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समस्तीपुर रेलवे कारखाना बंदी की कगार पर
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समस्तीपुर रेलवे कारखाना बंदी की कगार पर

वर्ष 1881 में ब्रिटिश सरकार द्वारा स्थापित समस्तीपुर रेलवे कारखाना सरकारी उदासीनता के चलते बंदी की कगार पर पहुंच गया है. यह उत्तर बिहार का इकलौता रेलवे कारखाना है. यहां 1907 में हुई हड़ताल ट्रेड यूनियन आंदोलन की अमूल्य धरोहर है. इस कारखाने के अधिकांश कार्य गोरखपुर और इज्जत नगर स्थित कारखानों को सौंप दिए गए हैं. अब तो यहां बड़ी लाइन के डिब्बों और इंजनों की मरम्मत का कार्य भी नहीं कराया जाता, जबकि पहले एमजी के इंजनों एवं वैगनों की मरम्मत (पीओएच) हुआ करती थी. वर्तमान में केवल बड़ी लाइन के बाक्सन-एचएल वैगनों का निर्माण होता है, लेकिन स्पेयर पाट्‌र्स के अभाव में यह काम भी पिछले आठ महीनों से बंद है. अगस्त 2010 में 25 बाक्सन-एचएल वैगनों का निर्माण हुआ था, लेकिन स्पेयर पाट्‌र्स (कप्लर) के अभाव के चलते सितंबर 2010 से अब तक एक भी वैगन का निर्माण नहीं हुआ. कर्मचारियों के चेहरे पर उदासी है. उन्हें लगता है कि शायद इस कारखाने को बंद करने की साजिश की जा रही है.

कारखाने के कर्मचारियों ने ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन की कारखाना स्टोर शाखा के सचिव वीरेंद्र चौधरी के नेतृत्व में कई बार धरना-प्रदर्शन आदि भी किए, अब मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय का घेराव करने की तैयारी चल रही है. कारखाने की उपेक्षा के चलते आम लोगों में भी काफी नाराज़गी है, लेकिन समस्तीपुर के सांसद महेश्वर हजारी को फुर्सत नहीं है कि वह इस ओर ध्यान दें. मालूम हो कि इसी रेलवे कारखाने की उपेक्षा के कारण वर्ष 1984 के लोकसभा चुनाव में झोपड़ी के लाल के रूप में मशहूर महान समाजवादी नेता एवं भूतपूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर और क्षेत्र की उपेक्षा के कारण पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव में नीतीश लहर के बावजूद रामनाथ ठाकुर को पराजय का मुंह देखना पड़ा था.

अगस्त 2010 में 25 बाक्सन-एचएल वैगनों का निर्माण हुआ था, लेकिन स्पेयर पाट्‌र्स (कप्लर) के अभाव के चलते सितंबर 2010 से अब तक एक भी वैगन का निर्माण नहीं हुआ. कर्मचारियों के चेहरे पर उदासी है. उन्हें लगता है कि शायद इस कारखाने को बंद करने की साजिश की जा रही है.

इस रेलवे कारखाने की उपेक्षा वर्षों से हो रही है, लेकिन ट्रेड यूनियन और आम नागरिकों के विरोध के कारण यह अभी तक जिंदा है. इस कारखाने में पहले एमजी के रेल इंजनों और वैगनों की मरम्मत का कार्य होता था, जिसके लिए 1800 से ज़्यादा कर्मचारी नियुक्त थे, लेकिन अचानक मरम्मत का कार्य इस कारखाने में बंद कर दिया गया. इंजन मरम्मत का कार्य पूर्वोत्तर रेलवे के गोरखपुर कारखाने और कैरेज मरम्मत का कार्य इज्जत नगर कारखाने में स्थानांतरित कर दिया गया, जबकि समस्तीपुर कारखाने के मज़दूरों की कार्य कुशलता उच्च कोटि की थी और उनके द्वारा उत्पादन भी बड़े पैमाने पर किया जाता था. इसका उदाहरण 1976 और बाद के वर्षों में प्रतिरक्षा विभाग के लिए 114 एमवीडब्ल्यूजेड वैगनों का सफलतापूर्वक निर्माण निर्धारित समय से पहले पूरा करना है, जिसके लिए भारत सरकार ने इस कारखाने को पुरस्कृत भी किया था. कारखाने में पहले 3500 कर्मचारी कार्यरत थे, अब मात्र 557 कर्मचारी शेष रह गए हैं, जिनमें इलेक्ट्रिकल के 88 कर्मचारी भी शामिल हैं. इस प्रकार 2943 कर्मचारियों को सेवा से वंचित कर दिया गया.

कारखाने में 1983 से कैरेज मरम्मत का कार्य बंद कर दिया गया. इसके बाद यात्री डिब्बों के पीओएच (वैगन मरम्मत), कैरेज एवं वैगनों के रखरखाव के काम आने वाले स्पेयर पाट्‌र्स के निर्माण का काम बंद हो गया. फिर मालगाड़ी के डिब्बों का निर्माण होने लगा, बाद में इसे भी बंद कर दिया गया. 1990 में जब वैगन मरम्मत का काम बंद कर दिया गया तो समस्तीपुर विस्तार विकास मंच, ट्रेड यूनियनों और आम नागरिकों ने इसका ज़बरदस्त विरोध किया. परिणामस्वरूप 1992 से यहां बड़ी रेल लाइन के बाक्सन वैगन का निर्माण कार्य शुरू हुआ. यह कार्य तब शुरू हुआ, जब सीतामढ़ी के तत्कालीन सांसद नवल किशोर राय ने तत्कालीन रेल मंत्री सी के जाफर शरीफ से मिलकर उन्हें इस कारखाने की स्थिति से अवगत कराया. जाफर शरीफ ने कारखाने के भविष्य को देखते हुए बड़ी रेल लाइन की माल गाड़ियों के लिए बाक्सन वैगन निर्माण का कार्य शुरू करने का आदेश दिया. वर्ष 1989 में केंद्र की कांग्रेस सरकार चली गई और वी पी सिंह के नेतृत्व में जनता दल की सरकार बनी. तब रेल मंत्री जार्ज फर्नांडीज ने इस कारखाने को 60 बाक्सन-एचएल वैगन प्रति वर्ष तैयार करने का आदेश दिया था. वर्तमान में यह कारखाना 300 वैगन प्रति वर्ष तैयार कर रहा है. सितंबर 1992 से लेकर अप्रैल 2010 तक इस कारखाने में 3494 बाक्सन-एचएल वैगनों का निर्माण हो चुका है. अभी भी 300 वैगनों का ऑर्डर पूरा होना शेष है, लेकिन स्पेयर पाट्‌र्स (कप्लर) के अभाव में काम बंद है. बताते हैं कि विभागीय लापरवाही के कारण समय पर टेंडर पास नहीं हुआ. नतीजतन न्यूयार्क से आने वाले उक्त स्पेयर पाट्‌र्स भारतीय रेल के किसी भी कारखाने को मुहैया नहीं हो रहे. जबकि यही पाट्‌र्स निजी कारखानों को आसानी से उपलब्ध हैं. फलस्वरूप वैगन तैयार करके वे मालामाल हो रहे हैं.

22 दिसंबर, 2005 को तत्कालीन रेल मंत्री एवं राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने भी इस कारखाने का निरीक्षण किया था और समस्तीपुर डीजल शेड के विस्तार की घोषणा की थी. उन्होंने रेल बजट में इसके लिए धन की व्यवस्था की और 9 अक्टूबर, 2007 को डीजल शेड में दोनों योजनाओं का शिलान्यास भी किया था. 49.12 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले सी कैटेगरी रेल कारखाने का निर्माण अभी जारी है. कहा जा रहा है कि रेल मंत्रालय सी कैटेगरी रेल कारखाने को निजी हाथों में सौंपने जा रहा है. यही कारण है कि मालगाड़ी के डिब्बों की मरम्मत का काम शुरू करने के लिए 736 कर्मचारियों की नियुक्ति की जो मंजूरी मांगी गई थी, वह फाइल पूर्व मध्य रेलवे के हाजीपुर स्थित मुख्यालय में महाप्रबंधक (कार्मिक) के यहां धूल खा रही है. इस बीच इस काम को आउटसोर्सिंग से कराने की बात चल रही है, जिससे मज़दूरों में आक्रोश है. बतौर रेल मंत्री नीतीश कुमार भी इस कारखाने का निरीक्षण और कर्मचारियों को ईनाम के तौर पर पांच लाख रुपये देकर कारखाने के विस्तार की दिशा में पहल कर चुके हैं. राजद विधायक दुर्गा प्रसाद सिंह ने इस कारखाने में कर्मचारियों की कमी, कार्यों में कटौती और सी कैटेगरी कारखाने को निजी हाथों में देने की बात पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि समस्तीपुर रेलवे कारखाने में बड़ी रेल लाइन के कैरेज मरम्मत का काम फिर से शुरू हो, स्पेयर पाट्‌र्स जल्द मुहैया हो और सी कैटेगरी कारखाने को निजी हाथों में न सौंपा जाए. कारखाने के लिए 736 कर्मचारियों की स्वीकृति जल्द से जल्द दी जाए, ताकि स्थानीय बेरोज़गारों को इसका लाभ मिल सके.

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