िम्मेदारी के किसी कार्यक्रम में भाग नहीं लिया. ज़िला पुलिस प्रशासन मंत्री जी की सेवा में इस तरह जुटा रहा कि अधिकारी और अर्दली के बीच भेद कर पाना मुश्किल था.

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स्थानीय कार्यकर्ताओं ने मंत्री के साथ फोटो खिंचवाने की प्रतियोगिता बनाए रखी. परिणामत: कटनी क्षेत्र की क़ानून-व्यवस्था पर चर्चा पूरी तरह अधूरी रह गई.

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