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कसौटी पर वामपंथियों की ताक़त
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कसौटी पर वामपंथियों की ताक़त

समस्तीपुर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विश्वास यात्रा पर आने के बाद से ज़िले की राजनीति में  आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज़ हो गई है. मुख्यमंत्री की विश्वास यात्रा का सबसे ज़्यादा असर ज़िले के लेनिनग्राद कहे जाने वाले विभूतिपुर विधानसभा में पड़ा है. यहीं से मौजूदा सीपीएम के विधायक रामदेव वर्मा छह बार विधानसभा चुनाव जीते हैं. आगामी विधानसभा चुनाव नए परिसीमन के तहत होना है और पिछले 1980, 1990, 1995, 2000, 2005 एवं पुन: 2005 के विधानसभा चुनाव में विजय हासिल करने वाले विधायक रामदेव वर्मा अभी से ही चुनावी बाधाओं को दूर करने में जुटे दिखते हैं. नए परिसीमन के अंतर्गत विभूतिपुर विधानसभा क्षेत्र का स्वरूप बदल गया है, जिसमें उजियारपुर संसदीय क्षेत्र की जदयू सांसद अश्वमेध देवी की प्रभावकारी भूमिका विशेष रूप से चर्चा में है. नए परिसीमन के तहत उजियारपुर ज़िले में नए संसदीय क्षेत्र का गठन हुआ है, जिसमें नए उजियारपुर के साथ ही विभूतिपुर विधानसभा का नए सिरे से गठन किया गया है. नए परिसीमन में पूर्व दलसिंह सराय विधानसभा को समाप्त कर दलसिंहसराय प्रखंड के बुलाकीपुर, कमरांव, मालपुर पुरवारी पट्‌टी, रामपुर जलालपुर, बंबैया हरलाल और अजनौल ग्राम पंचायत को विभूतिपुर विधानसभा क्षेत्र में शामिल किया गया है. इसके अलावा विभूतिपुर प्रखंड के सभी 29 पंचायतों भरपुरा पटपारा, बाजितपुर बंबैया, मेहिशी, केराय, चकहबीब, मुस्तफापुर, कल्याणपुर उत्तर, मुहम्मदपुर सकड़ा, टभका, खास टभका उत्तर, खास टभका दक्षिण, चोरा टभका, सुरौली, गंगौली मंदा, साखमोहन, देसरी कर्रख, पतैलिया, भुसवर, विभूतिपुर उत्तर, विभूतिपुर दक्षिण, नरहन, बोरिया, महथी दक्षिण, महथी उत्तर, सिंघिया बुजुर्ग दक्षिण, सिंघिया बुजुर्ग उत्तर,  बेलसंडी तारा, आलमपुर कोदरिया, कल्याणपुर दक्षिण को मिलाकर विभूतिपुर विधानसभा का गठन किया गया है.

ज़िले के विभूतिपुर विधानसभा क्षेत्र शुरू से ही वामपंथियों के गढ़ के रूप में जाना जाता है जहां से कभी राज्य के प्रसिद्ध शिक्षाविद् प्रो. परमानंद सिंह मदन विधायक हुआ करते थे. लेकिन बाद में वामपंथी एकता के नाम पर विभूतिपुर विधानसभा क्षेत्र सीपीएम की झोली में चली गई और पिछले तीन दशक से सीपीएम नेता रामदेव वर्मा वामपंथी उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ते रहे और उन्हें छह बार जीतने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है.

नए परिसीमन के तहत होने वाले चुनाव में मौजूदा सीपीएम विधायक रामदेव वर्मा के मुख्य प्रतिद्वंद्वी रहे लोजपा के रामबालक सिंह कुशवाहा इस बार लोजपा को अलविदा कह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बहती विकास धारा में शामिल हो गए हैं और विभूतिपुर क्षेत्र से इनकी चर्चा सत्ताधारी राजग गठबंधन के प्रबल टिकटार्थियों में हो रही है. पिछले सभी चुनावी जंग को फतह करने वाले मौजूदा विधायक रामदेव वर्मा बिहार की राजनीति में सीपीएम के इकलौते विधायक हैं. उनके समर्थन में पार्टी के कई राष्ट्रीय नेताओं एवं प्रकोष्ठों के नेताओं का विभूतिपुर विधानसभा क्षेत्र में दौरा और आमसभा आयोजित होती रहती है. क्योंकि वामपंथी मोर्चा ने ज़िले के विभूतिपूर क्षेत्र को आगामी विधानसभा चुनाव में प्रतिष्ठा की सीट मान रखी है. वामपंथी राजनीति में विभूतिपुर विधानसभा का महत्व न केवल पटना बल्कि कोलकाता और दिल्ली की राजनीति में विशेष रूप से रहता है.

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इस बार मौजूदा विधायक के साथ-साथ पुराने प्रतिद्वंद्वी पूर्व कांग्रेसी विधायक चंद्रबली ठाकुर भी पूरे दमखम से चुनौती देने हेतु कमर कस ली है और वह पूरे क्षेत्र में घूम-घूमकर राहुल गांधी का पाठ लोगों को पढ़ा रहे हैं. 1985 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी ठाकुर ने सीपीएम नेता रामदेव वर्मा को शिकस्त दी थी. इसके बाद पूर्व विधायक चंद्रबली ठाकुर वर्ष 2005 में दल बदलकर भाजपा के टिकट पर विभूतिपुर विधानसभा से किस्मत आजमाया लेकिन ज़िले में वामपंथियों का गढ़ कहे जानेवाले विभूतिपुर में वे फिर से मात खा गए. इस बार पूर्व विधायक श्री ठाकुर कांग्रेस की अकेले चलने की नीति से प्रभावित होकर फिर से पुराने घर कांग्रेस में लौट आए हैं. इन्हें चुनाव लड़ने हेतु बिहार कांग्रेस के प्रभारी जगदीश टाईटलर से लेकर बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अनिल शर्मा की हरी झंडी मिल चुकी है.

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ज़िले के विभूतिपुर विधानसभा क्षेत्र शुरू से ही वामपंथियों के गढ़ के रूप में जाना जाता है जहां से कभी राज्य के प्रसिद्ध शिक्षाविद् प्रो. परमानंद सिंह मदन विधायक हुआ करते थे. लेकिन बाद में वामपंथी एकता के नाम पर विभूतिपुर विधानसभा क्षेत्र सीपीएम की झोली में चली गई और पिछले तीन दशक से सीपीएम नेता रामदेव वर्मा वामपंथी उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ते रहे और उन्हें छह बार जीतने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है. जब कभी ज़िले में वामपंथी मोर्चा उम्मीदवार संसदीय चुनाव लड़े हैं तो सीपीएम विधायक रामदेव वर्मा को ही वामपंथी मोर्चा ने मैदान में उतारा है. पिछले संसदीय चुनाव में भी नवगठित उजियारपुर संसदीय क्षेत्र से वाममोर्चा की ओर से रामदेव वर्मा ने किस्मत को आजमाया था लेकिन जदयू सांसद अश्वमेघ देवी ने नवगठित सीट जीतकर ज़िले की प्रथम महिला सांसद होने का गौरव प्राप्त किया. जदयू सांसद ने सीपीएम विधायक रामदेव वर्मा, कांग्रेस प्रत्याशी प्रो.शील कुमार राय सहित राजद के निकटतम प्रतिद्वंद्वी पूर्व सांसद एवं युवा राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार मेहता को पराजित कर ज़िले की राजनीति में महिला सशक्तिकरण अभियान में तेजी ला दी.

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पिछले चुनाव में मौजूदा विधायक रामदेव वर्मा के निकटतम प्रतिद्वंद्वी रहे जदयू नेता रामबालक सिंह कुशवाहा के इर्द-गिर्द विभूतिपुर की राजनीति घूम रही है. रामबालक सिंह ने लगातार दो चुनावों से सीपीएम विधायक रामदेव वर्मा को कड़ी चुनौती दिया है पर मामूली वोटों के अंतर से चूक जाते हैं. राजद-लोजपा का वामदलों से हो रही निकटता को देखते हुए रामबालक सिंह पिछले 27 अप्रैल को पटना में जदयू के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी एवं विधि सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री रामनाथ ठाकुर की उपस्थिति में जदयू की सदस्यता ग्रहण की. इनके जदयू में आने से विभूतिपुर की राजनीति में भारी उलटफेर होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. जदयू प्रत्याशी बनकर रामबालक सिंह वामपंथियों के मजबूत किले को ध्वस्त करने की कवायद में जुट गए हैं.

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