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पाकिस्तान में जन्मी वाराणसी की बेटियों ने पहली बार दिया भारत में वोट
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पाकिस्तान में जन्मी वाराणसी की बेटियों ने पहली बार दिया भारत में वोट

इस बार का लोकसभा चुनाव कई मायने में अलग रहा है। इस बार का चुनाव ज़मीनी मुद्दे और विकास पर कम पकिस्तान के नाम पर ज़्यादा लड़ा गया है। जब पाकिस्तान की हो रही है तो आप सब उन दो बहनों के बारे में भी जान लीजिये जिनका जन्म तो पाकिस्तान में हुआ है लेकिन उन्होंने वोट भारत में दिया है।

सातवें चरण के मतदान में पाकिस्तान में जन्मी दो बहनों ने पहली बार भारत में काशी में वोट दिया।दोनों सगी बहनों का बहनों का जन्म पाकिस्तान के कराची में हुआ था। उनकी मां पाकिस्तानी और पिता भारतीय हैं। 28 साल की निदा और उसकी 24 साल की बहन महरुख को इस साल 23 मार्च को भारतीय नागरिकता काफी मेहनत के बाद मिली। नागरिकता मिलने के बाद पहली बार उन दोनों बहनों ने अपने वोट देने के अधिकार का इस्तेमाल किया। दोनों बहनों ने रविवार को वाराणसी के आर्य महिला इंटर कॉलेज मतदान केंद्र पर वोट डाला। माहेरुख ने कहा, ‘अपनी सरकार चुनने के लिए मतदान कर सबसे बड़ी खुशी मिली है। अब गर्व से कह सकती हूं कि मैं हिन्‍दुस्‍तान की बेटी हूं।’

रविवार को दोनों बहनों ने लोकसभा चुनाव 2019 के आखिरी चरण को चुनावों में पहली बार वोट डाला। दोनों बहनों को भारत की नागरिकता इसी साल मिली। निदा ने कहा कि वह भारतीय और बनारसी हैं। उन्होंने कही कि ये उनकी जिंदगी का अहम दिन है क्योंकि उन्होंने पहली बार वोट दिया है। उन्हें इसी साल भारत की नागरिकता मिली है। निदा बीएड कर रही हैं।

अपने मत अधिकार करने के बाद बड़ी बहन महरुख ने कहा कि आज उनके लिए त्योहार जैसा दिन है। वह बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से एम कॉम कर रही हैं। दोनों बहनों के पिता वाराणसी के नसीम अख्तर और कराची की शाहिन बानो की शादी साल 1989 में हुई थी। उनका जन्म 1991 और 1995 में कराची में हुआ और बाद में बानो काशी वापिस आई।

अख्तर ने कहा कि उन्होंने शादी के बाद पत्नी के लिए भारतीय नागरिकता के लिए अप्लाई किया लेकिन कई सालों की मेहनत के बाद साल 2007 में भारतीय नागरिकता मिली। उसके बाद उन्होंने अपनी बेटी की नागरिकता के लिए आवेदन किया। इससे पहले वह दोनों बहने वीजा पर रह रही थी।

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