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कुछ और इनामी डकैतों से छुटकारा मिला
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कुछ और इनामी डकैतों से छुटकारा मिला

तराई क्षेत्र में आतंक का पर्याय रहे ददुआ और ठोकिया गिरोह की तरह ही छोटे-छोटे गिरोह द्वारा प्रदेश में आतंक फैलाने की होड़ मची हुई है. लेकिन पिछले कुछ समय से पुलिस कई ऑपरेशन के जरिए का़फी हद तक इनका खात्मा करने में कामयाब रही है. इसी क़डी में सतना पुलिस ने कई घंटे चली मुठभेड़ के बाद चार इनामी डकैतों को ढेर करने में सफलता हासिल की है. सतना पुलिस की सक्रियता ने एक डकैत गिरोह को प्रभावशील होने सेपहले ही ख़त्म कर दिया. विंध्य क्षेत्र में डकैतों का आतंक बार-बार सर उठा रहा है जिसका मुख्य कारण इस क्षेत्र की सीमाओं का उत्तर प्रदेश से संलग्न होना है. सतना ज़िले के बरोघा थाना पुलिस को तड़के ख़बर मिली कि चार इनामी डकैत उसके क्षेत्र में देखे गए हैं. सूचना में पुलिस को बताया गया था कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरहद पर आतंक फैलाने वाले नवागत राजा़खान गिरोह के डकैत क्षेत्र में घूम रहे हैं. इस सूचना पर पुलिस तुरंत हरकत में आई और उसने कार्रवाई शुरू की. डकैतों से पुलिस की मुठभेड़ महतैन क्षेत्र में एक जंगल में नाले के किनारे हुई. कई घंटों की मुठभेड़ के बाद पुलिस ने चारों डकैतों को ढेर कर दिया. लेकिन जब डकैतों की शिनाख्त की गई तो पुलिस को पता चला कि मरने वाले डकैत, सुरेश गौड़ और उसके साथी थे. पुलिस को इन सभी के पास से बंदूक़ें और अन्य असलहा भी हाथ लगे.

इसके पहले कि सुरेश गौड़ क्षेत्र में आतंक का पर्याय बन पाता, सतना पुलिस की टीम ने उसकी जीवन लीला समाप्त कर दी. पुलिस की इस टीम में थाना प्रभारी बरोधा, उदयभानसिंह थाना प्रभारी मंझगवां फुलसिंह गुर्जर, एएसआई रामबाबू यादव, एसडीओपी चित्रकूट बीपीएस तोमर एवं विजय सिंह सहित कई जवान शामिल थे.

कई बड़े गिरोह के सरदारों से गुण सीखने वाला सुरेश गौड़ उ़र्फ बिज्जू मामा डकैत बनने के बाद राजा़खान गैंग के साथ काम करता था. आपसी मतभेद के चलते सुरेश ने इस गिरोह से निकलकर अपना खुद का गिरोह बना लिया था. सुरेश के साथ मारे गए मनोज यादव, रामदयाल और ओमप्रकाश यादव पर भी पुलिस द्वारा इनाम घोषित था. पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुख़बिर लगातार तीन दिनों से इन डकैतों के बारे में सूचना दे रहा था. धारकुण्डी थाने के कजरा गांव का रहने वाला सुरेश गौड़ ठोकिया गैंग में भी शामिल रहा है. अपना अलग गिरोह बनाने के बाद वह इस क्षेत्र में अपनी सल्तनत क़ायम करना चाहता था. मिली जानकारी के अनुसार राजा़खान ने जब सती अनसुईया आश्रम में साधु संतों को गाली दी और फिर फायरिंग भी की तो इससे नाराज़ होकर सुरेश गौड़ ने अपना अलग गिरोह बना लिया.

इसके पहले कि सुरेश गौड़ क्षेत्र में आतंक का पर्याय बन पाता, सतना पुलिस की टीम ने उसकी जीवन लीला समाप्त कर दी. पुलिस की इस टीम में थाना प्रभारी बरोधा, उदयभानसिंह थाना प्रभारी मंझगवां फुलसिंह गुर्जर, एएसआई रामबाबू यादव, एसडीओपी चित्रकूट बीपीएस तोमर एवं विजय सिंह सहित कई जवान शामिल थे. सतना पुलिस के अधीक्षक ने इस सफलता के लिए पुलिस जवानों को शाबाशी दी है. साथ ही इन कर्मचारियों को राष्ट्रपति पदक देने के लिए अनुशंसा भी की है. पुलिस के अनुसार वर्तमान में विंध्यक्षेत्र में कुछ छोटे गिरोह अब भी सक्रिय हैं, जिनकी सघनता के साथ तलाश की जा रही है.

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