fbpx
Now Reading:
बिहार: एसी-डीसी बिल : सीबीआई जांच की तलवार
Full Article 8 minutes read

बिहार: एसी-डीसी बिल : सीबीआई जांच की तलवार

पटना उच्च न्यायालय के बाद बिहार में एसी-डीसी बिल में 67 हज़ार करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में गूंज रहा है. आम भाषा में समझें तो यह मामला खर्च के लिए सरकारी खज़ाने से निकाली गई राशि का हिसाब न देने का है. इसे लेकर सरकार पर घोटाले का शक किया जा रहा है. विपक्ष कह रहा है कि सरकार ने बड़े पैमाने पर घोटाला किया है. इस मामले में वकील अरविंद शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका 970/2012 दायर की थी. बीते 16 मार्च को इसी याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार और भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है.

एडवांस कंटिजेंट यानी एसी बिल और डिटेल्ड कंटिजेंट यानी डीसी बिल का मामला पहले पटना हाईकोर्ट में भी गूंज चुका है. अरविंद कुमार शर्मा ने ही रिट याचिका 1710/2010 दायर करके यह मामला उठाया था. याचिका में कहा गया था कि मिड डे मील, इंदिरा आवास एवं मनरेगा सहित कई योजनाओं में भारी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं, पैसों का दुरुपयोग एवं गबन हुआ है. सामान्य व्यय के लिए भी एसी बिल से मोटी रक़म ट्रेजरी से निकाल ली गई. 2002-03 से लेकर 2007-08 तक 11 हज़ार 412 करोड़ रुपये का डीसी बिल बिहार ट्रेजरी कोर्ट में 322/2 के तहत नहीं जमा किया गया है. इसलिए इस घोटाले की जांच सीबीआई से कराई जाए और संबंधित धनराशि की वसूली कराई जाए. 15 जुलाई, 2010 को उच्च न्यायालय ने पाया कि यह रिट याचिका देश में अपने आप में अद्वितीय लोकहित याचिका है. सरकार ने ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे ग़रीबों के हित के पैसों का गबन न हो. सरकार को इसकी जांच स्वयं सीबीआई से कराने की कार्रवाई करनी चाहिए, पर वह इसका विरोध कर रही है. कोर्ट ने 26 जुलाई, 2010 को सीबीआई के डायरेक्टर एवं ज्वाइंट डायरेक्टर को हाज़िर होने का निर्देश दिया था, लेकिन बाद में राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका की सुनवाई के बाद कोर्ट ने आदेश दिया कि लोक लेखा समिति इस मामले की जांच कर रही है, इसलिए सीबीआई जांच की ज़रूरत नहीं है. इससे पहले बहस के दौरान अरविंद कुमार शर्मा के वकील दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि चारा घोटाले में भी सरकार ने यह तर्क दिया था कि मामला जब पीएसी के पास है तो सीबीआई जांच नहीं होगी, लेकिन हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का निर्देश दिया था. यहां तक कि टू जी स्पेक्ट्रम मामले में भी पीएसी वाले तर्क को खारिज कर दिया गया था. उड़ीसा में भी मनरेगा से संबंधित सीएजी की रिपोर्ट पर ही जांच हो रही है, लेकिन उच्च न्यायालय ने अपना निर्णय सुना दिया. इसके बाद अरविंद शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में सारे मामले को रखा.

आवेदक ने मूल रूप से कोर्ट से प्रार्थना की कि सीएजी की रिपोर्ट में अनियमितता की बात आई है. उच्च न्यायालय ने पहले जांच का निर्देश दिया था, इसलिए इस मामले की सीबीआई जांच कराई जाए. अरविंद शर्मा के अधिवक्ताद्वय मुकुल रोहतगी एवं दीनू कुमार ने इस एसी-डीसी से जुड़े सारे तथ्यों से कोर्ट को अवगत कराया.

रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि पीएसी को मामले की अपराधिकता देखने का अधिकार नहीं है. याचिका में कहा गया कि सीएजी ने बिहार के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर सूचित किया है कि राज्य सरकार ने 11 हज़ार करोड़ रुपये के जो वाउचर सौंपे हैं, उनमें मात्र 38 करोड़ रुपये के वाउचर सही हैं. इसलिए सरकारी धन की यह बहुत बड़ी अनियमितता है. मूल वाउचर डीसी बिल के साथ नहीं हैं. बहस के बाद न्यायमूर्ति डी के जैन एवं न्यायमूर्ति ए आर दवे की खंडपीठ ने बिहार सरकार और कैग से जवाब-तलब किया और इसके लिए चार सप्ताह का समय दिया है.

अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि एसी-डीसी बिल में सीबीआई जांच ही सारी अनियमितताओं को सामने ला सकती है. जितने बड़े पैमाने पर पैसों की लूट हुई है, उसका उदाहरण खोजे नहीं मिलता है. घोटाले की राशि लगातार बढ़ती जा रही है. पीएसी की जांच के साथ सीबीआई की जांच भी कई मामलों में हुई है. उच्चतम न्यायालय ने भी कई मामलों में ऐसे निर्देश दिए हैं. इसलिए हम सुप्रीम कोर्ट से एसी-डीसी मामले की सीबीआई जांच के लिए प्रार्थना कर रहे हैं. याची अरविंद शर्मा ने बताया कि उन्होंने उच्च न्यायालय के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिस पर कोर्ट ने गबन की राशि देखते हुए बिहार सरकार और कैग को नोटिस दिया.

अपनों ने खोला विनय सिन्हा का भेद!

नीतीश कुमार भ्रष्टाचार के खिला़फ जंग लड़ने का दावा कर रहे हैं, पर दूसरी तऱफ उनकी पार्टी के कोषाध्यक्ष विनय कुमार सिन्हा की फैक्ट्री पर आयकर विभाग के छापे में आटे के बोरे से चार करोड़ छह लाख रुपये पकड़े जाते हैं. इसके अलावा रियल इस्टेट कारोबार में निवेश के कई काग़ज़ात भी आयकर विभाग के हाथ लगते हैं. कथनी और करनी का यही विरोधाभास सुशासन को शक के घेरे में लाता है. इससे पहले भी जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन के ठिकानों पर आयकर का छापा पड़ चुका है और इस कारण उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा था. रंजन भी रियल इस्टेट कारोबार से जुड़े रहे हैं. आयकर अधिकारी सिन्हा के यहां मिले पैसों एवं काग़ज़ात की सघन जांच कर रहे हैं. पूरी जांच के बाद बरामदगी का सही आंकड़ा सामने आएगा, लेकिन आयकर विभाग के सूत्र बताते हैं कि लगभग 12 करोड़ रुपये की ऐसी संपत्ति का पता लगाया गया है, जिसका हिसाब नहीं दिया गया था. सही तस्वीर पूरी जांच के बाद सामने आएगी. राजनीतिक सूत्रों की बातों पर भरोसा करें तो किसी अपने ने ही विनय सिन्हा का भेद खोल दिया. आटे के बोरे में पैसे रखे हैं, इतनी सटीक जानकारी आयकर विभाग तक कैसे पहुंची, इस बात के पोस्टमार्टम में माथा खफाया जा रहा है. माना जा रहा है कि कुछ लोगों की राजनीतिक महत्वाकांक्षा विनय सिन्हा से टकराने लगी थी. उन्हें सबक़ सिखाने के लिए यह पूरी व्यूह रचना रची गई, लेकिन जदयू के लोग ठीक बिहार दिवस के दिन इन छापों का राज़ समझने में लगे हैं. उन्हें लगता है कि सरकार को बदनाम करने के लिए दिल्ली में बैठे कुछ नेता इस तरह की ओछी हरकत करा रहे हैं. आटे के बोरे में मिले चार करोड़ छह लाख रुपये का मामला राजनीतिक रंग लेता जा रहा है. लोजपा का आरोप है कि यह पैसा नीतीश कुमार का हो सकता है, क्योंकि विनय सिन्हा नीतीश के का़फी क़रीबी हैं और जदयू से जुड़े हैं. लोजपा के प्रधान महासचिव राघवेंद्र कुशवाहा एवं प्रवक्ता ललन चंद्रवंशी ने कहा कि मुख्यमंत्री आवास में आने से पहले नीतीश कुमार विनय सिन्हा के मकान में ही रहते थे. इसलिए इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए. राजद सांसद राम कृपाल यादव का मानना है कि यह बहुत गंभीर मामला है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि विनय सिन्हा के मकान से ही नीतीश कुमार ने कई चुनाव लड़े हैं. पूर्व विधान पार्षद पी के सिन्हा के अनुसार, इस मामले में पूरी तरह नीतीश कुमार दोषी हैं, विनय सिन्हा को तो बलि का बकरा बनाया जा रहा है. मैंने तो भ्रष्टाचार के मामले में ही नीतीश से दूरी बनाई, अब सारी बातें जनता के सामने आ रही हैं. इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच होनी चाहिए. दरअसल, यह पूरा मामला तब सामने आया, जब कर चोरी के मामले में आयकर अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने पूजा फूड प्रोडक्ट, दीघा के ठिकानों पर  छापेमारी की. टीम ने कंपनी के मालिकों के सीता सदन, राजापुर पुल और उत्तरी श्रीकृष्णपुरी स्थित आवासों पर एक साथ छापेमारी करके करोड़ों रुपये की अनियमितता उजागर की. विनय कुमार सिन्हा, अविनाश कुमार एवं राजेश कुमार सिंह द्वारा संचालित पूजा फूड प्रोडक्ट में छापेमारी के दौरान आयकर अधिकारी उस समय स्तब्ध रह गए, जब आटे के एक बोरे से 4 करोड़ छह लाख रुपये मिले. आयकर विभाग द्वारा राजधानी पटना में यह अब तक की सबसे बड़ी ज़ब्ती है. विभागीय अधिकारियों ने कंपनी के खातों एवं काग़ज़ात की जांच की. इस क्रम में उन्होंने कर संबंधी बड़ी अनियमितता के साथ-साथ कंपनी मालिकों द्वारा हाल के दिनों में अर्जित की गई अकूत संपत्ति भी उजागर की. कंपनी के तीनों पार्टनर पटना में 50 से अधिक फ्लैटों के मालिक हैं. उन्होंने कई प्लॉट डेवलपर्स को भी दे रखे हैं. छापेमारी का नेतृत्व आयकर अन्वेषण ब्यूरो के सहायक निदेशक मनीष कुमार झा एवं सौरभ राय ने किया.

3 comments

  • एक्स्सल्लेंट स्टोरी इन चौथी दुनियां by सरोज, सिमिलर सिर्चुम्स्तान्सस प्रेवैलेद दुरिंग लालू’स रेगिमे व्हेन हे ओप्पोसेद अनिमल हुस्बंद्री सकाम एन्क़ुइर्य अस दिरेक्टेद बी थे पटना हाई कोर्ट फॉर इर्रेगुलरितिएस ऑफ़ ओवर रस ११०० करोड़ इन थे नामे ऑफ़ मत्तेर इस बेफोरे पब्लिक अच्कोउन्ट्स कोम्मित्ती ऑफ़ बिहार लेगिस्लातुरे. अत ठाट टाइम नितीश एंड हिस क्रोनिएस हद इन्सिस्तेद फॉर सीबीआई प्रोबे. एवें थे सुप्रेमे कोर्ट हद रिजेक्टेड लालू’स पला एंड अल्लोवेद सीबीआई प्रोबे. स्त्रन्गेली थे नितीश कुमार गवर्नमेंट इस पोप्पोसिंग सुच एन्क़ुइर्य इन थे नामे ऑफ़ पब्लिक अच्कोउन्ट्स कोम्मित्त्ती एक्षमिनतिओन ऑफ़ अच्कोउन्ट्स ऑफ़ एक एंड DC बिल्स, वोर्थ ओवर रस ३५००० करोड़. ईर्रेगुलरितिएस हवे बीन देतेक्टेद बी काग इन इट्स सुच्सस्सिवे two रिपोर्ट्स. अल थेसे मत्तेर्स हवे एक्स्पोसेद थे दौबले फस्स ऑफ़ नितीश कुमार एंड SC माय पुट हिम ओं थे दोसक. पटना हाई कोर्ट हद स्त्रन्गेली रिजेक्टेड थे पेतितिओं ऑफ़ अग्ग्रिएवेद पेरसोंस एंड नो थे हवे गोने ओं अप्पाल इन थे सुप्रेमे कोर्ट. माय ब्लॉग व्व्व.क्क्सिन्घ१.ब्लागस्पाट.com

  • मिड डे मिलमहीने में एक बार से ज्यादा नहीं कहीं मिलता है बच्चों को

  • केंद्र हो या राज्य सभी में रिश्वत का बोल बाला हे ऐसी अबस्था में देश को केसे बचायगे ? यह बहुत गभीर मामला हे इस बिषय पर हमको गभीरता से सोचना पड़ेगा क्यों की यह देश की सुरचा का सबाल हे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Input your search keywords and press Enter.