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सार –संक्षेप : महिलाएं पुलिस में झूठी रिपोर्ट लिखवाती हैं
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सार –संक्षेप : महिलाएं पुलिस में झूठी रिपोर्ट लिखवाती हैं

महिलाओं के हितों की सुरक्षा के लिए बनाए गए दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा जैसे विशेष क़ानून का महिलाएं ही नाजायज़ फायदा उठा रही हैं. महिला थाना पुलिस के पास 50 फीसदी ऐसे मामले आ रहे हैं जिनमें पति या ससुराल पक्ष के खिला़फ झूठी शिकायत कर प्रकरण दर्ज़ कराने के प्रयास किए जाते हैं. यह अलग बात है कि सच्चाई सामने आने के बाद भी पुलिस क़ानून के साथ खिलवाड़ करने वाली झूठी महिलाओं के खिला़फ कार्रवाई नहीं करती.

थानों में झूठी शिकायतें दरअसल पति या ससुराल पक्ष के अन्य लोगों पर अनावश्यक दबाव बनाने और परेशान करने के लिए की जाती हैं. झूठी शिकायत करने वाली महिलाएं ससुराल वालों को जेल अथवा हवालात की हवा खिलवाने की धमकी देकर मनमानी करती हैं.

महिला थाना की एक अधिकारी के मुताबिक़ परामर्श केन्द्र में आने वाले अधिकतर मामलों में पत्नी द्वारा पति व ससुराल वालों पर अनावश्यक दबाव बनाने का प्रयास किया जाता है. कई बार अड़ियल रवैये के कारण काउंसलिंग नाकाम हो जाती है. ऐसी स्थिति में पत्नी द्वारा दहेज प्रताड़ना या घरेलू हिंसा का प्रकरण दर्ज़ करने का दबाव बनाया जाता है. उन्होंने बताया कि यदि प्रकरण दर्ज़ नहीं किया जाता है तो ये महिलाएं महिला आयोग व न्यायालय में वाद लगा देती हैं. न्यायालय के आदेश पर हमें दहेज प्रताड़ना का प्रकरण दर्ज़ करना पड़ता है.

ट्रैफिक चौकी पर अवैध वसूली जारी है

मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के तमाम उपाय विफल हो चुके हैं और अब भ्रष्टाचार खुलकर सड़क पर आ गया है. उत्तरी मध्य प्रदेश में ट्रैफिक चौकी और नाकों पर अवैध वसूली मानो सरकारी दस्तूर बन गया है.

एक माह पूर्व राज्य के मुख्य सचिव अवनि वैश्य का पारिवारिक सामान दिल्ली से भोपाल ला रहे ट्रक के ड्राईवर से मुरैना के बॅार्डर चेकपोस्ट पर अवैध वसूली के मामले को लेकर मीडिया और प्रशासन में हंगामा मचा था. तब उम्मीद बनी थी कि मुख्य सचिव इस खुलेआम भ्रष्टाचार पर नकेल ज़रूर लगाएंगे, मगर हुआ कुछ नहीं.

उसके तुरंत बाद भिण्ड-दतिया क्षेत्र के भाजपा सांसद अशोक अर्गल ने दतिया ट्रैफिक चौकी पर वाहन चालकों से अवैध वसूली करने वाले होमगार्ड के तीन सिपाहियों को रंगे हाथों पकड़ा. सांसद ने इसकी शिकायत चंबल क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक एसके झा से की. अर्गल ने होमगार्ड सिपाही शिवा, कल्याण और मैथिली के अलावा ट्रैफिक सूबेदार अतुल सिंह और थाना प्रभारी अजय भार्गव को हटाने की मांग की.

दतिया के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आर के सगर ने इस घटना को सही बताया और कहा कि सांसद की शिकायत पर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी.

फरार विधायक द्बारा विधायक निधि का उपयोग

मध्य प्रदेश के पृथ्वीपुर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित कांग्रेस विधायक बृजेन्द्र सिंह राठौर दिसम्बर 2008 में चुनाव के समय विधायक सुनील नायक की हत्या सहित तीन मामलों में आरोपी बनाए गए हैं और  पुलिस को उनकी तलाश है. कहा जाता है कि वह पुलिस की पहुंच से बाहर हैं, फिर भी टीकमगढ़ ज़िला कलेक्टर और दूसरे सरकारी अधिकारियों को वह विधायक निधि के उपयोग के बारे में आदेश-निर्देश और अनुशंसा विषयक लिखित पत्र भेजते रहते हैं. पिछले विधानसभा सत्र में न्यायालय से अग्रिम जमानत लेकर राठौर ने विधानसभा में उपस्थित होकर विधायक पद की शपथ ली थी. जमानत की शर्त पूरी नहीं होने पर भी पुलिस उन्हें पकड़ नहीं पाई. विधायक राजेन्द्र सिंह राठौर पर भाजपा विधायक सुनील नायक के अलावा ग्राम चन्द्रपुरा के सरपंच अंबिका प्रसाद की हत्या और भाजपा नेता भूपेन्द्र पर जानलेवा हमले के भी मामले दर्ज़ हैं और इन सभी मामलों में पुलिस को उनकी तलाश है. विधायक किसी अज्ञात स्थान पर आराम से रह रहे हैं और विधायक निधि के ज़रिए अपने चुनाव क्षेत्र में काम भी करा रहे हैं. मजेदार बात यह कि पुलिस ने ब्रजेन्द्र सिंह राठौर पर 25 हज़ार रूपए का इनाम भी घोषित कर रखा है.

फरारी के बावजूद विधायक राठौर का कोई भी प्रशासनिक कार्य रूका नहीं है. अ़फसरों पर उनका दबदबा कायम है. अपने चुनाव क्षेत्र के विकास के लिए विधायकों को दी जाने वाली निधि का उपयोग राठौर बड़ी दबंगई के साथ कर रहे हैं. उन्होंने पिछले वित्त वर्ष में पूरे 77 लाख रुपये के निर्माण और लोकहित के कार्यो के प्रस्ताव शासन को भेजे. इसके अलावा ज़िला योजना मंडल को 8 मार्च को 49 लाख रुपये के और 18 मार्च को 28 लाख रुपये के प्रस्ताव विधायक निधि के उपयोग बाबत भेजे. इन पर अमल भी हुआ. ज़िला योजना मंडल की बैठक में ज़िला कलेक्टर और कई सरकारी अधिकारी भी होते हैं. जब इस बारे में पुलिस अधीक्षक टीकमगढ़ का ध्यान आकर्षित किया गया, तो पुलिस अधीक्षक आकाश जिंदल ने कहा कि पुलिस ब्रजेन्द्र सिंह राठौर को गिरफ्तार करने की पूरी कोशिश कर रही है. विधायक निधि के उपयोग के प्रस्ताव कहां से आ रहे हैं और कौन ला रहा है, इसका पता लगाया जाएगा. उन्होंने कहा कि हमें भरोसा है कि जल्दी ही फरार विधायक को गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

महिला सरपंचों को काम नहीं दिया

महिला सशक्तिकरण और लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी के लिए आरक्षण क़ानून बनाने के सराहनीय सरकारी प्रयासों के बावजूद पुरुष प्रधान समाज में आज भी महिला जनप्रतिनिधियों को पुरुषों की कृपा पर निर्भर रहना पड़ता है. मध्य प्रदेश के छतरपुर ज़िले में दबंगों के दबाव के कारण पांच ग्राम पंचायतों की महिला सरपंचों को चुनाव संपन्न होने के चार माह बाद भी अपने पद पर काम नहीं करने दिया जा रहा है.

अधिकृत सूत्रों के अनुसार बड़ामलहरा विकास खण्ड की मेलवार, बमनी, सूरजपुरा कलां, जसगुवां और सूरजपुरा़खुर्द ग्राम पंचायतों में महिला सरपंचों को पदभार ग्रहण नहीं करने दिया गया है. इस बारे में बताया जाता है कि इन पंचायतों के पूर्व सरपंचों और पंचायत सचिवों के खिला़फ राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के कार्यो में घपले, घोटाले और भ्रष्ट्राचार के आरोपों की रिपोर्ट जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने पुलिस में दर्ज़ कराई है. अत: ये पूर्व सरपंच और सचिव नहीं चाहते कि नई सरपंच काम संभाले और उनके घपले, घोटालों के दस्तावेज पुलिस के सुपुर्द कर उन्हें मुसीबत में डाल दे. यद्यपि पंचायत सचिवों को शासन ने निलंबित किया है, लेकिन वे अपना दबदबा बनाए हुए हैं. मेलवार ग्रामपंचायत की सरपंच श्रीमती उर्मिला विश्वकर्मा और नए पंचायत सचिव डालचंद का कहना है कि उन्हें अभी तक पंचायत की चेक बुक तक नहीं मिली है. इसके लिए वे जनपद पंचायत और बैंक शाखा के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन बैंक खाते में अभी पूर्व सरपंच का ही नाम दर्ज़ हैं. बमनी ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती सुशीला शर्मा का भी कहना है कि उनकी पंचायत के पूर्व सरपंच पर 14 लाख रुपए गबन का मामला पुलिस में दर्ज़ है. इसीलिए वे उन्हें पद का चार्ज नहीं देना चाहते हैं. कई बार शासन में वे शिकायत भी कर चुकी हैं.

पुलिस अधीक्षक और थाना प्रभारी में हाथापाई

मध्य प्रदेश पुलिस में अनुशासन नहीं रह गया है. यहां तक कि कुछ छोटे कर्मचारी अपने आला अ़फसरों की भी परवाह नहीं करते हैं. हाल ही में भिण्ड में पुलिस अधीक्षक चंचल शेखर और थाना प्रभारी एमके वर्मा के बीच कार्यालय में ही हाथापाई की घटना से पुलिस विभाग शर्मिंदा है और प्रशासन के शीर्ष अधिकारी भी चिंतित हैं. घटना के बारे में बताया जाता है कि पुलिस थाना प्रभारी वर्मा का तबादला भिण्ड से मुरैना कर दिया गया था और वह पुलिस अधीक्षक कार्यालय में कार्यमुक्ति आदेश लेने गए थे. जब वह पुलिस अधीक्षक से मिलने गए तो कुछ ही देर में इन दोनों में हाथापाई होने लगी. बताते हैं कि भ्रष्टाचार को लेकर का़फी समय से दोनों में विवाद चल रहा था.

बाद में चंबल क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक संजय कुमार झा को इस बारे में जब जानकारी मिली तो उन्होंने कहा कि इस घटना के बारे में दोनों ही पुलिसकर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है, इसके बाद आगे की कार्यवाही पर विचार किया जा सकता है.

करे कोई और भरे कोई

पुराने टेलीफोन बिलों का बकाया भुगतान न होने के कारण मध्य प्रदेश सरकार के छह मंत्रियों के टेलीफोन काट दिए गए हैं. जब फोन कट गए तो राज्य के मंत्रियों में हड़कंप मचा और उन्होंने गृह विभाग से अपने बिलों के भुगतान के बारे में जानकारी मांगी. पता चला कि सभी बिलों का नियमित भुगतान हो रहा है.

इस पर गृह विभाग ने बीएसएनएल से फोन काटने के बारे में जब जवाब-तलब किया, तो वहां से जवाब मिला कि 1999 और उससे पहले के सरकार के मंत्रियों के टेलीफोन के 30 से 32 हज़ार रुपये तक के बिल बकाया हैं.

अब गृह विभाग पुराने बकाया बिलों की तलाश कर रहा है. सरकार में पहले मंत्रियों के फोन बिलों का भुगतान सामान्य प्रशासन विभाग करता था, लेकिन अब यह ज़िम्मेदारी गृह विभाग को दी गई है. दोनों विभाग पुराने बिलों की तलाश में हैं.

वेतन की मांग की तो खेत और घर जला दिया

एक ज़माने में हिटलर जैसे तानाशाहों से कोई अपने हक़ की मांग करता था तो उसे फांसी दे दी जाती थी या फिर जिंदा जला दिया जाता था. सामंती तबका किसानों का शोषण करते थे. ख़ैर, वो उस ज़माने की बात थी, अब  ज़माना बदल गया है. लेकिन मध्य प्रदेश के सिंगरौली में हाल में हुए एक वाकये ने उस ज़माने की याद को फिर से ताजा कर दिया है.

लोकतंत्र में अभी भी सामंती विचार धारा का बोलबाला है. इसका जीता-जागता प्रमाण चितरंगी पंचायत के ढिघर गांव में देखने को मिला. बेगारी का विरोध करने की सज़ा एक परिवार को यह मिली कि उसके खेत-खलिहान और घर सभी जलकर राख कर दिए गए. आज इस आतंक से पीड़ित परिवार की आवाज़ सुनने के लिए कोई तैयार नहीं है. सिंगरौली ज़िले के जनपद पंचायत क्षेत्र चितरंगी के डिघर खुर्द गांव में 29 मार्च को एक ग़रीब के मकान और खेत में आग लगा दी गई. गोमती नाई नामक इस व्यक्ति का कसूर बस इतना था कि इसने सामंतों की बेगारी करने से इंकार कर दिया था. इस घटना के पीछे इसी क्षेत्र के प्रभावशील लोगों के नाम सामने आ रहे हैं. यही वज़ह है कि, ज़िले की पुलिस भी इस मामले के प्रति अपने रवैये को उदासीन बनाए बैठी है. गोमती नाई पुत्र शालिक राम नाई, उम्र 52 वर्ष, जब उसने अपने काम का पारिश्रमिक मांगा तो ग्राम पंचायत के सचिव लुटई पुत्र बजरंगी, इंस्पेक्टर पुत्र राजबहादुर सिंह और उस्ताद सिंह ने गोमती के खेत खलिहान और मकान को बर्बाद कर दिया. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ग्राम पंचायत के सदस्य लुटई सिंह द्वारा इस क्षेत्र में भ्रष्टाचार से का़फी अवैध धन राशि एकत्र कर ली गई है. अब इसी धन बल का उपयोग ग़रीब परिवारों को परेशान करने के लिए किया जाता है. गांव की मां कुडार वासिनी स्वयंसहायता समूह में गोमती बाई को और उसकी पत्नी कलावती को प्राथमिक शाला में खाना बनाने के काम पर लगाया गया था. कलावती स्वयं समूह की सदस्या है, फिर भी उसे 6 महीने तक काम करने के बाद नौकरी से निकाल दिया गया. कलावती द्वारा वेतन मांगे जाने पर जान से मारने की धमकियां दी जाने लगी, जिसकी परिणिति अग्निकांड के रूप में हुई है. लुटई सिंह वर्तमान में गांव के पंचायत होने की स्थिति में उनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी है, और वर्तमान में देवसर न्यायालय से आईपीसी की धारा 420 के तहत उनके विरूद्ध प्रकरण भी विचाराधीन है. उपरोक्त प्रकरण की रिपोर्ट होने के बावजूद भी स्थानीय पुलिस ने इस मामले पर कोई गंभीरता नहीं दिखाई है, जबकि प्रताड़ित परिवार भुखमरी की कगार तक पहुंच चुका है. विंध्य क्षेत्र में सामंती विचारधारा का बोलबाला होने के कारण शोषण की घटनाओं को पुलिस भी सामान्य घटनाओं की तरह ही देखती है, जिसके परिणामस्वरूप अत्याचार करने वालों के हौसले काफी हद तक बुलंद हैं.

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