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समस्‍तीपुरः अनुकंपा की राजनीति हावी
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समस्‍तीपुरः अनुकंपा की राजनीति हावी

उत्तर बिहार का प्रमुख ज़िला समस्तीपुर पिछड़ा एवं दलित बाहुल्य क्षेत्र होने के साथ ही समाजवादियों के गढ़ के रूप में चर्चित रहा है. लोकसभा और विधानसभा चुनावों में यहां से समाजवादी विचारक ही बाज़ी मारते आए हैं. वे चाहे जिस जाति-समुदाय के हों, मतदाताओं ने कई दिग्गज प्रत्याशियों को परास्त कर साधारण प्रत्याशियों को जिताने का काम किया. पिछले कई चुनावों से कांग्रेस को ज़िले के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में समाजवादी विचारकों से चुनौती मिली है. स्वतंत्रता सेनानी एवं समस्तीपुर के प्रथम सांसद स्वर्गीय सत्यनाराण सिन्हा, जननायक कर्पूरी ठाकुर एवं वीर वशिष्ठ नारायण सिंह की जन्म-कर्मभूमि समस्तीपुर में अनुकंपा पर आधारित राजनीति इन दिनों का़फी फल-फूल रही है. जननायक कर्पूरी ठाकुर के ज्येष्ठ पुत्र रामनाथ ठाकुर उनके प्रतिनिधित्व वाले समस्तीपुर विधानसभा क्षेत्र से जहां लगातार तीन बार से जद-यू के टिकट पर चुनाव जीतकर बिहार सरकार के विधि, सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री बने हुए हैं, वहीं पूर्व दलसिंहसराय विधानसभा क्षेत्र के पूर्व कांग्रेसी विधायक स्वर्गीय जगदीश चौधरी के पुत्र विजय कुमार चौधरी जद-यू के प्रदेश अध्यक्ष पद पर क़ाबिज़ हैं. इसी तरह रोसड़ा के पूर्व विधायक भोला मांडर के पुत्र एवं पूर्व विधायक अशोककुमार उ़र्फ मुन्ना इन दिनों ज़िला जद-यू के अध्यक्ष पद पर आसीन हैं.

विभूतिपुर के पूर्व सीपीआई विधायक स्वर्गीय प्रो. परमानंद सिंह मदन के अधिवक्ता पुत्र विजय वात्सायन भी चुनाव में किस्मत आज़माने वाले हैं. पूर्व राजद सांसद पीतांबर पासवान के पुत्र भी चुनावी समर में कूदने का मन बना रहे हैं. इसी तरह कल्याणपुर की पूर्व कांग्रेसी विधायक सुकुमारी देवी के भतीजे अनिल कुमार सिंह उजियारपुर विधानसभा क्षेत्र से तीर चलाने के प्रयास में हैं.

रोसड़ा के पूर्व सांसद रामसेवक हज़ारी के पुत्र महेश्वर हज़ारी वारिसनगर विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक बनने के बाद वर्तमान में समस्तीपुर (सु.) संसदीय क्षेत्र से सांसद हैं, वहीं पूर्व समाजवादी नेता स्वर्गीय प्रदीप महतो की पत्नी अश्वमेध देवी कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहने के बाद वर्तमान में नवगठित उजियारपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद हैं. इसी तरह राजद के पूर्व नेता स्वर्गीय अखिलेश राय की पत्नी रोमा भारती विधान परिषद सदस्य हैं. पूर्व सांसद रामसेवक हज़ारी की बहू मंजू हज़ारी वर्तमान में ज़िला परिषद की सभापति हैं और आगामी विधानसभा चुनाव में रोसड़ा (सु.) विधानसभा क्षेत्र से लड़ने को आतुर हैं. हसनपुर के पूर्व विधायक एवं विधानसभा के उपाध्यक्ष गजेंद्र प्रसाद हिमांशु के भतीजे सुनील कुमार पुष्पम राजद से लगातार तीन बार से चुनाव जीत रहे हैं. इसी तरह पूर्व केंद्रीय मंत्री बालेश्वर राम के पुत्र एवं कांग्रेस विधायक दल के नेता डॉ. अशोक कुमार ज़िले के पूर्व सिंघिया विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे हैं और अब नवगठित कुशेश्वरस्थान (सु.) क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं. वहीं उनके पुत्र एवं बिहार युवा कांग्रेस के महासचिव अतिरेक कुमार भी इस बार रोसड़ा (सु.) या अन्य किसी क्षेत्र से किस्मत आज़माने के प्रयास में दिखते हैं. पूर्व कांग्रेसी विधान पार्षद हरिनारायण चौधरी के पुत्र तरुण कुमार भी समस्तीपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर किस्मत आज़माने के लिए बेचैन हैं. पूर्व विधायक स्वर्गीय जगदेव प्रसाद के पुत्र, जगदेव सेना के कमांडर इन चीफ एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि भी नवगठित मोरबा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर किस्मत आज़माने को व्याकुल हैं. इसी तरह समस्तीपुर के प्रथम सांसद स्वर्गीय सत्य नारायण सिंह के भतीजे अनुपम कुमार सिंह उ़र्फ हीरा भी लोजपा के टिकट पर विधानसभा जाने की आस में हैं. ज़िले का सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र शुरू से ही समाजवादियों का गढ़ रहा है. स्वर्गीय रामविलास मिश्र ने कई बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था और उनके पुत्र सज्जन मिश्र हर बार किसी न किसी दल से किस्मत आज़माते हैं. इस बार भी वह राजद-लोजपा एवं जद-यू से समान दूरी बनाए हुए हैं और किसी न किसी चुनाव चिन्ह पर लड़कर ज़िले में अनुकंपा की राजनीति को बढ़ावा देंगे. इसी तरह दलसिंहसराय के पूर्व विधायक राम पदारथ महतो के पुत्र अजय महतो एवं सरायरंजन के पूर्व विधायक रामाश्रय सहनी की पुत्रवधू भी इस बार ज़िले की राजनीति में किस्मत आज़माने को तैयार हैं. पूर्व कांग्रेसी विधायक स्वर्गीय चुल्हाई राम की पौत्री एवं समस्तीपुर नगर परिषद की सभापति अनीता राम पिछला विधानसभा उपचुनाव वारिसनगर से लड़ी थीं और आगामी चुनाव कल्याणपुर (सु.) सीट से लड़ने को प्रतिबद्ध हैं. हसनपुर के पूर्व कांग्रेसी विधायक स्वर्गीय महावीर राउत के पौत्र ललन यादव, पूर्व विधायक स्वर्गीय वशिष्ठ नारायण सिंह के अधिवक्ता पुत्र राधाकृष्ण प्रसाद सिंह राजद के टिकट पर और पौत्र नवीन कुमार सिंह अपने दादा के प्रतिनिधित्व वाले वारिसनगर विधानसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में कूदने की आकांक्षा पाले हुए हैं. विभूतिपुर के पूर्व सीपीआई विधायक स्वर्गीय प्रो. परमानंद सिंह मदन के अधिवक्ता पुत्र विजय वात्सायन भी चुनाव में किस्मत आज़माने वाले हैं. पूर्व राजद सांसद पीतांबर पासवान के पुत्र भी चुनावी समर में कूदने का मन बना रहे हैं. इसी तरह कल्याणपुर की पूर्व कांग्रेसी विधायक सुकुमारी देवी के भतीजे अनिल कुमार सिंह उजियारपुर विधानसभा क्षेत्र से तीर चलाने के प्रयास में हैं.

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पूर्व राजद नेता स्वर्गीय अखिलेश राय की मां एवं जिला पार्षद विद्या देवी और भाई अवधेश राय भी किसी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचने का मंसूबा रखते हैं. ज़िले के कई मुखिया, प्रखंड प्रमुख, ज़िला पार्षद, वार्ड पार्षद और उनके परिवारों के सदस्य आने वाले विधानसभा चुनाव में किस्मत आज़माना चाहते हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान के भाई रामचंद्र पासवान पूर्व रोसड़ा (सु.) संसदीय क्षेत्र से दो बार सांसद रह चुके हैं और वह पिछले चुनाव में जद-यू प्रत्याशी महेश्वर हज़ारी से मात खा गए थे. पूर्व सांसद रामसेवक हज़ारी के बेटे और रामविलास पासवान के भाई की लड़ाई में आ़िखरकार जीत महेश्वर हज़ारी की हुई और तबसे चुनाव में क्षेत्रीय प्रत्याशी की मांग ज़ोर पकड़ रही है, जिसे आगामी विधानसभा चुनाव में बदलाव की राजनीति के रूप में देखा जा सकता है. हर दल और हर क्षेत्र से स्थानीयटिकटार्थियों में से ही किसी को प्रत्याशी बनाने की आवाज़ उठ रही है.

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