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आतंकियों का ट्रांजिट रूट बना उत्तर प्रदेश
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आतंकियों का ट्रांजिट रूट बना उत्तर प्रदेश

नेपाल में जारी राजनीतिक अनिश्चितता पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार जल्द ही नहीं चेती, तो भारत एक बार फिर से सिख आतंकवाद से दहल उठेगा. जम्मू-कश्मीर समेत देश के कई राज्य पहले से ही पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की विभीषिका से जूझ रहे हैं. अब पाकिस्तान से सिख आतंकवादियों को पूरी मदद मिल रही है और इन्हें नेपाल होते हुए भारत भेजा जा रहा है. खुफिया अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान उत्तर प्रदेश को ट्रांजिट रूट के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है. भारत-नेपाल की 550 किलोमीटर लंबी खुली सीमा आतंकियों के नापाक मंसूबों में मददगार साबित हो रही है. नेपाल की सीमा से आतंकियों को उत्तर प्रदेश में घुसाकर उन्हें तराई के इलाक़ों में शरण दिलाई जाती है. यहां से आतंकवादियों को देश के विभिन्न हिस्सों में वारदातों को अंजाम देने के लिए भेजा जाता है. पाकिस्तान की यह साज़िश इस लिहाज़ से भी खतरनाक है कि अब सिख और मुस्लिम आतंकवादी संगठन एक साथ काम कर रहे हैं. नेपाल में पाक दूतावास से इन आतंकियों को हर तरह की मदद मिल रही है. सिद्धार्थ नगर के ब़ढनी बॉर्डर से सिख आतंकवादी माखन सिंह उर्फ दयाल सिंह की गिरफ्तारी से पाकिस्तान के नापाक मंसूबों का खुलासा होता है. माखन सिंह से मिली जानकारी के अनुसार आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल पाकिस्तान की मदद से अपने संगठन को मजबूत करने में लगा है. माखन बब्बर खालसा इंटरनेशनल का सेकेंड लेफ्टिनेंट है, जो दर्जनों सिख युवकों को आतंकी गतिविधियों की ट्रेनिंग दिलाकर उन्हें नेपाल के रास्ते भारत भेज चुका है. उसके काठमांडू में सक्रिय आईएसआई एजेंटों से अच्छे संबंध हैं. नेपाल में वह अपनी सारी गतिविधियों को पाकिस्तानी दूतावास के संरक्षण में अंजाम दे रहा था. माखन ने जो चौंकाने वाला खुलासा किया है, वह और भी ज़्यादा चिंताजनक और संवेदनशील है. इसके मुताबिक़ आईएसआई के संरक्षण में बब्बर खालसा इंटरनेशनल के खालिस्तानी मूवमेंट को अमेरिका के कुछ सिखों से आर्थिक मदद मिल रही है. सिद्धार्थनगर व उसके पड़ोसी महराजगंज ज़िले की सीमा नेपाल से सटी है. इस इलाक़े से अब तक क़रीब एक दर्जन से अधिक दुर्दांत सिख आतंकी पकड़े जा चुके हैं.

खु़फिया तंत्र की मानें तो नेपाल में जारी राजनीतिक अनिश्चितता का फायदा पाकिस्तान आतंकी संगठनों को मजबूती और ट्रेनिंग देने में उठा रहा है. माओवादियों के साथ आतंकियों के रिश्तों का पहले ही खुलासा हो चुका है. नेपाल में पाक दूतावास इनके लिए कई सुविधाओं के साथ ही ट्रेनिंग के लिए सुरक्षित ठिकाने भी मुहैया कराता है. आतंकी वारदातों को अंजाम देने का प्रशिक्षण पूरा होने के बाद आतंकवादियों की खेप को नेपाल के रास्ते ही वाया उत्तर प्रदेश होते हुए भारत के विभिन्न इलाक़ों में पहुंचा दिया जाता है.

वर्ष 1997 में ब़ढनी बॉर्डर पर सबसे पहले सिख आतंकवादियों भाग सिंह और अजमेर सिंह को बॉर्डर पुलिस फोर्स ने गिरफ्तार किया था. दोनों ही आतंकी पंजाब में हत्या व लूट की दर्जनों वारदातों के आरोपी थे. चार माह पहले एटीएस प्रभारी अभय प्रताप मल्ल ने बटला हाउस कांड के आरोपी और पांच लाख के इनामी आतंकवादी सलमान को गिरफ्तार किया था. सलमान आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन का सक्रिय सदस्य है. ब़ढनी सीमा पर ही पांच साल पहले शकील नामक आतंकवादी को एके-47 के साथ गिरफ्तार किया गया था. इसके पूर्व महराजगंज के सोनौली बॉर्डर पर मुंबई बमकांड के मास्टर माइंड याकूब मेनन, हार्डकोर आतंकी राजू खन्ना को पुलिस ने गिरफ्तार किया था. मेनन वर्ष 1992 में हुए मुंबई बम ब्लास्ट का न केवल मास्टर माइंड था बल्कि उसने धमाके कराने के लिए आतंकियों को धन भी मुहैया कराया था. भारत-नेपाल की 550 किमी लंबी सीमा पूरी तरह से खुली है. यह आतंकवादियों के लिए का़फी सुरक्षित है. मुख्य मार्गों पर ही बैरियर लगाकर चेकिंग होती है, खुले कच्चे रास्तों पर चेकिंग कर पाना मुमकिन भी नहीं है. माखन सिंह की गिरफ्तारी के बाद उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक बृजलाल ने खुलासा किया कि कैलीफोर्निया में तारा सिंह ने माखन सिंह की बातचीत बधावा सिंह उर्फ चाचा से कराई थी. बाधवा सिंह आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल का मुखिया है, जिसने पाकिस्तान में शरण ले रखी है. माखन सिंह ने पाकिस्तान में आरडीएक्स युक्तबम बनाने में महारत हासिल की. नवंबर 2009 में वह पाकिस्तान से पांच अन्य आतंकियों के साथ नदी के रास्ते गुरदासपुर सीमा से भारत में घुसा. ये लोग अपने साथ तीन एके-47, तीन पिस्टल, दो हैंड ग्रेनेड और चार सौ कारतूस लाए थे. माखन ने कर्णवीर के साथ मिलकर पंजाब में मैयादास डेरा के महंत की हत्या की थी. इन दोनों ने ही पंजाब में माछीवाड़ा पुल उड़ाने का भी प्रयास किया था.

खु़फिया तंत्र की मानें तो नेपाल में जारी राजनीतिक अनिश्चितता का फायदा पाकिस्तान आतंकी संगठनों को मजबूती और ट्रेनिंग देने में उठा रहा है. माओवादियों के साथ आतंकियों के रिश्तों का पहले ही खुलासा हो चुका है. नेपाल में पाक दूतावास इनके लिए कई सुविधाओं के साथ ही ट्रेनिंग के लिए सुरक्षित ठिकाने भी मुहैया कराता है. आतंकी वारदातों को अंजाम देने का प्रशिक्षण पूरा होने के बाद, आतंकवादियों की खेप को नेपाल के रास्ते ही वाया उत्तर प्रदेश होते हुए भारत के विभिन्न इलाक़ों में पहुंचा दिया जाता है. नेपाल के रास्ते पाकिस्तान ने भारत की अर्थव्यवस्था को चौपट करने का अभियान चला रखा है. जाली नोटों की लंबी खेप वाया नेपाल भारत पंहुचाई जा रही है. पिछले तीन माह में जाली नोट तस्करों को एटीएस गिरफ्तार कर चुकी है. यहां आतंकवादियों और जाली नोटों के तस्करों की गिरफ्तारी एटीएस करती है.

लोकल पुलिस को इनकी गतिविधियों की भनक नहीं लग पाती, वजह क्या है, यह तो पुलिस विभाग के आला अधिकारी ही जानें. नेपाल से सटे भारतीय इलाक़ों में पाकिस्तानी खु़फिया एजेंसियों की पकड़ से लोकल पुलिस, खुफिया तंत्र और प्रशासन भले ही इनकार करे लेकिन सच्चाई यही है कि पाकिस्तान उत्तर प्रदेश को ट्रांजिट रूट के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है. नेपाल के सरहदी ज़िलों से अब तक क़रीब साढ़े तीन सौ लोगों की गिरफ्तारी इस बात की पुष्टि करती है. वह भी उन हालात में जब इन गिरफ्तार लोगों में अधिकतर की पहचान जैश-ए-मोहम्मद और अलकायदा जैसे आतंकवादी संगठनों के सदस्य के रूप में की जा चुकी है. 550 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल सीमा पूरी तरह से खुली है और दोनों देशों के लोग बेरोक-टोक एक-दूसरे के यहां आते जाते रहते हैं. इसी का ़फायदा उठाने में लगी है पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई. इंडो-नेपाल बॉर्डर से आतंकियों की घुसपैठ की पुष्टि गृह मंत्रालय के उस आदेश से भी होती है, जिसमें सशस्त्र सीमा बल को सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय को इस बात की पक्की सूचना मिली है कि पाकिस्तान के आतंकी संगठन नेपाल की सीमा के जरिए भारत में घुसने की फिराक में है. नेपाल के रूपनदेह, विराटनगर, परसा, मकवानपुर, झांपा, सुनसरी, इलाम, मेची आदि इलाक़ों में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने में लगी है. काठमांडू पुलिस प्रवक्ता हरेकृष्ण खनाल के मुताबिक़ वर्ष 2009 में फर्जी पासपोर्ट के जरिए नेपाल आने वाले क़रीब डेढ़ सौ पाकिस्तानी नागरिकों को नेपाल के विभिन्न ज़िलों से गिरफ्तार किया गया था. इस वर्ष अभी तक साढ़े तीन सौ पाकिस्तानियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. कुछ दिन पहले झांपा ज़िले से भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश कर रहे एक व्यक्ति को सुरक्षाकर्मियों ने गिरफ्तार किया था, जिसके पास फर्ज़ी नेपाली पासपोर्ट मिला. नेपाली भाषा का एक भी शब्द न बोल पाने वाला यह शख्स खुद को नेपाल का नागरिक बता रहा था. बाद में खुलासा हुआ किवह पाकिस्तानी नागरिक है और उसका नाम अशरफ है. अशरफ की गिरफ्तारी के लिए इंटरपोल ने भी एलर्ट जारी कर रखा था. मार्च महीने में भारत-नेपाल सीमा पर एक पाकिस्तानी, एक इसराइली व एक जर्मन नागरिक को बिना उचित दस्तावेजों के भारत में घुसते हुए सशस्त्र सीमा बल के जवानों ने पकड़ा था. पाकिस्तानी खु़फिया एजेंसी के साथ मिलकर देशद्रोह की गतिविधियों में शामिल कई लोग रातों-रात धनवान हो गए, जिन पर प्रशासन की नज़र तो है. लेकिन वह इन पर सीधे तौर पर कार्रवाई करने से कतरा रहा है.

खुफिया तंत्र की मानें तो प्रतिबंधित संगठन का एक सदस्य इलाक़े की शैक्षणिक संस्था में अध्यापन का कार्य कर रहा है. इससे सा़फ है कि आईएसआई ने भारत-नेपाल सीमा पर अपनी जड़े कितनी गहराई तक जमा ली है. एसएसबी के डीआईजी ब्रजसोम का कहना है कि सीमा पर एसएसबी के जवानों की सतर्क नज़र है. चेकिंग की जा रही है. नेपाल से सटी सरहद पर आतंकियों की बढ़ती गतिविधियां भारत के लिए चिंता का विषय है.

अब वाहन से गश्त कर सकेंगे जवान

भारत-नेपाल सीमा पर तैनात सशस्त्र सुरक्षा बल के जवानों को अब झाड़-झंखाड़ के बीच पैदल गश्त करने की दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा. अब वह सीमा के एक छोर से दूसरे छोर तक अपने वाहन से आराम से गश्त कर सकेंगे. केंद्र सरकार ने लोक निर्माण विभाग को भारत-नेपाल सीमा पर सात मीटर चौड़ी स़डक के निर्माण का प्रोजेक्ट तैयार कर उसे भेजने का निर्देश दिया है. इस योजना को मूर्तरूप देने के लिए लखनऊ में केंद्र व राज्य सरकार के अधिकारियों के बीच बैठक में सहमति बन चुकी है. सडक़ सीमा बिंदू से सौ गज पहले बनेगी जिसका विस्तार नेपाल से सटने वाले प्रत्येक ज़िले तक होगा. यह सडक़ खासतौर पर एसएसबी के लिए रिजर्व रहेगी. सडक़ पर हाईपावर के प्रकाशबिंदु और निगरानी के लिए विशेष उपकरण लगाए जाएंगे.

1 comment

  • यह खबर देश सुरक्षा के दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है इस खबर पर प्रदेश व् केंद्र सरकार को धयान देते हुए सुरक्षा को समुचित इंतजाम करना चाहिए.

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