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दिल्‍ली का बाबूः चुनावी दबाव
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दिल्‍ली का बाबूः चुनावी दबाव

चुनाव आयोग के अधिकारियों के लगातार पश्चिमी बंगाल के दौरों से न स़िर्फ सत्ताधारी वामपंथी दल, बल्कि राज्य सरकार के बाबू भी परेशान हैं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों जकी अहमद और पीआरके नायडू ने बंगाल के ज़िला स्तर के बाबुओं को निर्देश दिया है कि वे ऐसे संभावित लोगों की पहचान करें, जो चुनाव के व़क्त अशांति फैला सकते हैं और अवैध हथियार ज़ब्त करें. ज़िला अधिकारियों और पुलिस कप्तानों को चुनाव के समय शांति बनाए रखने की पूरी ज़िम्मेदारी दे दी गई है. चुनाव आयोग ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों शिवधर रेड्डी, पी एस रणपीसे और डी के पांडे को इस बात के लिए भेजा है कि वे इस बात की जांच करें कि वहां के अधिकारी चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन कर रहे हैं या नहीं. ज़ाहिर है, ऐसे हालात बाबुओं के लिए सुविधाजनक तो नहीं हो सकते हैं.

रेलवे के बाबुओं की मुश्किलें

कुछ सालों तक लाभ कमाने के बाद ऐसा लग रहा है कि अब भारतीय रेलवे को असलियत का एहसास हो गया है. 22 सौ करोड़ रुपये के घाटे के बाद अब रेलवे बोर्ड ने अपने खर्चों में कटौती करने की योजना बनाई है. बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय ने बाबुओं को निर्देश दिया है कि वे खर्च में कटौती करें और आमदनी बढ़ाने के उपाय खोजें. इस बीच, सूत्रों का मानना है कि रेलवे 39500 करोड़ रुपये की सहायता मांग सकता है. हालांकि वित्त मंत्रालय ने अड़ंगा डाला तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं, लेकिन रेलवे के बाबुओं के लिए ऐसी स्थिति बन रही है कि उन्हें बहुत ही ज़रूरी यात्रा करने, ओवरटाइम-यात्रा भत्ता रोकने और ठेकेदारों के भुगतान की गति धीमी करने का आदेश दिया जा रहा है. दिलचस्प रूप से ईस्टर्न जोन को इस दायरे में शामिल नहीं किया गया है. शायद इसलिए, क्योंकि यह ममता बनर्जी के गृहराज्य में भी आता है.

राजनयिकों पर राव ने कसा शिकंजा

विदेश में दो वरिष्ठ भारतीय राजनयिकों के घरेलू हिंसा और यौन उत्पीड़न के मामले में फंसने के बाद विदेश मंत्रालय इस कोशिश में है कि भविष्य में ऐसी शर्मिंदगी फिर न उठानी पड़े. ये मामले बहुत ज्यादा चर्चा में आए थे. विदेश सचिव निरुपमा राव ने विदेशों में भारतीय दूतावास और उच्चायोग के प्रमुखों को एक पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि वे अपने स्टाफ द्वारा अपनी ग़लती छुपाने के लिए किए जाने वाले कृत्यों को बिल्कुल बर्दाश्त न करें. सूत्रों के मुताबिक़, राव ने अपने पत्र में कम शब्दों का इस्तेमाल करते हुए एक कड़ा संदेश दिया है. मंत्रालय की ओर से जारी ताज़ा निर्देशों के मुताबिक़, ऐसे किसी भी राजनयिक को, जो विवादास्पद मामलों में फंसता है, तत्काल वापस बुला लिया जाएगा. साथ ही उसे मंत्रालय की ओर से होने वाली जांच का सामना भी करना पड़ेगा, ताकि यह फैसला किया जा सके कि वह दोषी है या नहीं.

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