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हसनपुर विधानसभा में चुनावी तपिश बढ़ी
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हसनपुर विधानसभा में चुनावी तपिश बढ़ी

समस्तीपुर क्षेत्र के बाद हसनपुर क्षेत्र की गिनती प्रतिष्ठित क्षेत्रों में होती है. इसका कारण है समस्तीपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले जननायक कर्पूरी ठाकुर ने बिहार के मुख्यमंत्री पद को सुशोभित किया, वहीं हसनपुर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक गजेंद्र प्रसाद हिमांशु बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष पद को सुशोभित कर चुके हैं. लालू प्रसाद के शासनकाल के दौरान राजद सुप्रीमो द्वारा क्षेत्र के दिग्गज नेता व तत्कालीन मंत्री गजेंद्र प्रसाद हिमांशु के भतीजे सुनील कुमार पुष्पम को विधानसभा की राजनीति में उतारा गया था. तब से लेकर आज तक वह तीन बार क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. पिछली बार के चुनाव में राजद विधायक पुष्पम से टक्कर लेने उनके चाचा गजेंद्र प्रसाद हिमांशु जदयू के टिकट पर और कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में शीला सिंह एवं लोजपा से रामनारायण मंडल चुनावी जंग में उतरे थे, लेकिन बाजी सुनील कुमार पुष्पम के हाथ लगी. अब जबकि आगामी विधानसभा चुनाव नए परिसीमन के अंतर्गत होना है और हसनपुर क्षेत्र का परिदृश्य बदला-बदला सा है, ऐसे में वहां ज़्यादा गहमागहमी चल रही है. मालूम हो कि पिछले संसदीय चुनाव में ज़िले के हसनपुर विधानसभा क्षेत्र को निकटवर्ती खगड़िया संसदीय क्षेत्र में शामिल कर लिया गया है. इससे हसनपुर विधानसभा की राजनीति में समस्तीपुर एवं खगड़िया ज़िले के जदयू सांसद की सक्रियता भी का़फी मायने रखती है. ग़ौरतलब है कि पूर्व में हसनपुर विधानसभा क्षेत्र रोसड़ा (सु.) संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता था. नए परिसीमन के मुताबिक़ जब रोसड़ा (सु.) संसदीय क्षेत्र को समाप्त कर समस्तीपुर (सु.) बनाया गया तो इससे रोसड़ा संसदीय क्षेत्र के सिंघिया विधानसभा को समाप्त कर कुशेश्वरस्थान (सु.) क्षेत्र बनाया गया. इसी प्रकार रोसड़ा विधानसभा सामान्य क्षेत्र को सुरक्षित क्षेत्र में बदल दिया गया और ज़िले के हसनपुर विधानसभा क्षेत्र को निकट के दूसरे ज़िले खगड़िया के संसदीय सीट से जोड़ दिया गया है. इस बात को लेकर हसनपुर विधानसभा क्षेत्र का समीकरण ही बदल गया है और यहां के लोग पिछले संसदीय चुनाव में समस्तीपुर ज़िले की राजनीति से कटे रहे, जिसका असर चुनाव परिणाम पर भी पड़ा और लोजपा के पूर्व सांसद रामचंद्र पासवान रोसड़ा (सु.) सीट के बदले नवगठित समस्तीपुर (सु.) सीट से चुनाव लड़े और जदयू प्रत्याशी महेश्वर हज़ारी से एक लाख से अधिक मतों से मात खा गए. इस चुनाव में बिहार विधानसभा में कांग्रेस विधानमंडल के नेता डॉ. अशोक कुमार को भी करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी.

बता दें कि हसनपुर विधानसभा में मतदाताओं की कुल संख्या 2,18,042 है, जिसमें 1,01,630 महिला एवं 1,16,412 पुरुष हैं. वोटरों में यादव जाति की संख्या सर्वाधिक है और वह हर बार 75 प्रतिशत के करीब मतदान करते हैं. दूसरे स्थान पर मल्लाह जाति के मतदाता हैं और वह 85 प्रतिशत से ऊपर मतदान करते हैं. तीसरे स्थान पर कोयरी, चौथे पर मुस्लिम, पांचवें पर राजपूत एवं छठे स्थान पर कुर्मी मतदाता हैं.

हसनपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत हसनपुर के 20, बिथान के 13 और सिंघिया प्रखंड के 4 पंचायत शामिल हैं. बता दें कि हसनपुर विधानसभा में मतदाताओं की कुल संख्या 2,18,042 है, जिसमें 1,01,630 महिला एवं 1,16,412 पुरुष हैं. वोटरों में यादव जाति की संख्या सर्वाधिक है और वह हर बार 75 प्रतिशत के करीब मतदान करते हैं. दूसरे स्थान पर मल्लाह जाति के मतदाता हैं और  वह 85 प्रतिशत से ऊपर मतदान करते हैं. तीसरे स्थान पर कोयरी, चौथे पर मुस्लिम, पांचवें पर राजपूत एवं छठे स्थान पर कुर्मी मतदाता हैं. इन सभी जातियों के मतदाता 50 से 60 प्रतिशत मतदान करते हैं. इस क्षेत्र में भूमिहार, ब्राह्मण के अलावा  पासवान एवं वैश्य भी का़फी संख्या में हैं. पिछली बार राजद विधायक सुनील कुमार पुष्पम ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी  लोजपा के रामनारायण मंडल को 1,727 मत से पराजित किया था. इस बार नए परिसीमन के अंतर्गत होने वाले चुनाव को लेकर दोनों पूर्व प्रत्याशी आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं और इसके लिए वे कोई भी राजनीतिक समीकरण में अपने को शामिल कर सकते हैं. जैसे-जैसे आगामी विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहा है, हसनपुर विधानसभा क्षेत्र के बाहुबलियों की बांहे फुल रही हैं और वे किसी न किसी खेमे में शामिल होने को बेताब हैं. अभी से ही क्षेत्र के सभी मतदान केंद्रों पर सत्ता एवं विपक्ष के समर्थक बूथ कमिटी बनाने की रणनीति में जुट गए हैं. वहीं ज़िला नेतृत्व एवं प्रदेश नेतृत्व भी इस क्षेत्र की मॉनिटरिंग कर रहा है.

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आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र सीमावर्ती खगड़िया ज़िले के जदयू सांसद  दिनेशचंद्र यादव अक्सर हसनपुर विधानसभसा क्षेत्र आते-जाते हैं, जिससे जदयू के संभावित दावेदारों में भी सरगर्मी बनी हुई रहती है. अभी कुछ दिन पहले ही हसनपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत बिथान प्रखंड प्रमुख विभा देवी को ज़िला जदयू महिला प्रकोष्ठ का अध्यक्ष पद पर बिठा देने से प्रखंड प्रमुख के हसनपुर से चुनाव लड़ने की चर्चा गरम हो गई है. इसी प्रकार ज़िला परिषद क्षेत्र सं 50 से ज़िला पार्षद आशा देवी भी अपने पति जदयू नेता अर्जुन यादव के समर्थन में का़फी सक्रिय हैं. लोकसभा चुनाव के दौरान ज़िला पार्षद आशा देवी के पति  खगड़िया संसदीय सीट से जदयू प्रत्याशी दिनेशचंद्र यादव के सारथी बने थे. वह समर्थकों की टोली के साथ गांव-गांव जाकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं राजग गठबंधन सरकार की उपलब्धियों को आमजनों तक पहुंचाया था, जिसका नतीज़ा रहा कि यादव बाहुल्य इस क्षेत्र में जदयू को तकरीबन 48,000 वोट मिले, जबकि लोकसभा चुनाव से पूर्व हुए 2005 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को मात्र 11 हज़ार वोट मिले थे. लोकसभा चुनाव में जदयू को हसनपुर विधानसभा में मिले अपार जनसमर्थन से उत्साहित अर्जुन यादव तभी से क्षेत्र की राजनीति में तत्परता से डटे हैं और विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए कमर कसे हुए हैं.

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ज़िला जदयू अध्यक्ष एवं रोसड़ा के पूर्व विधायक अशोक कुमार मुन्ना ने जबसे हसनपुर पंचायत के मुखिया जितेंद्र सिंह को ज़िला जदयू का उपाध्यक्ष बनाया है, टिकट हेतु इनकी भी दावेदारी क्षेत्र में हो रही है. पिछले विधानसभा चुनाव में दूसरे स्थान पर रहकर मौजूदा विधायक सुनील कुमार पुष्पम को कड़ी चुनौती देने वाले लोजपा प्रत्याशी रामनारायण मंडल के समर्थक असमंजस की स्थिति में आ गए हैं, क्योंकि लोजपा-राजद गठबंधन के वामपंथी पार्टियों से भी तालमेल के आसार हैं. ऐसी स्थिति में लोजपा के पूर्व प्रत्याशी रामनारायण मंडल ने 27 अप्रैल को पटना में जदयू प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी की मौजूदगी में जदयू की सदस्यता ग्रहण की. उनके समर्थक दावा करते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वयं उन्हें जदयू में आमंत्रित किया है, इसीलिए टिकट मिलने की शत प्रतिशत गांरटी है. एक तो जदयू में टिकट की दावेदारी को लेकर पूर्व से ही रस्साकस्सी जारी है. ऐसे में यदि रामनारायण मंडल के लोजपा से जदयू में आ जाने से जदयू कार्यकर्ताओं में खलबली मची है, तो विधानसभा के टिकट हेतु पार्टी में मची खींचतान की स्थिति में पार्टी आलाकमान को यहां का़फी माथापच्ची करनी होगी. 2005 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री गजेंद्र प्रसाद हिमांशु जदयू के टिकट पर चुनाव लड़े थे, लेकिन मात खा गए. गजेंद्र प्रसाद हिमांशु क्षेत्र के दिग्गज नेताओं में एक हैं, जिन्होंने हसनपुर विधानसभा क्षेत्र का 8 बार प्रतिनिधित्व भी किया है.

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ज़िले के सीमावर्त्ती खगड़िया, बेगूसराय एवं दरभंगा के बीच में स्थित है हसनपुर विधानसभा क्षेत्र. दोनों ज़िला पूर्व विदेश राज्य मंत्री दिग्विजय सिंह एवं पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के आगमन को लेकर ़खासे चर्चे में हैं, क्योंकि पूर्व विधायक एवं मंत्री गजेंद्र प्रसाद हिमांशु उनके का़फी क़रीबी लोगों में से माने जाते हैं और आने वाले विधानसभा चुनाव में वह दमखम से लड़ने की तैयारी भी कर रहे हैं. एकला चलो रे की नीति पर चलने वाली पार्टी कांग्रेस के युवा प्रखंड अध्यक्ष संजय कुमार मिश्रा का कहना है कि हसनपुर कांग्रेस की पुरानी सीट रही है और कांगे्रस के दमदार प्रत्याशी तमाम दलों को चुनौती देने में पूर्ण रूप से सक्षम हैं. संजय कुमार मिश्रा ने कांगे्रस प्रत्याशी के रूप में जनसंपर्क अभियान भी प्रारंभ कर दिया है. अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस पीसी स्कूल रामपुर के निदेशक व पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन कंप्यूटर इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट के डिग्रीधारी संजय मिश्रा कांगे्रस के युवराज राहुल गांधी एवं सोनिया गांधी का संदेश गांव-गांव घूमकर मतदाताओं तक पहुंचा रहे हैं. टिकट वितरण में स्वच्छ छवि के युवा कार्यकर्ताओं को तरजीह दिए जाने की राहुल गांधी की रणनीति पर यदि अमल होता है तो कांग्रेस की ओर से संजय कुमार मिश्रा की उम्मीदवारी पक्की मानी जा रही है. इन दिनों ज़िले की महिला राजनीति को प्रभावित करने वाली ज़िला परिषद की उपाध्यक्ष सुनीता सिंह एवं उनके बाहुबली पति कुंदन सिंह की भी चर्चा संभावित टिकटार्थियों में होती है. लोजपा से जुड़ी सुनीता सिंह का हौसला बुलंद है और वह राजनीति में कुछ भी होने से इंकार नहीं करती.

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