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नक्‍सलियों का रेड हंट अभियान

नक्‍सलियों का रेड हंट अभियान

देश के अन्य राज्यों में नक्सली संगठनों के खिला़फ केंद्र सरकार भले ही ऑपरेशन ग्रीन हंट चला रही हो, लेकिन मजे की बात यह है कि बिहार के रोहतास ज़िले में पुलिस के ख़िला़फ नक्सलियों का रेड हंट अभियान अपने चरमोत्कर्ष पर है. नक्सलियों ने पहले तिलौथू प्रखंड परिसर में निर्माणाधीन थाना भवन एवं नरेगा कार्यालय को बम से उड़ा दिया. उसके बाद सैकड़ों चक्र गोलियां चलाते हुए पुलिस के खिला़फ नारेबाजी शुरू कर दी. यही नहीं अपने बुलंद हौसलों के साथ डेहरी-यदुनाथपुर पथ पर तेलकप के समीप एक दर्ज़न वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया. हैरानी की बात तो यह कि जिस समय नक्सली इन दोनों जगहों पर हिंसक तांडव मचा रहे थे, उस वक्त बंजारी एवं डेहरी बीएमपी कैंप में सैकड़ों जवान आराम की नींद सो रहे थे.

जिस पुलिस को देखकर हम चैन की नींद सोते हैं. अगर वही अपनी सुरक्षा खुद न कर सके तो देश की जनता क्या होगा? कुछ ऐसा ही हो रहा रोहतास में. जहां पुलिस नक्सलियों के आगे बेबस नज़र आ रही है. एक तऱफ नक्सलियों के खात्मे के लिए ऑपरेशन ग्रीन हंट चल रहा तो वहीं दूसरी तरफ नक्सली पुलिस के खिला़फ ऑपरेशन रेड हंट चला रहे हैं.

नक्सलियों के बुलंद हौसले का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद पुलिस ने जो कुछ भी किया वह केवल खानापूर्ति सा दिखा. पुलिस के इस ढुलमुल रवैये की वज़ह से नक्सलियों का मन और बढ़ गया. नतीजतन नक्सली दस्ते ने इस घटना के दूसरे ही दिन धनसा घाटी में एक और विद्यालय को बम से उड़ा दिया. बता दें कि यह वही भवन था, जहां पूर्व में बीएसएफ के जवानों ने कैंप कर नक्सलियों के साथ दो-दो हाथ किए थे. उस समय भी नक्सलियों ने मुठभेड़ के दौरान इस विद्यालय भवन का एक कमरा बारूदी सुरंग लगाकर उड़ा दिया था. नक्सलियों का तांडव यही ख़त्म नहीं हुआ. उन्होंने पुलिस के ग्रीन हंट के जवाब में रोहतास में रेड हंट चलाते हुए मध्य विद्यालय को उड़ा डाला. नक्सली कमांडर राजेश कुमार उ़र्फ तू़फान ने ज़िले के राजपुर बाज़ार में कुछ दबंगों के ख़िला़फ फतवा जारी कर लोगों के होश उड़ा दिए हैं. इधर पनारी घाट में एक किसान को नक्सलियों ने गोली मारकर हत्या कर दी. इस घटना के ठीक दूसरे ही दिन चेनारी थाना क्षेत्र के केनार खुर्द गांव में क़रीब 200 भाकपा माओवादियों ने एक घर को डाइनामाइट लगाकर उड़ा दिया और उसके बाद गांव के ही एक व्यक्ति राम बदन सिंह एवं उसके पुत्र विशंभर को गोलियों से छलनी कर दी. 15 दिनों के अंदर घटी इन घटनाओं के पीछे पुलिस की मुस्तैदी की बात की जाए तो पाएंगे कि पुलिस के द्वारा नक्सलियों के ख़िला़फ छापेमारी अभियान चलाई तो गई, लेकिन छापेमारी के दौरान ऐसा कुछ भी नहीं मिला. ऐसे में आम लोगों के ज़ुबान पर एक ही सवाल है कि जो पुलिस अपनी सुरक्षा स्वयं नहीं कर सकती, उस पुलिस तंत्र से सुरक्षा की कैसी उम्मीद. शायद यही कारण है कि कैमूर पहाड़ी पर रहने वाले दर्ज़नों लोगों ने पुलिस के ख़िला़फ विरोध जताते हुए भाकपा माओवादी दस्तों के सामने घुटने टेक देने का फैसला किया है, ताकि जानमाल की कोई क्षति न हो. बहरहाल, ज़िले में बढ़ती नक्सली गतिविधियों को देखकर यह कहना ग़लत नहीं होगा कि यहां जहानाबाद जेल ब्रेक, दांतेवाड़ा जैसी कोई घटना कभी भी घट सकती है. फिलहाल, देश के अन्य राज्यों में पुलिस द्वारा नक्सलियों के ख़िला़फ चलाए जा रहे ग्रीन हंट के समानांतर नक्सलियों ने पुलिस के ख़िला़फ अपना रेड हंट अभियान को गति दे रखा है.

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