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जब यूपी के इस नेता ने फिल्मों के लिए खोल दिया था सरकारी खजाना
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जब यूपी के इस नेता ने फिल्मों के लिए खोल दिया था सरकारी खजाना

सरकारी खजाना लुटाने के मामले में अखिलेश सरकार और भाजपा टक्‍कर के हैं. निवर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रचार-प्रसार पर रिकॉर्ड तोड़ खर्च तो किया ही फिल्म वालों को भी सरकारी खजाने से खूब धन बांटे. अपने कार्यकाल के अंतिम वर्ष में अखिलेश सरकार ने एलईडी से प्रचार में 85 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए. प्रतिस्पर्धा में योगी आदित्यनाथ ने भी सत्ता संभालते ही एलईडी प्रचार पर 10 करोड़ रुपए खर्च कर दिए. अखिलेश यादव ने चुनावी वित्तीय वर्ष 2016-17 में एलईडी वैन से प्रचार कराने में 85 करोड़ 46 लाख 60,681 रुपए खर्च किए तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एलईडी वैन से प्रचार कराने में वर्तमान वित्तीय वर्ष 2017-18 के शुरुआती साढ़े सात महीने में 9 करोड़ 92 लाख 68,792 रुपए खर्च किए.

अखिलेश सरकार ने अगस्त 2016 तक एक हजार करोड़ रुपए टीवी अखबार के विज्ञापनों, होर्डिंग्स और एलईडी के जरिए प्रचार-प्रसार में झोंक दिए थे. इसी तरह अखिलेश सरकार ने फिल्म वालों को भी खूब धन दिया. यह खुलासा हुआ है कि एक 21 दिसम्बर 2016 को हुई एक ही बैठक में 21 विभिन्न फिल्म कंपनियों को करीब 10 करोड़ रुपए बांट दिए.

इनमें सबसे अधिक दो करोड़ रुपए ‘मसान’ फिल्म बनाने वाली कंपनी मेसर्स फैंटम फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड मुंबई को दिए गए. इसके बाद के क्रम में फिल्म ‘पंडित जी बताईं न बियाह कब होई’ बनाने वाली कंपनी मेसर्स रविकिशन एंड मेधज प्रोडक्शंस लखनऊ को करीब 83 लाख रुपए, फिल्म ‘राजा बाबू’ बनाने वाली कंपनी मेसर्स शौर्या इंटरटेनमेंट लखनऊ को करीब 73 लाख, फिल्म ‘वाह ताज’ बनाने वाली कंपनी मेसर्स फन फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड दिल्ली को करीब 66 लाख रुपए, फिल्म ‘भूरी’ बनाने वाली कंपनी मेसर्स एस वीडियो पिक्चर्स मुंबई को 64 लाख रुपए, फिल्म ‘जिगरिया’ बनाने वाली कंपनी मेसर्स सौंदर्या प्रोडक्शंस मुंबई को 54 लाख रुपए, फिल्म ‘डायरेक्ट इश्क’ बनाने वाली कंपनी बाबा मोशन पिक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड मुंबई को 46.44 लाख रुपए, फिल्म ‘नहले पर दहला’ बनाने वाली कंपनी मां कैला देवी फिल्म्स मुंबई को44.01लाख, फिल्म ‘अलिफ़’ बनाने वाली कंपनी एबी इन्फोसॉफ्ट क्रिएशन मुंबई को43.48 लाख रुपए, फिल्म ‘थोड़ा लुत्फ़ थोड़ा इश्क’ बनाने वाली कंपनी चिलसाग मीडिया प्राइवेट लिमिटेड को 42.33 लाख रुपए, फिल्म ‘मिस टनकपुर हाज़िर हो’ बनाने वाली कंपनी क्रॉसवर्ड फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ को 37.22 लाख रुपए, फिल्म ‘मेरठिया गैंगस्टर्स’ बनाने वाली कंपनी प्रतीक इंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड गाजियाबाद को 36.23 लाख रुपए, फिल्म ‘स्वदेश की खातिर’ बनाने वाली कंपनीशीतल मूवी टेंपल वाराणसी को 7.20 लाख रुपए औरफिल्म‘हम हईं जोड़ी नं-1’ बनाने वाली कंपनी कैलाश मानसरोवर प्रोडक्शंस मुंबई को 4.34 लाख रुपए दिए गए.

तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को फिल्म वालों को तत्काल अनुदान देने की इतनी हड़बड़ी थी कि उन्होंने फिल्म ‘मजाज-ए-गम-ए-दिल-क्या करूं’, ‘इश्केरिया’, ’तलब’, ‘हम हईं जोड़ी न-1’, ‘अलिफ़’, ‘आई एम नॉट देवदास’ और ‘स्वदेश की खातिर’ को फिल्म रिलीज़ होने के पहले ही अनुदान का 30 प्रतिशत भुगतान जारी कर दिया. फिल्म ‘आई एम नॉट देवदास’ बनाने वाली कंपनी हूलीगन फिल्म्स लखनऊ को 30 लाख रुपए, फिल्म ‘मजाज-ए-गम-ए-दिल-क्या करूं’ बनाने वाली कंपनी ड्रीम मर्चेंट फिल्म्स अलीगढ़ को 22.55 लाख रुपए, फिल्म ‘इश्केरिया’ बनाने वाली कंपनी स्वर्प फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड मुंबई को 11.14 लाख रुपए, फिल्म ‘तलब’ बनाने वाली कंपनी बाबा इंटरटेनमेंट फिल्म्स पुणे को 21.53 लाख रुपए और फिल्म ‘बंधन’ बनाने वाली कंपनी सुनीता शिव क्रिएशन मुंबई को करीब 16 लाख रुपए दिए गए. सूचना का अधिकार के तहत समाजसेवी नूतन ठाकुर द्वारा पूछे गए सवाल पर प्रदेश सरकार ने भुगतान की यह आधिकारिक सूचना दी है.

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