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एनएसजी की दादागीरी पर भारत की चाल
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एनएसजी की दादागीरी पर भारत की चाल

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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों का एक मकसद यह भी होता है कि भारत को न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में शामिल कर लिया जाए. परमाणु रिएक्टर के लिए यूरेनियम के निर्यात पर अभी एनएसजी के सदस्य देशों का नियंत्रण है. इन्हीं कारणों से भारत अपने यहां यूरेनियम खदानों की खोज पर जोर दे रहा है.

परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. शेखर बसु ने भी यूरेनियम संवर्धित परमाणु रिएक्टर्स के विस्तार पर जोर दिया है. यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु बम बनाने और बिजली उत्पादन में होता है. भारत सरकार ने मई 2017 में देश भर में 10 न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने की मंजूरी दे दी है. अभी देशभर में 22 न्यूक्लियर पावर रिएक्टर हैं, जिनसे 3 प्रतिशत बिजली की आपूर्ति होती है. सरकार का लक्ष्य 2050 तक इसे बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक करना है.

भारत के पास इस समय दुनिया में मौजूद कुल यूरेनियम का मात्र 4 प्रतिशत भंडार मौजूद है. इसे देखते हुए झारखंड, ओड़ीशा, मध्यप्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ सूरजपुर तथा राजनांदगांव और मेघालय में यूरेनियम भंडार की खोज हो रही है. आंध्रप्रदेश के तम्मलपल्ली और झारखंड के जादूगोड़ा में यूरेनियम की बड़ी खदानें हैं. जादूगोड़ा (झारखंड) में 1967 से ही खनन कार्य जारी है.

यहां से चार किमी की दूरी पर भातिन में यूरेनियम की दूसरी खदान है. जादूगोड़ा से ही 24 किलोमीटर दूर तुरामदिन में भी यूरेनियम मिला है.

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