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बढ़ रही हैं दुष्‍कर्म की घटनाएं
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बढ़ रही हैं दुष्‍कर्म की घटनाएं

सरकार बालिकाओं को संरक्षण देने और उनके सर्वांगीण विकास के लिए अनेक कार्यक्रमों पर अमल कर रही है, लेकिन यह एक कटु सत्य है कि इस राज्य में बालिकाएं सुरक्षित नहीं हैं. प्रदेश में मासूम बच्चियों के उत्पीड़न की घटनाएं तेज़ी से बढ़ रही हैं. महज़ 100 दिन में तीस नाबालिग लड़कियां दुष्कर्म की शिकार हुई हैं. इससे सा़फ है कि हर तीसरे दिन एक लड़की दरिंदों की शिकार हो रही हैं. ये तो स़िर्फ पुलिस थानों में दर्ज़ प्रकरणों का आंकड़ा है. ऐसे कई और मामले होंगे जो सामाजिक लोकलाज के कारण सामने ही नहीं आ पाते हैं.

मानसिक विकृति के द्योतक गांधी मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आरएन साहू का कहना है कि इन दिनों मानसिक रोगों का अनुपात बढ़ा है. डॉ. साहू का मानना है कि बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वाले मानसिक रूप से विकृत होते हैं और उनका दिमाग असामान्य होता है.

प्रदेश में 16 अक्टूबर 09 से लेकर 31 जनवरी 10 तक बलात्कार के कुल 72 मामले पुलिस थाने में दर्ज़ किए गए. इनमें 30 मामले नाबलिगों के साथ दुराचार के हैं. इनमें सबसे ज़्यादा शिकार दलित और अन्य पिछड़े वर्ग की लड़कियां हुई हैं. ज़ाहिर है, ये वर्ग समाज की कमज़ोर कड़ी हैं और इन वर्गों की नाबालिग बच्चियों को आसानी से शिकार बनाया जा रहा है.

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आंकड़ों पर नज़र दौड़ाएं तो 100 दिनों में अनुसूचित जाति की 11, अन्य पिछड़ा वर्ग की 10, अनुसूचित जनजाति की 8 और सामान्य वर्ग की 1 नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले दर्ज़ किए गए हैं. खास बात यह है कि दुराचार के ये मामले सबसे ज़्यादा विकसित कहे जाने वाले क्षेत्रों में हैं जबकि पिछड़े कहे जाने वाले मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया, अलीराजपुर, झाबुआ और श्योपुर इस लिहाज़ से सुरक्षित व बेदाग़ है.

मानसिक विकृति के द्योतक गांधी मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आरएन साहू का कहना है कि इन दिनों मानसिक रोगों का अनुपात बढ़ा है. डॉ. साहू का मानना है कि बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वाले लोग मानसिक रूप से विकृत होते हैं और उनका दिमाग असामान्य होता है. बताया जाता है कि यह एक तरह से सेक्सुअल डेविएशन की स्थिति है. मध्य प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष कृष्णकांता तोमर का कहना है कि इन हालातों के पीछे सामाजिक मूल्यों का पतन सबसे बड़ा और प्रमुख कारण है. उनका कहना है कि आज सामाजिक व्यवस्था में जो भी बदलाव हो रहे हैं, उनमें सुधार करना पड़ेगा. वैसे महिला आयोग हर मामले को गंभीरता से लेता है. आयोग की अध्यक्ष का कहना है कि आयोग के पास नाबालिग के साथ दुष्कर्म की जो भी शिकायतें आती हैं, उनमें पीड़िता को न्याय ज़रूर दिलाया जाता है.

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