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ऑपरेशन 136 : पतित होती पत्रकारिता का काला चिट्‌ठा
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ऑपरेशन 136 : पतित होती पत्रकारिता का काला चिट्‌ठा

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pressकोबरापोस्ट की तहकीकात ‘ऑपरेशन स्टिंग’ में कई नामी-गिरामी मीडिया कंपनियों को पैसे के आगे निष्पक्ष पत्रकारिता से समझौता करते पाया गया है. देश के कई बड़े मीडिया संस्थान हिंदुत्व के नाम पर धुव्रीकरण के लिए तैयार दिखे, तो कुछ विपक्षी दलों के बड़े नेताओं का दुष्प्रचार करने के लिए राजी हो गए. यहां तक कि सत्ताधारी पार्टी के लिए इन लोगों ने पत्रकारिता की प्रतिष्ठा को दांव पर रखते हुए नागरिक स्वतंत्रता और अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ने वालों के खिलाफ खबरें बनाने पर भी अपनी रजामंदी जाहिर की. देशभर में आंदोलन करने वाले किसानों को माओवादियों द्वारा उकसाए हुए बताकर सरकार की नीतियों का महिमामंडन करने के लिए भी ये सहमत हो गए. सबसे बड़ी बात यह कि न्यायपालिका के फैसलों पर प्रश्नचिन्ह लगाकर उन्हें लोगों के सामने पेश करने में भी इनको कोई गुरेज़ नहीं था.

क्या है ऑपरेशन-136

ऑपरेशन-136 के अंडरकवर रिपोर्टर पत्रकार पुष्प शर्मा थे. इस जांच में पाया गया है कि किस तरह भारतीय मीडिया अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़कर प्रेस की आजादी का गलत इस्तेमाल कर रहा है. पत्रकार पुष्प शर्मा ने श्रीमद भागवत गीता प्रचार समिति उज्जैन के प्रचारक आचार्य छत्रपाल अटल के रूप में देश के सम्मानित और विश्वसनीय माने जाने वाले करीब 3 दर्जन मीडिया संस्थानों के वरिष्ठ और जिम्मेदार अधिकारियों से मुलाकात की. पुष्प ने उन्हें एक खास तरह के मीडिया कैंपेन के लिए 6 से 50 करोड़ तक का बजट बताया, शर्मा ने उन्हें जो एजेंडा बताया था उसमें ये शर्तें शामिल थीं कि मीडिया अभियान के शुरुआती और पहले चरण में हिंदुत्व का प्रचार किया जाएगा, जिसके तहत अनुकूल माहौल तैयार कर धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से हिंदुत्व को बढ़ावा दिया जाएगा.

इसके बाद विनय कटियार, उमा भारती, मोहन भागवत और दूसरे हिंदुवादी नेताओं के भाषणों को बढ़ावा देकर सांप्रदायिक राह पर मतदाताओं को जुटाने के लिए अभियान तैयार किया जाएगा. पुष्प शर्मा ने उसके बाद उनसे कहा कि जैसे ही चुनाव नज़दीक आएंगे यह अभियान हमारे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को टारगेट करेगा. राहुल गांधी, मायावती और अखिलेश यादव जैसे विपक्षी दलों के बड़े नेताओं को पप्पू, बुआ और बबुआ कहकर जनता के सामने पेश किया जाएगा, ताकि चुनाव के दौरान जनता इन्हें गंभारता से न ले और इससे हम मतदाताओं का रुख अपनी ओर करने में कामयाब हो सकें.

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किस मीडिया घराने ने क्या कहा?

कोबरापोस्ट के ऑपरेशन-136 के दूसरे भाग में टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडिया टुडे, हिंदुस्तान टाइम्स, ज़ी न्यूज, स्टार इंडिया, नेटवर्क 18, सुवर्णा, एबीपी, दैनिक जागरण, पेटीएम, रेडियो वन, रेड एफएम, लोकमत, एबीएन आंध्र ज्योति, टीवी 5, दीनामलार, बिग एफएम, के न्यूज़, इंडिया वॉयस, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, भारत समाचार, स्वराज एक्सप्रेस, दैनिक संबाद, एमवीटीवी, ओपन मैग्जीन, बर्तमान पत्रिका और दैनिक संवाद के साथ पुष्प शर्मा की बातचीत में किसने क्या कहा, उसके मुख्य अंश:

कर्नाटक में रेडियो मिर्ची के ग्रुप हेड सेल्स प्रदीप वी ने कहा कि वे पहले भी भाजपा के लिए कैंपेन चला चुके हैं. रेडियो मिर्ची पटना के सीनियर मैनेजर बिनीत कुमार ने अपनी सहमति देते हुए कहा है कि मैं अपने स्क्रिप्ट राइटर से आपको मिलवा दूंगा, वो अपना बना लेगा, थोड़ा थोड़ा, धीरे धीरे… ठीक है. गुवाहटी में टाइम्स ग्रुप के डिप्टी जनरल मैनेजर अंशुमान डे ने कहा कि कुछ चीजें हमें टैक्टिकली छापनी होंगी. टाइम्स ग्रुप के एक्जीक्यूटिव प्रेसीडेंट संजीव शाह पुष्प को सलाह देते हैैं कि हिंदुत्व के एजेंडे के लिए ज़्यादा फिनांसियल कमिटमेंट करने पर टाइम्स ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर विनीत जैन ज़्यादा रूचि लेंगे.

उसके बाद संजीव शाह पुष्प को विनीत जैन से मिलवाते हैं. बातचीत में पुष्प विनीत जैन से पूछते हैं कि क्या पैसे के अलावा भी उनका जुड़ाव संगठन से रहेगा? विनीत कहते हैं, देखने में तो पूरा न्यूट्रल होना चाहिए. जब पुष्प विनीत जैन को बताते हैं कि पेमेंट हिस्सों में होगी और कुछ हिस्सा कैश में भी होगा, इसपर विनीत जैन कोई सवाल नहीं करते. वो पुष्प को कहते हैं कि नहीं, ये कोई समस्या नहीं है. मोबाइल पेमेंट ऐप और पेमेंट बैंक पेटीएम के एक अधिकारी ने तो यह कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय के कहने पर एक राजनीतिक दल को पेटीएम का डाटा दिया गया.

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एबीएन आंध्र ज्योति चैनल के चीफ मार्केटिंग मैनेजर ईवी शशिधर ने कहा कि उनका चैनल उस बड़े पैमाने पर स्थापित है कि वह कर्नाटक के चुनावी नतीजों को भी प्रभावित कर सकता है. स्टिंग से पता चला कि तमिल दैनिक के मालिक लक्ष्मीपति आदिमूलम और उनका परिवार भी संघ को लेकर गहरी निष्ठा रखता है. पुरुषोत्तम वैष्णव, जो ज़ी मीडिया के रीजनल न्यूज चैनलों में सीईओ हैं, अपनी खोजी टीम से राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ स्टोरी कराने और उनके जरिए उन्हें झुकाने पर हामी भरते नजर आए. पुरुषोत्तम ने कहा कि कंटेंट में जो आपकी तरफ से इनपुट आएगा वो शामिल हो जाएगा.

हमारी तरफ से जो कंटेंट जनरेट होगा, तो खोजी पत्रकारिता हम करते हैं, करवा देंगे. जितना हम लोगों ने किया है, उतना किसी ने नहीं किया होगा. वो हम लोग करेंगे. बिग एफएम के सीनियर बिजनेस पार्टनर अमित चौधरी अपनी कंपनी और सत्तारूढ़ दल के बीच रिश्ते को स्वीकार करते हैं और कहते हैं कि वैसे भी रिलांयस बीजेपी का सपोर्टर ही है. ओपन मैग्जीन के अधिकारियों ने कहा कि आचार्य जी, शायद आप भी बिज़ी रहते हैं. आप शायद ओपन देखते नहीं हैं रेगुलर. मैं आपको एक बात बताता हूं. ओपन जितना सपोर्ट करता हैं संगठन का, शायद ही कोई करता होगा.

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सवाल है कि क्या देश की मीडिया से ऐसी हालत में निष्पक्षता की उम्मीद की जा सकती है. मीडिया में ऊंचे पदों पर आसीन लोग पत्रकारिता और सामाजिक जिम्मेदारियों को आज सरेआम नीलाम कर रहे हैं. क्या कभी इसपर कोई लगाम लग पाएगी या पत्रकारिता सिर्फ व्यापार बनकर रह जाएगी.

ऑपरेशन-136 नाम क्यों?

कोबरापोस्ट मूलत: एक खोजी पत्रकारिता संस्थान है. अतीत में भी इसने कई महत्वपूर्ण स्टिंग किए हैं, जिनसे भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है. यह अंडरकवर स्टिंग ऑपरेशन के जरिए कई बार तहलका मचा चुका है. हालिया स्टिंग ऑपरेशन को इसने ऑपरेशन-136 नाम दिया है. ऐसा इसलिए क्योंकि 2017 की वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम रैंकिंग में भारत का स्थान 136वां था. कोबरापोस्ट के मुताबिक़, भारत के बड़े मीडिया समूहों में से कुछ समूह सांप्रदायिकता फैलाने के लिए ही नहीं, बल्कि किसी एक राजनीतिक दल के पक्ष में चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए भी तैयार हैं. इसके साथ ही ये मीडिया समूह पैसे के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं.

हर माल बिकाऊ नहीं होता…

पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा के एक-एक अखबार ने बिकने से मना कर दिया. कोबरापोस्ट के विज्ञापन प्रस्ताव को पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा के एक-एक अखबार ने नकार दिया. आशीष मुखर्जी जो एक बंगाली दैनिक बर्तमान के वरिष्ठ महाप्रबंधक हैं, ने इस प्रस्ताव को तुरंत ही ठुकरा दिया. उन्होंने साफ-साफ उस अंडरकवर रिपोर्टर को कह दिया कि विभाजनकारी और नफरत फैलाने वाली चीजें नहीं प्रकाशित की जाएंगी. जब प्रस्ताव की रकम को एक करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ कर दिया गया, तब भी उन्होंने मना कर दिया. अगरतला के दैनिक संबाद से जुड़े एक अधिकारी ने भी इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि हमारी नीति बहुत साफ है. हम धार्मिक विज्ञापन प्रकाशित नहीं करते.

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