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समस्‍तीपुरः राजद के सामने किला बचाने की चुनौती
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समस्‍तीपुरः राजद के सामने किला बचाने की चुनौती

उत्तर बिहार के प्रमुख राजनीतिक केंद्र समस्तीपुर में विधानसभा चुनाव के लिए उतर रहे दिग्गजों ने आर-पार की लड़ाई का शंखनाद कर दिया है. समस्तीपुर विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक रहे पूर्व शिक्षा मंत्री अशोक सिंह द्वारा नीतीश कुमार का तीर छोड़ लालू प्रसाद की लालटेन थाम लेने और राजद विधायक रामलखन महतो द्वारा लालटेन छोड़ तीर थाम लेने से ज़िले की राजनीति में हलचल मच गई है. राजद की स्थिति समस्तीपुर ज़िले में सभी दलों से अव्वल है. राजद-लोजपा गठबंधन छह विधायकों की टीम लेकर अन्य दलों को कड़ी चुनौती दे रहा है. गठबंधन के मौजूदा विधायक नए परिसीमन को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं और ज़िले में बदलाव की लहर देखते हुए कोई भी निर्णय लेने के मूड में हैं. इसकी शुरुआत दलसिंह सराय के राजद विधायक एवं पूर्व मंत्री रामलखन महतो ने की. महतो का क्षेत्र नए परिसीमन में समाप्त हो गया है. तीर थामने वाले महतो ने दलसिंह सराय विधानसभा क्षेत्र से जदयू के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक विजय कुमार चौधरी और राज्यसभा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा को शिकस्त देकर ज़िले की राजनीति में अपना सिक्का जमाया था.

लालू-अशोक मिलन से पशोपेश में हैं कि जाएं तो जाएं कहां? मोरबा विधानसभा क्षेत्र की रूपरेखा पुराने ताजपुर विधानसभा क्षेत्र जैसी है. यह जननायक कर्पूरी ठाकुर का क्षेत्र है, जहां इस बार नए प्रतिनिधि का चुनाव होगा. राजद-लोजपा के बीच बंटवारे के तहत कल्याणपुर (सु.) एवं विभूतिपुर विधानसभा सीट लोजपा के खाते में गई है, जिससे अन्य क्षेत्रों के लोजपा टिकटार्थियों में बेचैनी है.

ज़िले में नए परिसीमन के अंतर्गत उजियारपुर एवं मोरबा दो नए विधानसभा क्षेत्रों का गठन हुआ है. उक्त दोनों क्षेत्रों में सत्तारूढ़ एवं विपक्षी दलों को टिकटार्थियों की बाढ़ के चलते निर्णय लेने में खासी परेशानी हुई. उजियारपुर क्षेत्र से टिकट मिलने की शर्त पर रामलखन महतो द्वारा दल बदलने से ज़िले की राजनीति प्रभावित हुई है. राजद के पूर्व सांसद आलोक कुमार मेहता की निगाहें इस नवगठित सीट पर टिकी हैं. उनके अरमानों की पूर्ति के लिए रामलखन महतो के अरमानों की बलि लालू प्रसाद विधानसभा चुनाव में देंगे, इसका आभास महतो को होने लगा था, इसलिए वह नीतीश के पाले में चले गए. इधर लालू प्रसाद का दामन थामने वाले पूर्व शिक्षा मंत्री अशोक सिंह का कहना है कि लालू तो डेमोक्रेट हैं, लेकिन नीतीश डिक्टेटर हो गए हैं. विकास का ढोल पीटते-पीटते उन्होंने बिहार को विकास के निचले पायदान पर पहुंचा दिया है. किसी विभाग को व्यवस्थित किए बग़ैर विकास की बात करना बेमानी है, जिसका खामियाज़ा आने वाले चुनाव में राजग को भुगतना पड़ेगा. दबंग विधायक अशोक सिंह के राजद में लौट जाने का असर ज़िले की राजनीति पर इस क़दर पड़ा है कि पिछले तीन चुनावों से जीत रहे बिहार सरकार के विधि, सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री रामनाथ ठाकुर के समर्थक अब उन्हें क्षेत्र बदलने की सलाह देने लगे हैं. जो भी हो, जननायक कर्पूरी ठाकुर के असली वारिस रामनाथ ठाकुर एवं राजनीतिक वारिस अशोक सिंह के बीच फिर एक बार दिलचस्प मुक़ाबला देखने को मिलेगा. विगत 1985, 1990 एवं 1995 का विधानसभा चुनाव जीतने वाले अशोक सिंह 2000 में पहली बार रामनाथ ठाकुर से पराजित हुए थे. उसके बाद से लगातार समस्तीपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले रामनाथ ठाकुर अब

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लालू-अशोक मिलन से पशोपेश में हैं कि जाएं तो जाएं कहां? मोरबा विधानसभा क्षेत्र की रूपरेखा पुराने ताजपुर विधानसभा क्षेत्र जैसी है. यह जननायक कर्पूरी ठाकुर का क्षेत्र है, जहां इस बार नए प्रतिनिधि का चुनाव होगा. राजद-लोजपा के बीच बंटवारे के तहत कल्याणपुर (सु.) एवं विभूतिपुर विधानसभा सीट लोजपा के खाते में गई है, जिससे अन्य क्षेत्रों के लोजपा टिकटार्थियों में बेचैनी है. वारिस नगर से उम्मीदवार बनने का मंसूबा पाले बी के सिंह, ज़िला परिषद उपाध्यक्ष सुनीता सिंह, ज़िला पार्षद वसीम रजा समेत कइयों को झटका लगा है, क्योंकि लोजपा द्वारा जीती यह सीट राजद के खाते में चली गई है.

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चर्चा है कि राजद विधायक अशोक प्रसाद वर्मा कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र सामान्य से सुरक्षित बन जाने के कारण वारिस नगर से भाग्य आज़माएंगे. वहीं विधायक विश्वनाथ पासवान कल्याणपुर से लोजपा प्रत्याशी हो सकते हैं. उक्त दोनों ने पिछले वर्ष हुए उपचुनाव में जदयू- भाजपा प्रत्याशियों को पराजित किया था. इस विधानसभा चुनाव के लिए उन्होंने आपस में सीटों की अदलाबदली कर ली है. लोजपा के खाते में ज़िले की दो सीटें विभूतिपुर और कल्याणपुर जाने की चर्चा के साथ इस बात की भी अटकलें लग रही हैं कि लोजपा ज़िलाध्यक्ष एवं विधायक विश्वनाथ पासवान और कार्यकारी अध्यक्ष विजय किशोर सिंह के लिए ही उक्त सीटें ली गई हैं, लेकिन इसकी पुष्टि के लिए कोई भी मुंह खोलने को तैयार नहीं है. नवगठित मोरबा विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य मंत्री नंद किशोर यादव के भाजपा में शामिल होने के बाद पूर्व विधान परिषद प्रत्याशी एवं ताजपुर के प्रखंड प्रमुख सुरेश राय और अभय कुमार सिंह के समर्थकों ने टिकट हासिल करने की कवायद तेज़ कर दी है. पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने मोरबा सीट भाजपा के खाते में लेने का आश्वासन विजय संकल्प सभा में दिया है. नवगठित उजियारपुर एवं मोरबा दोनों में से किसी एक सीट पर भाजपा अपना प्रत्याशी उतारने के लिए प्रयासरत है.

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राजग गठबंधन के एकमात्र विधायक एवं मंत्री रामनाथ ठाकुर समस्तीपुर विधानसभा क्षेत्र से नीतीश कुमार एवं सुशील मोदी का परचम लहरा रहे हैं. ज़िले में स्थापना काल से ही भाजपा का खाता तक नहीं खुला है. जीत की प्रबल संभावना वाले सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने चुनाव लड़ने का मन बनाया है और इसके लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी, बिहार भाजपा प्रभारी अनंत कुमार, मोहन भागवत, बिहार प्रदेश अध्यक्ष सी पी ठाकुर एवं उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी को ज़िले की राजनीति से अवगत कराया गया है. जदयू के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी और पूर्व विधायक अशोक कुमार मुन्ना के संयुक्त प्रयास से जिला पार्षद एवं पूर्व राजद नेत्री शकुंतला वर्मा को मोरबा सीट की शर्त पर जदयू में शामिल करने की चर्चा ज़ोरों पर है. राजद-लोजपा गठबंधन के सीट बंटवारे के बाद से ज़िले में सत्ताधारी दल जदयू-भाजपा के टिकटार्थियों में बेचैनी है कि पता नहीं, कब कौन राजद विधायक या पूर्व विधायक जदयू में शामिल होकर उनके अरमानों पर पानी फेर दे.

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