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गडकरी का हेडमास्‍टर कौन?
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गडकरी का हेडमास्‍टर कौन?

नितिन गडकरी, तुम्हारे स्कूल का हेडमास्टर कौन है? जैसा सवाल दागकर देवभूमि उत्तराखंड की शिक्षित जनता ने भारतीय जनता पार्टी के लिए परेशानी खड़ी कर दी है. देहरादून के परेड मैदान में अपेक्षा के अनुरूप जनता की मौजूदगी न देखकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एक बार फिर बहक गए और उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस से सवाल कर डाला कि अ़फजल गुरु उसका जमाई लगता है क्या? कांग्रेस ने उसे अपनी बेटी दे रखी है क्या, जिससे वह उसकी ह़िफाज़त करती फिर रही है? नितिन गडकरी का यह बयान भारतीय जनता पार्टी के लिए कितना आत्मघाती सिद्ध हो सकता है, इसकी कल्पना भी अगर गडकरी को होती तो वह निश्चित रूप से जनता के बीच ऐसे सवाल न करते. वैसे इस तरह की बचकानी बयानबाज़ी उनकी पहचान बनती जा रही है.

देहरादून एवं यहां की जनता पूरे देश में प्रबुद्धता के लिए जानी जाती है. किसी भी राजनीतिक दल का नेता यहां आता है और भाषण करता है तो उसे सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. यह पहला अवसर था कि सूबे के नेताओं के तमाम प्रयासों के बावजूद गडकरी की सभा में लोगों की मौजूदगी कम रही.

देहरादून एवं यहां की जनता पूरे देश में प्रबुद्धता के लिए जानी जाती है. किसी भी राजनीतिक दल का नेता यहां आता है और भाषण करता है तो उसे सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. यह पहला अवसर था कि सूबे के नेताओं के तमाम प्रयासों के बावजूद गडकरी की सभा में लोगों की मौजूदगी कम रही. निशंक सरकार एवं भाजपा के दिग्गजों को भी ऐसी उम्मीद नहीं थी. इसके लिए ख़राब मौसम भी एक कारण रहा. फिर भी राज्य भर से बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता आए थे. अपेक्षित भीड़ न पाकर नितिन गडकरी अपने भाषण को चर्चित बनाने के लिए कुछ इस कदर बहके कि उन्होंने आतंकी अ़फजल गुरु को कांगे्रस का दामाद बता डाला. इसके पहले भी नितिन ने एक कहावत के ज़रिए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव एवं राजद प्रमुख लालू प्रसाद पर सोनिया गांधी के तलवे चाटने का आरोप लगाकर बचकानी बयानबाज़ी का नमूना पेश किया था. इससे उत्तर प्रदेश के समाजवादियों में खासा उबाल आ गया था. सपा कार्यकर्ताओं ने नितिन गडकरी का पुतला तक फूंक डाला था. गडकरी द्वारा मुलायम सिंह यादव एवं लालू प्रसाद से मा़फी मांगने के बाद ही मामला शांत हो सका था.

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अब एक बार फिर उन्होंने बचकाना बयान देकर ख़ुद को विवादों के घेरे में खड़ा कर दिया है. उनके बयान पर जितना उबाल कांग्रेसजनों में है, उससे कहीं ज़्यादा सूबे की शिक्षित जनता में है. देवभूमि, जिसे कभी भाजपा मॉडल प्रदेश बनाने का सपना देखती थी, अब वहीं की जनता ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी की शिक्षा एवं संस्कारों को लेकर सवाल खड़ा कर दिया है. वह यह जानने पर तुली है कि गडकरी ने जिस स्कूल में शिक्षा ग्रहण की, उसका हेडमास्टर कौन है? जिसके चलते उन्हें इतने घटिया संस्कार मिले हैं. नितिन ने मंच से जब यह सवाल कांग्रेस एवं उसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष से किया तो उन्होंने सोचा कि आतंकवाद के मुद्दे पर वह कांग्रेस को घेर लेंगे और जनता वाह-वाह कर उठेगी, किंतु ऐसा नहीं हुआ. गडकरी यह भी भूल गए कि वह उस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, जिसके नेतृत्व वाली एनडीए सरकार कांधार कांड को लेकर अपनी ज़बरदस्त किरकिरी करा चुकी है और भाजपा के असली चेहरे से जनता पहले ही वाक़िफ हो चुकी है. ऐसे में वह किसी राजनीतिक मंच से इस तरह के सवाल करके क्या संदेश देना चाहते हैं? उनका सवाल भले ही कांग्रेस के लिए था, किंतु अब वह उनके और उनकी पार्टी के लिए भारी पड़ रहा है.

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उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हरक सिंह रावत का कहना है कि यहां की जनता ने भाजपा की संस्कारविहीनता के कारण ही संसदीय चुनाव में उसे पूरी तरह नकार दिया. इतनी घटिया बयानबाज़ी तो कोई गांव स्तर का कार्यकर्ता भी नहीं करता, जैसी गडकरी ने सार्वजनिक मंच से कर दी. यह स़िर्फ उनकी बचकानी हरक़त नहीं है, बल्कि भाजपा का संस्कारहीन चरित्र है, जो देश एवं लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है. हरक सिंह ने कांधार कांड का हवाला देते हुए सवाल किया कि वाजपेयी सरकार ने भी आतंकियों की सेवा में विमान भेजे थे. अब नितिन गडकरी को बताना चाहिए कि क्या वे आतंकवादी भाजपा के जमाई लगते थे? उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति एवं जैराम संस्थाओं के अध्यक्ष पीठाधीश्वर ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने गडकरी के बयान की निंदा करते हुए कहा कि इससे पूरी भारतीय जनता पार्टी में संस्कार लोप हो जाने का संकेत मिलता है. उन्होंने भाजपा को सुझाव के साथ आमंत्रण भी दिया कि वह अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को संस्कारों एवं सद्विचारों की शिक्षा हेतु दो माह के लिए उनके आश्रम को सौंप दे. उन्हें ईश्वर से प्रार्थना करके संस्कारवान बना दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि नितिन गडकरी का सवाल उनके मानसिक दिवालियापन का परिचायक है. इसे ईश्वरीय कृपा द्वारा ही ठीक किया जा सकता है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल आर्या कहते हैं कि इस बयान की वजह भाजपा के जनाधार का खिसकना है. इसके लिए गडकरी को कांग्रेस के साथ-साथ देहरादून की जनता से भी मा़फी मांगनी चाहिए. कांग्रेस के पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद्र शर्मा ने कहा कि यह भाजपा के पतन का संकेत है. उसका बड़बोलापन अब जनता को भी नागवार लगने लगा है. गडकरी ने ऐसा बयान देकर निशंक सरकार के घोटालों की चर्चा को ढंकने की कोशिश की है.

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उत्तराखंड में अपने तीन कार्यक्रमों में भाग लेने पहुंचे गडकरी अलग-अलग तरह की पोशाकों में दिखे. जनाक्रोश रैली में वह सफेद-कुर्ता पायजामा पहन कर आए, लेकिन उनके बयान ने उन्हें बदरंग करके रख दिया. इस अवसर पर अपेक्षित भीड़ न जुटने से निशंक सरकार की लोकप्रियता पर सवाल खड़े हो गए हैं. कुछ लोग इस रैली को निशंक सरकार की चला-चली की बेला वाली रैली की संज्ञा दे रहे हैं. जनाक्रोश रैली में जनता में कहीं वह आक्रोश नहीं दिखा, जिसका भाजपा ने प्रचार किया था. पार्टी से जुड़ी कई महिला नेताओं ने आपस में ही कानाफूसी करते हुए कहा, अरे, अध्यक्ष जी को यह क्या हो गया? टिहरी से आईं महिला नेताओं के एक दल ने कहा, इससे अच्छे तो राजनाथ सिंह थे. दून की एक महिला पत्रकार ने सूचना अधिकार क़ानून का सहारा लेकर महाराष्ट्र सरकार से गडकरी की शैक्षिक योग्यता की जानकारी मांगी है.

3 comments

  • राम राम सब का शुभ हो

  • थौंक्स ,आप का सुझाव हम अमल कराइ गा

  • समसामयिक सन्दर्भों एवं देश के समक्ष प्रस्तुत चुनोतियों यथा महगाई बेरोजगारी आर्थिक मंदी .फेलती महामारियां धर्मान्धता जातियाधारित वैमनस्य तथा वोट के घनचक्कर में सामाजिक विप्लव इत्यादि विषयों पर प्रबुद्ध जनों के विचार प्रकाशित हों ऐसी अपेक्षा के साथ शुभकामनायें .

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