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नालंदाः जातीय समीकरण हावी रहेगा
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नालंदाः जातीय समीकरण हावी रहेगा

भगवान महावीर और बुद्ध की नगरी नालंदा में मतदाताओं को रिझाने में प्रत्याशियों के पसीने छूट रहे हैं. ज़िले में नए परिसीमन के बाद आठ विधानसभा क्षेत्रों में से चंडी विधानसभा क्षेत्र विलोपित होने से अब केवल सात विधानसभा क्षेत्र रह गए हैं. यह क्षेत्र नीतीश कुमार का गृह ज़िला है, इसलिए लोगों का इस पर विशेष ध्यान है. इस क्षेत्र से कुल 97 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. हिलसा विधानसभा क्षेत्र से वर्तमान विधायक राम चरित्र प्रसाद सिंह बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि जदयू ने उषा सिन्हा, लोजपा ने रीना यादव और कांग्रेस ने अरुण कुमार सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है. नए परिसीमन में कई नए क्षेत्र जुड़े हैं तो कई क्षेत्रों को हटा दिया गया है. राजद-लोजपा गठबंधन इस क्षेत्र में मज़बूत स्थिति में है. उसके आधार मतों के साथ यदि भूमिहार मत भी जोड़ दिए जाएं तो नीतीश के गढ़ में सेंधमारी की जा सकती है.

इस्लामपुर विधानसभा क्षेत्र अपनी भौगोलिक, राजनीतिक और आर्थिक गतिविधियों के लिए चर्चित रहा है. यह नक्सल प्रभावित क्षेत्र है. इसकी राजनीतिक पृष्ठभूमि पर यदि नज़र डाली जाए तो यहां 1977 से अब तक 9 बार विधानसभा चुनाव हुए. शुरुआती दौर में यहां भाकपा और कांग्रेस का वर्चस्व देखा गया, लेकिन वर्ष 2000 से यहां की राजनीतिक तस्वीर बदल गई.

इस्लामपुर विधानसभा क्षेत्र अपनी भौगोलिक, राजनीतिक और आर्थिक गतिविधियों के लिए चर्चित रहा है. यह नक्सल प्रभावित क्षेत्र है. इसकी राजनीतिक पृष्ठभूमि पर यदि नज़र डाली जाए तो यहां 1977 से अब तक 9 बार विधानसभा चुनाव हुए. शुरुआती दौर में यहां भाकपा और कांग्रेस का वर्चस्व देखा गया, लेकिन वर्ष 2000 से यहां की राजनीतिक तस्वीर बदल गई. इस क्षेत्र से वर्तमान जदयू विधायक प्रतिमा सिन्हा का टिकट भी आलाकामान ने काट दिया और उनकी जगह झारखंड बिजली बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष राजीव रंजन को प्रत्याशी बनाया गया है. राजीव रंजन को टिकट दिए जाने के बाद भीतर ही भीतर असंतोष का स्वर बुलंद हो रहा है. एक तो वर्तमान विधायक प्रतिमा सिन्हा को टिकट से वंचित किया गया, वहीं इस क्षेत्र से शैलेंद्र कुमार मुखिया, सत्येंद्र नारायण सिंह एवं चंद्रसेन जैसे लोगों को टिकट न देना जदयू को महंगा पड़ सकता है. पिछले लोकसभा चुनाव में राजीव रंजन ने जदयू प्रत्याशी कौशलेंद्र कुमार का खुलकर विरोध किया था. इस क्षेत्र से कांग्रेस ने विवेक यादव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने राकेश रोशन एवं राजद ने वीरेंद्र गोप को अपना प्रत्याशी बनाया है. ऐसी स्थिति में यहां मुक़ाबला दिलचस्प और बहुकोणीय होने की संभावना है.

हरनौत विधानसभा क्षेत्र से जदयू के वर्तमान विधायक इंजीनियर सुनील कुमार को भी इस बार टिकट से वंचित रखा गया. चंडी विधानसभा क्षेत्र समाप्त होने केबाद वहां के विधायक हरि नारायण सिंह खाली थे, इसलिए जदयू ने सुनील की जगह हरि नारायण सिंह को टिकट दे दिया. कांग्रेस ने चंडी प्रखंड की पूर्व प्रमुख वसुंधरा देवी और लोजपा ने अरुण सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है.

बिहारशरीफ विधान सभा क्षेत्र से डॉ. सुनील कुमार जदयू के प्रत्याशी हैं तो वहीं राजद लोजपा ने आफरीन सुल्ताना उतारा है. कांग्रेस से हैदर आलम प्रत्याशी बनाए गए हैं. इस क्षेत्र का वृहत आकार एवं मुस्लिम बहुल्य मतदाता होने से जदयू प्रत्याशी डा. सुनील कुमार को इस बार मुश्किल हो सकती है. आफरीन सुल्ताना के पति सैयद नौसादुनवी उर्फ पप्पू खां पूर्व में इस क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं. पप्पू खां एक हत्या के मामले में बिहारशरीफ मंडल कारा में बंद हैं. लेकिन पप्पू खां जेल से अपनी पत्नी को टिकट दिलवाने में सफल रहे. जदयू को पूर्व के चुनाव में सहयोग करने वाले प्रद्युम्न कुमार एवं जदयू के प्रदेश महासचिव अनिल कुमार अकेला निर्दलीय प्रत्याशी के रूप खड़े हो जाने से डॉ. सुनील कुमार को विधान सभा पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ेगी.

नालंदा विधानसभा क्षेत्र से जदयू ने श्रवण कुमार, राजद ने अरुण कुमार एवं कांग्रेस ने दिलीप कुमार को अपना प्रत्याशी बनाया है. अस्थावां विधानसभा क्षेत्र वर्तमान में जदयू के विधायक डॉ. जितेंद्र कुमार के कब्जे में है. इस क्षेत्र से राजद-लोजपा ने कपिल देव सिंह और कांग्रेस ने सतीश कुमार को उतारा है. पिछले लोकसभा चुनाव में सतीश कुमार नालंदा संसदीय क्षेत्र से लड़े थे, लेकिन जदयू के कौशलेंद्र कुमार से हार गए थे. इस क्षेत्र से कई निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जिनमें जदयू के कई बाग़ी भी शामिल हैं. इस क्षेत्र में मुक़ाबला जदयू, कांग्रेस और राजद-लोजपा के बीच है. राजगीर विधानसभा सुरक्षित क्षेत्र अभी भाजपा के कब्जे में है. यहां से कांग्रेस ने मानो देवी पासवान और लोजपा ने मृणाल कुमार को अपना प्रत्याशी बनाया है. लोजपा प्रमुख के दामाद मृणाल चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के दिन से ही विवादों के घेरे में हैं. स्थानीय लोजपा नेताओं का मानना है कि राजगीर क्षेत्र के ही लोगों को प्रत्याशी बनाना चाहिए था, परंतु रामविलास पासवान ने अपने दामाद को टिकट देकर जनता से छल किया है. अब देखना है कि इस क्षेत्र में मतदाता किसे अपना समर्थन देते हैं.

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