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सतना पुलिस चौकी को अस्तित्व की तलाश
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सतना पुलिस चौकी को अस्तित्व की तलाश

सतना स्टेशन स्थित जीआरपी पुलिस की चौकी अंग्रेज़ों के राज्य में 160 साल पहले स्थापित की गई थी. मुंबई-हावड़ा प्रमुख रेल मार्ग से गुज़रने वाली सभी ट्रेनें इस चौकी से होकर ही गुज़रती थी. चौकी की स्थापना के समय सतना रेलवे स्टेशन से काशी एक्सप्रेस, मुंबई हाबड़ा मेल, इटारसी इलाहाबाद पेसेंजर और बाम्बे जनता मेल ही गुज़रता था. आज यहां से प्रतिदिन 105 ट्रेनों का आवागमन होता है. इन ट्रेनों में 25 हज़ार यात्री प्रतिदिन स़फर करते है. रेलवे स्टेशन का विस्तार हुआ, पर 160 साल पुरानी इस चौकी की स्थिति जस की तस है.

मुंबई-हावड़ा प्रमुख रेल मार्ग पर स्थित है सतना स्टेशन. यहां स्थित रलवे पुलिस चौकी 160 साल पुरानी हो चुकी है. इसकी स्थापना अंग्रेज़ों द्वारा की गई थी. यह इकलौती पुलिस चौकी थी जहां बीमा राजघराने की हुकूमत नहीं चली. डेढ़ सदी गुज़र जाने के बाद आज भी यह चौकी सुविधाओं के लिए मोहताज है.

रेल यात्रियों की ह़िफाज़त की ज़िम्मेदारी जीआरपी पुलिस की होती है. 160 साल बाद भी इस चौकी को प्रमोट कर थाने का दर्ज़ा नहीं दिया गया. आज भी सतना जीआरपी चौकी में कटनी थाने से कायमी नंबर लेकर प्रकरण पंजीबद्ध करना पड़ता है. जीआरपी के जवानों को रहने लायक आवास नहीं है. इस चौकी में एक सब इंस्पेक्टर, एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर, 10 प्रधान आरक्षक और 21 आरक्षक तैनात हैं. इनमें से स़िर्फ 9 जवानों को निवास के लिए जर्जर आवास दिए गए हैं.

रेलवे परिसर में होने वाले अपराधों की रोकथाम के लिए ज़िम्मेदार इस चौकी के पुलिसकर्मियों को ड्‌यूटी के दौरान यात्रा के मुफ्त पास भी नहीं दिए जाते. यह बात अलग है कि रेलवे कुलियों, पोर्टर और प्वाइन्ट्‌स मैन को बकायदा फैमिली पास दिया जाता है. रेल सेवा के दौरान जीआरपी जवानों को टीए-डीए राज्य शासन के कोटे से दिया जाता है. इस चौकी के जवान वारदात की छानबीन के लिए देश के विभिन्न भागों में जाते हैं. शहर में किराये पर मकान ले रहे इन जवानों को 400 रुपये प्रतिमाह आवासीय भत्ता दिया जाता है, लेकिन इन्हें किराए पर मकान के लिए 1500 रुपये तक ख़र्च करने होते हैं.

सतना में पदस्थ मुट्ठी भर जवानों का कार्यक्षेत्र सतना से झांसी आउटर, इलाहाबाद ट्रेक से नैनी आउटर और मैहर तक है. इनमें से अधिकांश स्टेशन दस्यु प्रभावित माने जाते हैं. डकैती, हत्या और लूट जैसे अपराध सामान्य समझे जाते हैं. इतना ही नहीं शहर के 40 फीसदी शहर और रेलवे कॉलोनी का जिम्मा भी  जीआरपी के पास ही है. स्टेशन परिसर के जीआरपी बैरक में बुनियादी सुविधाओं का आभाव है. जीआरपी बैरक इलाहाबाद, मानिकपुर, मुगलसराय और बनारस से पेट्रोलिंग पर आने वाले जवानों के अल्पकालिक विश्राम के लिए बनाए गए हैं.

सतना के मुक़ाबले कटनी जीआरपी थाने का क्षेत्र भी कम है और वहां सुविधाएं भी बेहतर हैं. वहीं रीवा में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी ने अपने प्रभाव से जीआरपी चौकी को थाना घोषित करवा लिया है. यह बात अलग है कि रेलवे से सहमति न मिल पाने के कारण यह प्रक्रिया अभी लंबित है.

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