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कल्पना चावला ने भारत में बेटियों के ख़्वाब को दी नई उड़ान
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कल्पना चावला ने भारत में बेटियों के ख़्वाब को दी नई उड़ान

मुंबई: बेशक कल्पना चावला आज हमारे बीच नहीं हैं (देश और दुनियाभर में आज उनकी 16 वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है) आज ही के दिन 2003 में वो मनहूस खबर आई थी, जिसमे ये पता चला था कि वैश्विक स्तर पर भारत का नाम रोशन करने वाली कल्पना चावला का अंतरिक्ष शटल दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उसमे सवार सभी 7 लोगों की मौत हो गई. कल्पना का जन्म हरियाणा के करनाल में १ जुलाई 1961 में हुआ था, वो पंजाब के इंजीनियरिंग कॉलेज में एयरोनॉटिकल की पढ़ाई करने वाली भारत की पहली महिला थी. कल्‍पना के कदम यहीं नहीं थमे. कल्‍पना आगे की पढ़ाई करने अमेरिका चली गईं और 1984 में टेक्सस यूनिवर्सिटी से आगे की पढ़ाई की.कल्पना को मार्च 1995 में नासा के अंतरिक्ष यात्री कोर टीम में शामिल किया गया और उन्हें 1997 में अपनी पहली अंतरिक्ष उड़ान के लिए चुना गया.

कल्पना चावला ना सिर्फ भारत की बच्चियों के लिए आदर्श है, बल्कि देश और दुनिया के लोग भी कल्पना चावला के काम से प्रभावित हुए थे. कल्‍पना चावला के सक्‍सेस मंत्र आज भी युवाओं के अंदर जोश भर देते हैं और उन्‍हें कुछ अलग करने की प्रेरणा देते हैं. कल्‍पना चावला ने कहा था कि ‘सपनों से सफलता तक का रास्‍ता तो तय होता है मगर क्‍या आपमें इसे ढूंढने की इच्‍छा है? उसे पाने के लिए उस मार्ग पर चलने का साहस है? क्‍या आप अपने सपनों को हासिल करने के लिए पूर्ण रूप से दृढ़ हैं?’ कल्‍पना ने कहा था, ‘कुछ ऐसा करो जिसे आप सच में करना पसंद करते हो. अगर आप बस इसे अपना लक्ष्‍य समझकर कर रहे हो और उसे करने की प्रक्रिया का आनंद नहीं ले रहे हो तब आप खुद के साथ विश्‍वासघात कर रहे हो’.

कल्‍पना चावला हमेशा युवाओं से सपने को साकार करने की बात पर जोर देती रहीं, उन्‍होंने कहा, ‘अगर आपके पास कोई सपना है तो उसको साकार करने का प्रयास करो. इस बात से जारा सा भी फर्क नहीं पड़ता कि आप एक औरत हैं. भारत से हैं या फिर कहीं और से. आप जब तारों और आकाशगंगाओं को देखते हैं तो ऐसा लगता है कि आपका अस्‍तित्‍व किसी विशेष भूमि के कारण नहीं बल्‍की सौर मंडल के कारण है’. इस तरह से भले ही कल्पना चवला आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनका नाम आज बेटियों के लिए प्रेरणा बन गया है.

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