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दागदार दामन को निशंक दबंगई से धोना चाहते हैं
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दागदार दामन को निशंक दबंगई से धोना चाहते हैं

उत्तराखंड राज्य के मुखिया डा. रमेश पोखरियाल निशंक पर जिस तरह एक के बाद एक भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे है, उससे इस बात की आशंका ब़ढ जाती है कि सूबे के मुखिया का दामन  बेदाग़ नहीं है. यह बात दीगर है कि रंगमंच एवं पत्रकारिता की उपज निशंक अपने दामन पर लगे दाग़ को अपनी दबंगयी से लोकतांत्रिक रास्ते से हट कर धोने का लगातार प्रयास कर रहे है.

भारतीय जनता पार्टी हाईकमान ने भी राज्य के पूर्व सैनिकों की भावना का सम्मान करते हुए अवकाश प्राप्त जनरल खंडूरी को सूबे की सत्ता की कमान सौंप कर देश के सैनिकों को एक संदेश देते हुए सैन्य परिवारों के प्रति आभार व्यक्त किया. राज्य की सत्ता संभालकर जनरल खंडूरी ने एक ईमानदार मुख्यमंत्री की छवि के साथ एक अनुशासन प्रिय और कठोर शासक के रूप में दिखे. उनकी ईमानदारी राज्य के भू-मा़फियाओं सहित सत्ता का दोहन कर काली कमाई करने वालों पर बहुत भारी पड़ी जिसके चलते वे ऐसे लोगों की आंख की किरकिरी बन गए.

सूबे के मुख्यमंत्री की कार्य शैली में पूरी तरह से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के पद चिन्हों पर चलने की झलक देखी जाने लगी है. जिसके चलते निशंक की कार्यप्रणाली ने कांग्रेस और बसपा जैसे प्रमुख विपक्षी दलों के कान तो खड़े ही कर दिए है, साथ ही उनके दल के खंडूरी जैसे ईमानदार छवि के नेता भी अपनी उपेक्षा के बावजूद चुप रहने में अपनी भलाई समझ रहे है.

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सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री खंडूरी ने जिस तरह लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद राज्य के मुख्यमंत्री पद को अनुशासन में रह कर छोड़ा, उससे उनकी छवि एक ईमानदार और अनुशासन प्रिय सिपाही की बनी. पर हाल ही में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने भी अपनी अपनी नई टीम के गठन में खंडूरी को नज़रंदाज़ कर दिया. बताया जाता है कि गडकरी ने ऐसा निशंक के इशारे पर किया. भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारी के रूप में अवकाश प्राप्त करने वाले जनरल खंडूरी ने भारतीय राजनीति में पदार्पण के अपने फैसले के पूर्व भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने के पूर्व इस दल में ईमानदार छवि वाले अटल बिहारी वाजपेयी का चेहरा देखने के साथ सैन्यअधिकारी के सम्मान का सपना भी देखा था. अवकाश प्राप्त अधिकारियों में इसका एक अच्छा संदेश भी गया था. खंडूरी ने भी केंद्रीय मंत्री के रूप में एक ईमानदार मंत्री की छवि पेश करने के साथ सैनिक बाहुल्य उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी की शानदार वापसी के साथ नारायण दत्त तिवारी सरकार को भी धूल चटाई थी. अपने कठोर परिश्रम से उन्होंने उत्तराखंड की जनता को यह अहसास कराया कि कांग्रेस के कुशासन से कोई फौजी ही निज़ात दिला सकता है. राज्य की जनता ने उन्हीं के आह्‌वान पर तिवारी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंका.

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भारतीय जनता पार्टी हाईकमान ने भी राज्य के पूर्व सैनिकों की भावना का सम्मान करते हुए अवकाश प्राप्त जनरल खंडूरी को सूबे की सत्ता की कमान सौंप कर देश के सैनिकों को एक संदेश देते हुए सैन्य परिवारों के प्रति आभार व्यक्त किया. राज्य की सत्ता संभालकर जनरल खंडूरी ने एक ईमानदार मुख्यमंत्री की छवि के साथ एक अनुशासन प्रिय और कठोर शासक के रूप में दिखे. उनकी ईमानदारी राज्य के भू-मा़फियाओं सहित सत्ता का दोहन कर काली कमाई करने वालों पर बहुत भारी पड़ी जिसके चलते वे ऐसे लोगों की आंख की किरकिरी बन गए. देश में संपन्न हुए संसदीय आम चुनाव में जहां एक ओर एनडीए सरकार के फीलगुड की हवा कांग्रेस के राहुल गांधी के हाथों निकली, वहीं राज्य की पांच सीटों पर रिश्तेदारों की मनमानी टिकट वितरण से भी भाजपा का बुरा हाल हुआ. इस चुनाव में भाजपा की हार का ठीकरा जहां जनरल के सिर फूटा, वहीं राहुल गांधी के युवा कार्ड की बल्ले-बल्ले हो गई. राजनैतिक दृष्टि से देखा जाए तो इस हार के लिए अकेले खंडूरी को ही ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए. मौक़ा मिलते ही राजनीति के खिलाड़ी निशंक ने जनरल के ख़िला़फ बग़ावत का झंडा बुलंद करने वालों को हवा देकर राज्य से जनरल की विदाई करा दी.

डा.निशंक सरकार पर हरिद्वार महाकुंभ में सरकारी धन की खुली लूट के आरोप के साथ ही घटिया निर्माण के अरोप की क़ालिख़ अभी धुंधली भी नहीं पड़ी थी कि राज्य के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने 700 मेगावाट जल विद्युत परियोजनाओं की खुली बिक्री का आरोप सड़क से सदन तक जड़ दिया. प्रतिपक्ष के नेता हरक सिंह रावत का आरोप है कि सरकार के मुखिया के इशारे पर शराब व्यवसायियों को बिना गुण दोष की विवेचना किए 11 परियोजनाएं आवंटित कर दी गई हैं. हरिद्वार कुंभ में कुल 571 करोड़ की 306 योजनाओं में सरकार द्वारा भारी लूट के आरोपों के कांग्रेसी नेता सीबीआई द्वारा जांच चाहते हैं.

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राज्य सरकार ने सूबे में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्ज़ा दे दिया है. संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति रहे जयराम ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी उसे संस्कृत भाषा के साथ छल किया जाना बताते हुए कहते है कि राज्य में संस्कृत से जुड़ी संस्थाओं का बुरा हाल है सरकार ऐनकेन प्रकारेण अपने हाथों अपनी पीठ थपथपाने में जुटी है. उनका कहना है कि सरकार बालू की दीवार बना कर जनता के साथ धोखा कर रही है. पिथौरागढ़ में जल के स्रोत विषैले हो चुके हैं, जनता को पीने के पानी का भारी संकट झेलना पड़ रहा है. यह इलाक़ा संसदीय कार्य मंत्री का है. यद्यपि सूबे के मुख्यमंत्री अपनी सरकार पर लगे सभी आरोपों को एक सिरे से ख़ारिज करते है, पर आग के बिना धुआं उठने का सच उन्हें बेदाग़ नहीं छोड़ रहा है.

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