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राम जन्म भूमि पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची केन्द्र सरकार, मांगी विवादित ज़मीन
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राम जन्म भूमि पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची केन्द्र सरकार, मांगी विवादित ज़मीन

अयोध्या: रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केन्द्र ने अयोध्या में विवादास्पद राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद स्थल के पास अधिग्रहण की गई 67 एकड़ जमीन को उसके मूल मालिकों को लौटाने की अनुमति मांगने के लिये मंगलवार को उच्चतम न्यायालय का रुख किया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि अयोध्या में जो गैर विवादित स्थल है, उसे रामजन्मभूमि न्यास को वापस सौंप दिया जाए. सरकार की ओर से कहा गया है कि जिस भूमि पर रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद को लेकर विवाद है वह सुप्रीम कोर्ट अपने पास रखे.

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मोदी सरकार ने अदालत में साफ़ कर दिया है कि गैर विवादित जमीन रामजन्मभूमि न्यास को सौंपी जाए, ताकि उस हिस्से पर निर्माण शुरू हो सके. बता दें कि आज ही सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर सुनवाई होनी थी, लेकिन जस्टिस बोबडे के छुट्टी पर जाने की वजह से सुनवाई टल गई.

मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि अयोध्या में हिंदू पक्षकारों को जो हिस्सा दिया गया है, वह रामजन्मभूमि न्यास को दे दिया जाए. जबकि 2.77 एकड़ भूमि का कुछ हिस्सा भारत सरकार को लौटा दिया जाए.


अयोध्या में रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद के आसपास की करीब 70 एकड़ जमीन केंद्र सरकार के पास है. इसमें से 2.77 एकड़ की जमीन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था. जिस भूमि पर विवाद है वह जमीन 0.313 एकड़ ही है. 1993 में सुप्रीम कोर्ट ने इस जमीन पर स्टे लगाया था और किसी भी तरह की एक्टविटी करने से इनकार किया था.

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सरकार का कहना है कि इस जमीन को छोड़कर बाकी जमीन भारत सरकार को सौंप दी जाए. मोदी सरकार का कहना है कि जिस जमीन पर विवाद नहीं है उसे वापस सौंपा जाए.

गौरतलब है कि 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मामले की सुनवाई होनी थी, लेकिन वह टल गई. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पांच जजों की पीठ कर रही है. जिसमें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस अब्दुल नजीर, जस्टिस एस. ए. बोबडे और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ शामिल हैं.

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