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दर्द से कराहती ज़िंदगी दूषित पानी से विकलांग होते ग्रामीण
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दर्द से कराहती ज़िंदगी दूषित पानी से विकलांग होते ग्रामीण

यूनीसेफ की सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक़ पूरे भारत वर्ष के 20 राज्य के ग्रामीण अंचलों मे रहने वाले लाखों लोग फ्लोराइड युक्त पानी के सेवन से फ्लोरोसिस के शिकार हैं. सर्वाधिक प्रभावित राज्यों मे आंध्रप्रदेश, गुजरात एवं राजस्थान है, जहां 70 से 100 प्रतिशत ज़िले फ्लोरोसिस से प्रभावित हैं, जबकि बिहार, दिल्ली, हरियाणा, झारखंड कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, तमिलनाडु एवं उत्तरप्रदेश में फ्लोरोसिस प्रभावित जिले 40 से 70 प्रतिशत हैं.

तमाम सरकारी दावे और प्रदेश के मुखिया डॉ. रमन सिंह का तथाकथित चाउर वाले बाबा का नाम उस वक़्त बेमानी लगता है, जब फ्लोरोसिस से पीड़ित दर्द से कराहती तीन बच्चों की मां नोनीबाई रूंधे गले से यह कहती है कि दवा तो दूर ग़रीबी रेखा का राशन कार्ड ना बन पाने के कारण दो वक़्त के अनाज के लिए दूसरों का मुंह ताकना पड़ता है.

छत्तीसगढ़ के 51 कस्बो के लगभग 5250 ग्रामीणों के लिए जीवन दायिनी जल ज़हर बन गया है. फ्लोराइड से दूषित हैण्ड पम्पों और कुंए का पानी पीकर हज़ारों ग्रामीण फ्लोरोसिस के दर्द से कराह रहे हैं. भारत सरकार के ग्रामीण जल आपूर्ती कार्यक्रम के तहत ग्रामीणों को फ्लोराइड युक्त पानी के सेवन से मुक्ति दिलाने का प्रयास तो जारी है, लेकिन दर्द से कराह रहे पीड़ितों के लिए  दवा सरकार के पास नही है. ग़रीबी की मार पहले ही से झेल रहे इन ग्रामीणों को अब बिना दवा के दर्द की दोहरी मार ने ज़िंदगी से लड़ने का हौसला भी समाप्त कर दिया है.

तमाम सरकारी दावे और प्रदेश के मुखिया डॉ. रमन सिंह का तथाकथित चाउर वाले बाबा का नाम उस वक़्त बेमानी लगता है, जब फ्लोरोसिस से पीड़ित दर्द से कराहती तीन बच्चों की मां नोनीबाई रूंधे गले से यह कहती है कि दवा तो दूर ग़रीबी रेखा का राशन कार्ड ना बन पाने के कारण दो वक़्त के अनाज के लिए दूसरों का मुंह ताकना पड़ता है. पिछले सात सालों से खाट पर लेटी नोनीबाई की ज़िंदगी मे अंतहीन दर्द है. कोरबा ज़िले के पोढ़ी उपरोढ़ा विकासखंड के बिंझरा ग्राम पंचायत के कौआताल मोहल्ले की निवासी नोनीबाई के हैंडपंप का फ्लोराइड युक्त पानी ज़हर बन गया. अकेले नोनीबाई ही नहीं ग्राम के 21 परिवार फ्लोराइड युक्त पानी के सेवन से फ्लोरोसिस नामक बीमारी से पीड़ित है. फ्लोराइड युक्त पानी के सेवन ने ना केवल ग्राम की महिलाओं, पुरूषों की हडि्‌डयों को कमज़ोर कर दिया है, बल्कि उन्हें विकलांग बना दिया है. इस लाईलाज बीमारी फ्लोरोसिस ने लोगों के शरीर में एक ऐसा दर्द दे दिया है, जिससे निजात मिलना अब मुश्किल है. यह दर्द महज़ शरीर की हडि्‌डयो का नहीं बल्कि उस ज़िंदगी का है जो उन्हें दूसरों के सहारे बितानी है. पीने के पानी से मिले इस विकलांगता के शिकार ग्रामीणों को सरकारी मदद के नाम पर मुआवज़ा और विकलांगता प्रमाण पत्र तो दूर अब तक दर्द की दवा भी नही मिल पाई है.

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छत्तीसगढ़ आसाम, जम्मू एवं कश्मीर, केरल तथा पश्चिम बंगाल के 10 से 40 प्रतिशत ज़िले फ्लोरोसिस से प्रभावित हैं. छत्तीसगढ़ राज्य मे सर्वाधिक प्रभावित ज़िलों मे बीजापुर है जहां 31 कस्बों के हज़ारों ग्रामीण फ्लोरोसिस से पीड़ित हैं. छत्तीसगढ़ के दुर्ग मे 7 ग्राम, रायगढ़ मे 6 ग्राम कोरबा मे 6 ग्राम और बिलासपुर का एक ग्राम इसकी चपेट में है. वहीं मध्यप्रदेश के छिंन्दवाड़ा, धार, विदिशा, शिवनी, सीहोर, रायसेन, मंदसौर, नीमच, उज्जैन एवं ग्वालियर ज़िले भी फ्लोरोसिस से प्रभावित हैं.

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दरअसल दूषित जल के सेवन के मामले प्रकाश मे आने के बाद देश भर मे ग्रामीण पेयजल के सर्वेक्षण का कार्य पहली बार राज्य स्तर पर 1991 मे शुरू किया गया जिसके बाद लगातार इन रिपोर्टों को अपडेट किया गया. रायगढ़ ज़िले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी एच.एस. उरांव के मुताबिक़ ज़िले के तमनार विकासखण्ड के पांच ग्रामों के कुल 43 लोग फ्लोरोसिस बीमारी से पीड़ित पाए गए हैं, जिसके बाद पी.एच.ई. विभाग द्वारा तत्कालिक तौर पर टैंकरों मे पानी की आपूर्ति की गई थी. बाद मे दूषित हैंडपंपों को बंद कर दिया गया और नए हैंडपंप लगाए गए हैं. फिलहाल ग्रामीणों को सा़फ जल मिल रहा है, जिसके कारण मरीज़ों की संख्या यथावत है. श्री उरांव की अगर माने तो वर्तमान मे हालात ठीक है, लेकिन यह भी सत्य है कि प्रभावित ग्रामों के भूगर्भ में फ्लोराइड की मात्रा है. भविष्य मे इन्हीं नए हैंडपम्पों के भी फ्लोराइड से दूषित होने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है.

छत्तीसग़ढ के ग़ैर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के हालात तो फिर भी थोडे ठीक हैं लेकिन नक्सल प्रभावित क्षेत्र की दास्तां तो सबसे जुदा है. छत्तीसगढ़ में बीजापुर ज़िले के जिस भोपालपट्‌टनम ग्राम के सर्वाधिक जल स्त्रोतों को भारत सरकार ने फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्र माना है. वहां के पीएचई विभाग के एसडीओई टोप्पो से जब चौथी दुनिया ने हालात की जानकारी ली तो उन्होनें बताया कि यहां किसी भी प्रकार का कार्य नहीं किया गया है, क्योंकि जल परीक्षण के दौरान फ्लोराइड की मात्रा कम पाई गई है. वहीं पीएचई विभाग के ही कार्यपालन अभियंता वी के उर्मलिया ने चौथी दुनिया को बताया कि बीजापुर ज़िले के 5 ग्राम भोपालपट्‌टनम, रालापल्ली, गोल्लागुडा, गुलापेंटा एवं गोटाईगुडा क्षेत्र मे 3 से 3.5 मिलीग्राम प्रति लीटर फ्लोरोसिस की मात्रा पाई गई है, जिससे आंशिक रूप से ग्रामीण प्रभावित हैं. वर्तमान मे 6 किमी दूर स्थित इंद्रावती नदी से पाईप लाइन बिछाकर प्रभावित ग्रामों मे जल आपूर्ति किए जाने की कार्य योजना तैयार की जा रही है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि भारत सरकार ने 1 मिली ग्राम से अधिक मात्रा को शरीर के लिए हानिकारक माना है. दोनो ही अधिकारियों की बातों से यह स्पष्ट है कि आदिवासी ग्रामीण अब भी दूषित जल का सेवन कर रहें है. नक्सल प्रभावित क्षेत्र की वर्षों से दास्तां यही है कि तमाम सरकारी योजनाएं इन इलाक़ों मे पहुंचते पहुंचते दम तोड़ देती है. सूत्रों की अगर मानें तो नक्सलवाद के नाम पर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय से योजनाओं के रकम की बंदरबाट जारी है. वैसे भी सरकार को नक्सलियों की चिंता है, नक्सलवाद की नहीं.

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भारत सरकार के मांपदण्ड के तहत दूषित जल स्त्रोतों को प्रति 250 व्यक्तियों के बीच मौजूद जल स्त्रोतों के तहत चिन्हांकित किया गया है. छत्तीसगढ़ मे 16 ग्राम पंचायतों के 21 ग्रामों के 51 जल स्त्रोतों को फ्लोराइड से दूषित पाया गया है, इस आधार पर अगर गणना करें तो लगभग 5250 लोग प्रदेश भर मे आज भी फ्लोराइड युक्त पानी के सेवन से आंशिक या पूर्णत: प्रभावित हैं. सरकारी आंकड़ो के मुताबिक़ देश भर मे विभिन्न धातुओं से दूषित जल के 1658323 स्त्रोत हैं. यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि देश भर मे दूषित जल के सेवन से प्रभावित लोगों की संख्या करोड़ो में है.

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