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दिल्‍ली का बाबूः बाबुओं का पलायन
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दिल्‍ली का बाबूः बाबुओं का पलायन

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में राजनीतिक बदलाव होते ही, उम्मीद के मुताबिक़ राजधानी समेत राज्य के कई हिस्सों में प्रशासनिक फेरबदल की कवायद शुरू हो गई है. अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग का दौर शुरू हो गया है. अपने कार्यकाल के पहले दिन ही जयललिता ने राज्य के मुख्य सचिव वाई एस मालती और गृह सचिव के गनानदेसिकन समेत कई अधिकारियों को उनके पद से हटा दिया. इसमें कोई शक नहीं कि यह महज़ अभी शुरुआत है. पश्चिम बंगाल में तो पहले से ही कई बाबू राज्य से कूच कर चुके थे. इसमें एक नाम है सुमित मित्रा का. वह अब केंद्रीय राजस्व सचिव हैं. मित्रा साल भर पहले ही कोलकाता से निकल कर दिल्ली पहुंच गए थे और शायद अवकाश के बाद ही वापस लौटे. राइटर्स बिल्डिंग से भी पलायन जारी है. इनमें से जो लोग दिल्ली जाना चाहते हैं, उनमें मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रधान सचिव सुभेश दास और स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक सुब्रत गुप्ता का नाम शामिल है. इसी तरह कुछ ऐसे भी बाबू हैं, जो इस बदले माहौल में कोलकाता वापस लौटना चाहते हैं. जैसे संस्कृति मंत्रालय के सचिव जवाहर सरकार. यानी पलायन दोनों तऱफ से होने जा रहा है.

कृष्णा के प्रशंसक

मलकानगिरी के जिलाधिकारी आर वी कृष्णा आठ दिनों तक माओवादियों के कब्जे में रहे और एक खौफनाक अनुभव से गुजरे, लेकिन इस घटना के बाद वह दिल्ली के बाबुओं की जमात में काफी चर्चित हो गए हैं. कई ऐसे बाबू हैं, जो कृष्णा के प्रशंसक बन गए हैं. पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश तो कृष्णा को दिल्ली लाना चाहते हैं. उन्होंने कृष्णा को अपना पर्सनल सेक्रेटरी बनाने का फैसला कर लिया है. सूत्रों के मुताबिक, वह कृष्णा के काम से काफी प्रभावित हैं. खासकर पर्यावरण से जुड़े कई प्रोजेक्ट्‌स पर कृष्णा द्वारा दिखाई गई तत्परता से वह काफी खुश हैं. सूत्र बताते हैं कि कृष्णा की केंद्र में तैनाती के लिए रमेश ने उड़ीसा सरकार से औपचारिक अनुरोध भी किया है. एक बार कागजी काम खत्म हो जाने के बाद 2005 बैच के इस आईएएस अधिकारी की नई तैनाती की संभावना बनती दिख रही है.

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