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महुआ संग्रहण : आत्मनिर्भरता की ओर एक क़दम
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महुआ संग्रहण : आत्मनिर्भरता की ओर एक क़दम

आदिवासी क्षेत्रों में रोज़गार पाना एक गंभीर समस्या है. आधारभूत संरचनाओं के अभाव और औद्योगिक विकास के मामले में पिछ़डे आदिवासी इलाक़ों में प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और परिवर्द्धन कर रोजगार की संभावनाएं पैदा की जा सकती हैं. इसे देखते हुए मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल इलाक़ों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध महुआ फूलों को संरक्षित कर रोज़गार के अवसर पैदा करने की कोशिश की जा रही है. विभिन्न औषधीय उपयोगों के लिए महुआ के फूलों को संग्रहित कर सुखाया जाता है, ताकि इसे विक्रय के लिए उपलब्ध कराया जा सके. इसी का नतीज़ा है कि केवल एक ज़िले में महुआ के फूलों से 17 लाख रुपये से अधिक आर्थिक लाभ अर्जित कर इस क्षेत्र के कई ग्रामीण अपनी जीविका चला रहे हैं.

नेट के ज़रिए महुआ फूल संग्रहण की योजना इस क्षेत्र में प्रभावशाली रही है. इस प्रक्रिया में महुआ के पेड़ के नीचे मच्छरदानी की नेट का उपयोग कर फूलों को ज़मीन में गिरने से पहले धूल रहित संग्रहित कर लिया जाता है. फूलों में कचरा न होने के कारण बाज़ार में उसकी अच्छी क़ीमत मिलती है. वर्ष 2009 में 1584 क्विंटल महुए से संग्रहकों को 17.42 लाख रुपए का भुगतान किया गया. इस संग्रहण से 13.35 लाख रुपये की शुद्ध आय लघु वनोपज संघ को हुई है.

सिंगरौली ज़िले में महुआ वृक्ष बड़ी संख्या में उपलब्ध है. वनमंडल, सिंगरौली के मुताबिक़, इस क्षेत्र में 13 लाख महुआ के वृक्ष हैं, जो वनक्षेत्र में उपलब्ध विभिन्न प्रकार की प्रजातियों की वृक्षों का लगभग 4.16 प्रतिशत है. इतना ही नहीं, राजस्व क्षेत्र में भी महुआ के वृक्ष पर्याप्त संख्या में हैं. इस ज़िले में प्रतिवर्ष 1.30 लाख टन महुआ का उत्पादन होता है, जो इस क्षेत्र की ग़रीब जनता के लिए आय का प्रमुख ज़रिया है.

राज्य शासन के वन विभाग के सौजन्य से आदिवासी क्षेत्र सिंगरौली में महुआ फूलों के संग्रहण से लेकर सुखाने तक की व्यवस्था के साथ उसकी बिक्री-दर में सुधार की आवश्यकता का परीक्षण कर एक योजना तैयार की गई थी. इसके अंतर्गत, पिछले दो वर्षों में इसके उत्साहजनक परिणाम भी सामने आए हैं. परिणामों से प्रभावित वन विभाग ने इस वर्ष के लिए एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है. वनमंडल सिंगरौली में स्वयंसहायता समूहों के माध्यम से 2008 में महुआ फूल संग्रहण कार्य प्रारंभ हुआ. इसके अंतर्गत 1157.42 क्विंटल महुआ फूलों का संग्रहण 7 क्षेत्रों के 36 समूहों के माध्यम से कराया गया. वर्ष 2009 में 132 समूहों के ज़रिए 1585 क्विंटल महुआ फूल का संग्रहण किया गया. इसमें से 2.65 क्विंटल नेट के माध्यम से किया गया.

नेट के ज़रिए महुआ फूल संग्रहण की योजना इस क्षेत्र में प्रभावशाली रही है. इस प्रक्रिया में महुआ के पेड़ के नीचे मच्छरदानी की नेट का उपयोग कर फूलों को ज़मीन में गिरने से पहले धूल रहित संग्रहित कर लिया जाता है. फूलों में कचरा न होने के कारण बाज़ार में उसकी अच्छी क़ीमत मिलती है. वर्ष 2009 में 1584 क्विंटल महुए से संग्रहकों को 17.42 लाख रुपए का भुगतान किया गया. इस संग्रहण से 13.35 लाख रुपये की शुद्ध आय लघु वनोपज संघ को हुई है.

इस वर्ष महुआ संग्रहण के लिए 132 समूहों के अलावा 332 नए समूहों का गठन कराया गया है. पूर्व में गठित समूहों को प्रशिक्षित कर संग्रहण एवं प्रसंस्करण में पारंगत किया गया है. नए समूहों को आधुनिक एवं उन्नत तरीक़े से संग्रहण, सुखाई, भंडारण और भराई कार्यों आदि के लिए प्रशिक्षित किया गया है. अब सिंगरौली ज़िले में महुआ संग्रहण के कार्य को कुल 462 स्वयं सहायता समूह पूरा कर रहे हैं.

सिंगरौली ज़िले में महुआ संग्रहण एक व्यापार की तरह तेज़ी से प्रगति कर रहा है. दूर-दराज के आदिवासी क्षेत्रों में ग्रामीण स्वयं इस योजना के साथ जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं. उल्लेखनीय है कि सिंगरौली ज़िले में राज्य का सबसे अधिक महुआ उत्पादन होता है. इस क्षेत्र में औद्योगिक प्रतिष्ठानों के पैर फैलाने के कारण दूर-दराज के आदिवासियों को अपने परंपरागत व्यवसायों को सुनियोजित करने में लघु वनोपज संघ मदद कर रहा है.

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