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संडीला गैस कांडः गैस नहीं थी, वर्ना भोपाल बन जाता
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संडीला गैस कांडः गैस नहीं थी, वर्ना भोपाल बन जाता

संडीला के औद्योगिक क्षेत्र में ब्रिक फील्ड में हुई गैस के रिसाव के कारण कई लोगों की जान चली गई तो कई घायल हो गए. यह घटना भी दिसंबर 1984 में घटित भोपाल गैस त्रासदी के बराबर ही थी, जिसमें हज़ारों लोगों की जान चली गई थी. संडीला के  औद्योगिक क्षेत्र में स्थित अमित हाइड्रोकेमिकल लैब से तीव्र गति के साथ फास्जीन गैस के रिसाव से अब तक 6 लोगों की मौत तथा दो दर्जन से ज़्यादा लोग घायल हो गए. इनमें  राइस मिल मालिक श्रीराम गुप्ता, चौकीदार गोलहे इंद्राणी, प्रमोद शुक्ला समेत चार की मौत हो गई. जबकि एक अन्य प्रमोद ने भी बाद में दम तोड़ दिया. फैक्ट्री के आसपास कई जानवर और दर्जन भर पक्षी मरे मिले साथ ही दर्जनों घुमंतू जानवरों के भी शव मिले. घटना के दो दिन बाद अमित हाइड्रोकेमिकल लैब से दुबारा तीव्र गति से गैस का रिसाव शुरू हो गया. मौक़े पर पहुंचे पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों ने पूरे औद्योगिक क्षेत्र को खाली करवा लिया. क़रीब एक घंटे की मशक्कत के बाद रिसाव पर नियंत्रण किया जा सका. क्षेत्र को हाई एलर्ट घोषित कर आसपास रहने वाले लोगों को वहां से हटा दिया गया है. फैक्ट्री में मौजूद केमिस्ट आगे की स्थिति को नियंत्रण से बाहर होने की बात कह रहे हैं. लेकिन फैक्ट्री में भरी गैस और तैयार केमिकल से क्षेत्र को खतरा बना हुआ है. इस तबाही के बाद स़िर्फ मुक़दमा दर्ज़ कर दिया गया. संडीला में हुआ औद्योगिक गैस त्रासदी हमें सोचने को विवश करता है कि आखिर हम किस दिशा में जा रहे हैं. साहब, जीविका ता नाहीं दई, जान ज़रूर लई. यह कहना है औद्योगिक क्षेत्र संडीला निवासी मोहम्मद शाहबाज़, उमेश गुप्ता, प्रदीप सिंह, मुनेश गुप्ता, सर्वेश और हनी़फ का. वे कहते हैं कि वैसे तो औद्योगिक क्षेत्र में बनी फैक्ट्र्रियों में काम मिल जाता है लेकिन अमित हाइड्रोकेमिकल फैक्ट्री में तो क्षेत्रीय लोगों को रखा ही नहीं जाता था. पहले मजदूर रखे थे लेकिन एक की मौत हो गई. पता चल जाने पर क्षेत्रीय मजदूर रखने बंद कर दिए. फैक्ट्री में मजदूर से लेकर मैनेजर तक बाहर के हैं. फैक्ट्री से निकलने वाले गंदे पानी को पीकर कई जानवर भी मर चुके हैं. कई बार शिकायत भी की गई पर सुनवाई नहीं हुई. अभी कुछ दिन पूर्व को केमिकल गिरने से एक मजदूर मर गया था, लेकिन बाहरी मजदूर होने पर मामला दबा दिया गया. पर यह हादसा बड़ा होने के कारण दबाया नहीं जा सका. इस प्लांट में मकैप्टन की क़रीब 250 सीसी रखी हुई हैं. वहीं प्लांट में थायोफास्जीन भी भारी मात्रा में मौजूद है. यह गैस भी का़फी घातक है और इस पर नियंत्रण की भी कोई व्यवस्था नहीं है. अमित हैइड्रोकेमिकल लैब के गैस रिसाव की घटना में अच्छी बात यह रही कि फैक्ट्री के बॉयलर में ज़्यादा गैस नहीं थी. गैस भरी होती तो यह भोपाल गैस कांड से भी ज़्यादा तबाही मचा देती. जिम्मेदारों की लापरवाही ही इस घटना का कारण रही. अमित हाइड्रोकेमिकल लैब में बनने वाले केमिकल से भले ही जीवनरक्षक दवाओं का निर्माण किया जाता हो लेकिन यह क्षेत्रीय लोगों के लिए खतरनाक है. रसायन जानकारों की मानें तो फैक्ट्री में फास्जीन गैस का भंडार था, उसमें विस्फोट हो जाता तो आसपास के क़रीब दस किलोमीटर के क्षेत्र में तबाही मचती. विस्फोट के बाद गजरौला स्थित जुबिलिएंट लाइफ साइंस की ओर से विशेषज्ञ दल आया. इस दल का नेतृत्व जनरल मैनेजर सेटी विनय कुमार देवता ने किया. देवता ने बताया कि जार आदि की तलहटी में कहीं भी फास्जीन गैस बची है तो इसे नाइट्रोजन गैस की मदद से समाप्त कर देंगे या इसके असर को शून्य कर देंगे. दल के लोगों के पास ऐसे काम को अंजाम देने के लिए ड्रेस जर्मनी से मंगाई गई है. फैक्ट्री में सुरक्षा के मानकों का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखा गया है. आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर आर गुरूनाथ का कहना है कि फास्जीन एक घातक रसायन है. 1984 के बाद से इसका प्रयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है. रसायन का इंडस्ट्रीयल यूज नहीं किया जा सकता है. भोपाल गैस त्रासदी में इसी रसायन ने तबाही मचाई थी. सवाल यह है कि जब देश में फास्जीन गैस के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक है तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस कैमिकल फैक्ट्री को एनओसी कैसे दी. एनओसी देने वाले अधिकारी के विरूद्ध अभी तक कार्यवाही क्यों नहीं की गई. दूसरा बड़ा सवाल यह है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सदस्य सचिव डॉ.सी.एस. भट्‌ट को अनेक बार संपर्क करने के बाद भी वह बेसिक जानकारी देने को तैयार नहीं है.

इस घटना पर यूपी कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष डॉ. रीता बहुगुणा ने दु:ख व्यक्तकरते हुए कहा कि घटना की जांच के लिए चार सदस्यीय जांच दल का गठन किया है, जो घटनास्थल पहुंचकर अपनी वस्तुस्थिति की विस्तृत रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को सौंपेगा.

उन्होंने टीम भेजने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ने का प्रयास किया. उनसे पूछा गया कि फास्जीन गैस का इस्तेमाल 1984 से प्रतिबंधित है तो फिर इस फैक्ट्री में इसके उपयोग की स्वीकृति किसने दी. उन्होंने कहा कि वर्ल्ड बैंक की टीम आई हुई है हमारी उनके साथ मीटिंग है, हमारे लिए यह मीटिंग बहुत ज़रूरी है यह कहकर फोन काट दिया. लोगों की ज़िंदगी मौत में तब्दील होती रही लेकिन चिंता उन्हें वर्ल्डबैंक की रही. संडीला की सबसे दुखद औद्योगिक आपदा जिसमें हज़ारों व्यक्तियों का जीवन गैस चैंबर में कम गैस होने के कारण भले ही बच गया हो लेकिन अपने पीछे कुछ सवालियां निशान छोड़ गया है. जिनकी देर सवेर पड़ताल होना ज़रूरी है. क्योंकि सुरक्षा मानकों के प्रति लगातार लापरवाही के चलते इस हादसे से पूर्व अनेक बार छोटी-छोटी दुर्घटनाएं होती रही है लेकिन इन घटनाओं को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के भ्रष्ट अधिकारियों और पर्यावरण निदेशालय की लापरवाहियों के कारण उजागर नहीं हुआ. संडीला गैस रिसाव प्रकरण की जांच के लिए गठित समिति के दायरे में सेफ ईस्ट कंपनी प्रा.लि. संडीला को शामिल करने की मांग सांसद अशोक कुमार रावत ने ज़िलाधिकारी से की है.

संडीला के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष तथा मोमिन कांफ्रेंस के प्रदेश अध्यक्ष रईस अंसारी ने गैस त्रासदी में मारे गए लोगों को 15-15 लाख रूपए मुआवज़ा तथा घायलों को 5-5 लाख रूपए की आर्थिक सहायता की मांग की है.

बसपा के स्थानीय सांसद अशोक कुमार रावत ने बताया कि नियम 377 के अंतर्गत 24 फरवरी को उठाए गए प्रकरण के संबंध में भारत सरकार के पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने सितंबर 2010 में अवगत कराया गया कि औद्यौगिक क्षेत्र संडीला में तीन मुख्य उद्योग मेसर्स सेफ ईस्ट कंपनी प्रा.लि. संडीला, मेसर्स अमित हेट्रोकेम इंडिया संडीला, मेसर्स बी.आर.एस. फुड्‌स संडीला में चल रहे हैं. तीनों उद्योगों में वायु और जल प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियां स्थापित की गई हैं, तथापि यह पाया गया कि मेसर्स सेफ ईस्ट कंपनी प्रा.लि. संडीला अपने शोधन संयत्र का रख रखाव नहीं कर रही है. राज्य बोर्ड से जल प्रदूषण निवारण और नियंत्रण अधिनियम के अर्ंतगत इस उद्योग को बंद करने की नोटिश जारी किया जा चुका है. सांसद रावत ने कहा कि मेसर्स अमित हेट्रोकेम इंडिया संडीला में प्रतिबंधित गैस फास्जीन के रिसाव से हुई हृदय विदारण घटना को दृष्टिगत रखते हुए ज़िला प्रशासन द्वारा इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सेफ ईस्ट इंडिया कंपनी प्रा.लि. के बंद करने की नोटिस के आलोक में इस कंपनी के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई है. उन्होंने मांग की कि गैस रिसाव प्रकरण की जांच के लिए गठित समिति के दायरे में सेफ ईस्ट कंपनी प्रा.लि. संडीला को भी शामिल किया जाए, जिससे क्षेत्र में इस प्रकार की दुर्घटना न हो सके. गैस रिसाव कांड में गंभीर रूप से प्रभावित लोगों को 50-50 हज़ार और सामान्य रूप से पीड़ित लोगों को 25-25 हज़ार रुपए की आर्थिक सहायता दी गई. फैक्ट्री का संचालन बंद कर दिया गया है. अपर ज़िलाधिकारी ने लोगों को आश्वस्त किया कि अब फैक्ट्री में किसी भी प्रकार की अनहोनी की आशंका नहीं है. उप ज़िलाधिकारी संडीला संतोष राय ने बताया कि ज़िलाधिकारी ए.के. सिंह राठौर ने प्रशासन की ओर से गंभीर रूप से पीड़ित छह लोगों के इलाज के लिए 50-50 हज़ार रुपए की सहायता राशि तहसीलदार पी.सी. श्रीवास्तव के माध्यम से भिजवाई है. उनके साथ विधान परिषद सदस्य अब्दुल हन्नान भी गए हुए हैं. इसमें 10 हज़ार रुपए नकद और 40 हज़ार रुपए की चेक दी गई. इसके अलावा सामान्य रूप से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए 25-25 हज़ार रुपए की सहायता राशि भेजी जा चुकी है. गैस रिसाव से हुई 4 लोगों की मृत्यु और कई लोगों के गंभीर रूप से घायल हो जाने की घटना पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने दु:ख व्यक्तकरते हुए कहा कि उपरोक्त घटना की जांच के लिए एक चार सदस्यीय जांच का दल का गठन किया है जो घटनास्थल पहुंचकर अपनी वस्तुस्थिति की विस्तृत रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को सौंपेगा. प्रदेश कांग्रेस के मीडिया सचिव विजय सक्सेना ने बताया कि जांच दल में प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के चेयरमैन और सेवानिवृत्त आईएएस पी.एल. पुनिया, प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री श्री श्यामलाल पुजारी, प्रदेश कांग्रेस के सचिव  रमेश मिश्रा तथा कमल किशोर एडवोकेट शामिल हैं. वही दूसरी ओर संडीला के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष तथा मोमिन कांफ्रेंस के प्रदेश अध्यक्ष रईस अंसारी ने गैस त्रासदी में मारे गए लोगों को 15-15 लाख रूपया मुआवज़ा तथा घायलों को 5-5 लाख रूपए की आर्थिक सहायता की मांग की है.

1 comment

  • Sandila gas risao m mere Pati ur meri sas dono Ki death ho gyi thi us smye Mai pregnant thi Mujhe bhi gas lgi thi pr Mai bc Gyi pr aaj bhi Mera jivan ur beti को bhout muskilo ka samna krna pd rha h paiso के लिए dusro के age hath failana pd rha h abhi tk Mujhe insaf ni Mila kesh abhi tk pinding h jld se jld Mujhe insaf mile yhi khena chate h hm

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