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कालापानी पर नेपाल PM की सख्त टिप्पणी- एक इंच जमीन पर भी कब्जा नहीं देंगे
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कालापानी पर नेपाल PM की सख्त टिप्पणी- एक इंच जमीन पर भी कब्जा नहीं देंगे

नेपाल में भारत के नए मानचित्र को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री केपी ओली ने रविवार को अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि नेपाल, भारत और तिब्बत के बीच ट्राइजंक्शन में स्थित कालापानी क्षेत्र नेपाल का हिस्सा है और भारत को वहां से अपनी सेना तुरंत हटा लेनी चाहिए.

भारत ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के नए केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद देश का नया नक्शा जारी किया था जिसके बाद नेपाल ने कालापानी क्षेत्र को उत्तराखंड में दिखाए जाने पर ऐतराज जताया था. नेपाल की आपत्ति के जवाब में भारत ने कहा था कि नक्शा पूरी तरह से भारत की संप्रभुता को दिखाता है और नेपाल के साथ सीमा में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है.

नेपाल की सत्तारूढ़ पार्टी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की यूथ विंग नेपाल युवा संगम की एक बैठक को संबोधित करते हुए ओली ने कहा, हम अपने भू-भाग के एक इंच पर भी किसी देश को कब्जा नहीं करने देंगे, भारत को इसे खाली करना होगा. ओली ने आगे कहा कि हमारे भू-भाग से भारतीय सेना के हटने के बाद ही हम किसी वार्ता में शामिल होंगे.

नेपाली पीएम ने कहा कि उनकी सरकार अपने देश की सीमाओं की सुरक्षा करने में पूरी तरह से सक्षम है. देश के सुरक्षा बल अपनी जमीन पर अपना अधिकार वापस पाने के लिए एकजुट हैं.

नेपाली पीएम ने यह बात भी स्वीकार की है कि भारत के नए नक्शे के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन प्रोपेगैंडा का हिस्सा है. ओली ने कहा, कालापानी इलाके को लेकर ऐसा प्रोपेगैंडा फैलाया जा रहा है जैसे वह आज ही की घटना हो जबकि यह दशकों पहले की बात है.

उन्होंने आगे कहा, यह राष्ट्रभक्त सरकार किसी को नेपाल की एक इंच जमीन पर भी कब्जा नहीं करने देगी. शांतिप्रिय देश नेपाल ना तो किसी देश की जमीन पर कब्जा करेगा और ना ही किसी को अपनी जमीन पर कब्जा करने देगा.

नेपाल के नक्शे को संशोधित करने की सलाह पर ओली ने कहा, असल में जमीन पर अपना अधिकार स्थापित करना ज्यादा महत्वपूर्ण है. हम केवल नक्शे को संशोधित नहीं करना चाहते हैं बल्कि हम अपनी जमीन वापस लेना चाहते हैं.

ओली ने कहा कि इतने सालों से कालापानी को लेकर खामोश रहे लोग कट्टर देशभक्ति के नाम पर अराजक गतिविधियां चला रहे हैं. उन्होंने बाद में कहा कि उनकी सरकार कालापानी मुद्दे को कूटनीति के जरिए ही सुलझाना चाहती है.

हिमालयन टाइम्स के मुताबिक, भारत के नए नक्शे को लेकर तीन दिन पहले ओली ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी जिसमें नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व विदेश मंत्री भी शामिल हुए. बैठक में भारत के सामने इस मुद्दे को उठाए जाने की मांग की गई.

6 नवंबर को नेपाल के विदेश मंत्री ने एक बयान जारी कर कहा था कि उनकी सरकार को पूरी तरह स्पष्ट है कि कालापानी क्षेत्र नेपाल का अभिन्न हिस्सा है.

इसके एक दिन बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा था, हमारा मानचित्र भारत के संप्रभु क्षेत्र को दिखाता है. नए नक्शे में नेपाल के साथ सीमा में किसी भी तरह का संशोधन नहीं किया गया है और नेपाल के साथ सीमा निर्धारण मौजूदा प्रक्रिया के तहत ही किया गया है.

भारत ने अपने बयान में नेपाल को दोनों देशों के बीच मतभेद पैदा कराने की कोशिशों के खिलाफ आगाह भी किया था.

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