fbpx
Now Reading:
दिल्‍ली का बाबू : नौकरशाहों का शोर-दिल्ली चलो
Full Article 2 minutes read

दिल्‍ली का बाबू : नौकरशाहों का शोर-दिल्ली चलो

वामपंथी धड़े से जुड़े राजनीतिज्ञ यदि पूर्वाभासों में भरोसा रखते हैं, तो उन्हें पश्चिम बंगाल और केरल में नौकरशाही के बदले रुख पर गौर करना चाहिए. जैसा कि हमने पहले भी बताया था कि पश्चिम बंगाल कैडर के कई वरिष्ठ अधिकारी राज्य से बाहर प्रतिनियुक्ति के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं. अब तो हालत यह है कि ऐसे नौकरशाहों की संख्या लगातार तेजी से बढ़ती ही जा रही है. उन्हें लगने लगा है कि राज्य में वामदलों की सरकार के दिन अब लदने ही वाले हैं. हालांकि वामपंथी नेता खुलकर ऐसा मानने से इंकार करते हैं. बदलाव की इस बयार में सत्ता की खुशबू ममता बनर्जी के इर्द-गिर्द ज्यादा महसूस की जा रही है.

Related Post:  विधानसभा उम्मीदवार को बदमाशों ने एक, दो या तीन नहीं, 26 गोलियों मारी थी- देखिये वीडियो

सूत्रों पर भरोसा करें तो दीदी के कार्यालय में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की गुहार लगाने वाले अधिकारियों की फाइलों का अंबार लग रहा है. वाममोर्चे की सरकार और भी ज्यादा परेशान है, क्योंकि केंद्र प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले अधिकारियों के कोटे में कमी करने के लिए तैयार नहीं हो रहा. कमोबेश यही हाल अब वामदलों द्वारा शासित एक और राज्य केरल में भी देखने को मिल रहा है. खबरों के मुताबिक, केवल पिछले तीन सालों में कम से कम 30 आईएएस अधिकारी राज्य से बाहर गए हैं और 40 वरिष्ठ अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं. कई अन्य नौकरशाह जिनमें मुख्य सचिव नीला गंगाधरन भी शामिल हैं, राज्य से बाहर निकलने के लिए बेताब हैं. राज्य के बाहर निकलने की इस जद्दोजहद की वजह तो उक्त अधिकारी खुल कर नहीं बताते, लेकिन लोगों का मानना है कि सरकारी कामकाज में राजनीतिक हस्तक्षेप और वामदलों के बीच आपसी खींचतान से इनका जीना दूभर हो गया है. फिर हालिया चुनावों में वामदलों के खराब प्रदर्शन से इनकी हालत और भी पतली हो गई है.

Related Post:  टैक्सी ड्राइवर पर यात्रियों ने किया जानलेवा हमला, कार लावारिस हालत में खड़ी मिली

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Input your search keywords and press Enter.