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ड्रग वॉर की चपेट में आम आदमी

मैक्सिको की औद्योगिक राजधानी कहलाने वाला मोंटेरे शहर मस्ती में डूबा हुआ था. शहर में पैसे वालों की कमी नहीं है. लोग जुआघर में जुआ खेलने में मस्त थे. अचानक कुछ बंदूकधारी वहां घुस आए और ताबड़तोड़ गोलियां चलाने लगे. जुआघर में अफरातफरी मच गई. लोग इधर-उधर भागने लगे. चारों ओर चीख-पुकार मच गई. बंदूकधारियों ने जुआघर को आग के हवाले कर दिया. अचानक हुए इस हमले में 50 लोगों की मौत हो गई. शहर के मेयर ने मरने वालों की संख्या और अधिक होने की बात की. अचानक हुआ यह हमला सरकार के विरुद्ध कोई विद्रोह नहीं था. न यहां की आर्थिक स्थिति खराब है और न यहां मध्य पूर्व के देशों की तरह शासन के खिला़फ लोगों में कोई आक्रोश है. मैक्सिको की अर्थव्यवस्था अभी भी विश्व की तेरहवीं बड़ी अर्थव्यवस्था है और प्रति व्यक्ति आय के मामले में भी यह मध्य आय वाले देशों के समूह में शामिल है. दरअसल, यह हमला था ड्रग माफियाओं का. मैक्सिको में पिछले कुछ सालों से ड्रग वॉर चल रहा है.

मैक्सिको में तेज़ी से बढ़ रहा मादक द्रव्यों का व्यापार और उस पर क़ब्ज़े के लिए हो रहा संघर्ष न केवल इस देश, बल्कि पूरे विश्व के लिए खतरनाक है. ग़ौर करने वाली बात यह है कि आतंकवादी संगठनों को सबसे अधिक धन इसी व्यापार से मिलता है, जिसका उपयोग वे हथियार खरीदने और आतंकी गतिविधियां चलाने के लिए करते हैं. अत: एक वैश्विक नीति बनाने की आवश्यकता है, जिससे इस संगठित अपराध को रोका जा सके. आतंकवाद आज विश्व की सबसे बड़ी समस्या है, लेकिन इस समस्या से निपटने के लिए ज़रूरी है कि आतंकवादी संगठनों के आर्थिक आधार को ध्वस्त किया जाए.

मैक्सिको की सरकार मादक द्रव्यों की तस्करी और वर्चस्व की लड़ाई में हो रही मौतों से का़फी चिंतित है. सरकार इन तस्करों पर अंकुश लगाने में सफल नहीं हो पा रही है. यहां के लोग भी इस ड्रग वॉर से बहुत घबराए हुए हैं. माफियाओं के बीच चल रही इस जंग का शिकार आम आदमी बन रहा है. गोलीबारी में अक्सर निर्दोष लोग भी मारे जाते हैं. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि इस ड्रग वॉर में 2006 से अब तक 28,000 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि अन्य स्रोत इससे भी बड़े आंकड़े पेश करते हैं. उनके अनुसार, इस ड्रग वॉर में अब तक लगभग 35,000 हज़ार लोगों की जानें जा चुकी हैं. खुफिया विभाग के प्रमुख वॉल्डेस का कहना है कि राष्ट्रपति फिलिप कालडेरॉन के पद संभालने के बाद इन गिरोहों के साथ सुरक्षाबलों की 963 मुठभेड़ें हुईं. आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान प्रतिदिन एक मुठभेड़ दर्ज की गई. पुलिस और सेना ने मिलकर 84 हज़ार हथियार, 35 हजार वाहन और 40 करोड़ डॉलर से ज़्यादा धनराशि ज़ब्त की.

पुलिस का अनुमान है कि यह रकम नशीली दवाओं के व्यापार से कमाई गई थी. इससे इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है कि मैक्सिको में नशीली दवाओं का कारोबार कितनी तेज़ी से बढ़ रहा है. कुछ दिनों पूर्व सेना के गश्ती दल को एक ग़ैरक़ानूनी अफीम का खेत मिला. मैक्सिको के उत्तरी राज्य बाजा कैलिफोर्निया में स्थित यह खेत 1.2 वर्ग किलोमीटर यानी लगभग 300 एकड़ में फैला है. अफीम का इतना बड़ा खेत अभी तक इस देश में नहीं मिला था. इस खेत में उगाई जाने वाली अफीम की मार्केट वैल्यू लगभग 10 करोड़ पाउंड है. इस खेत को प्लास्टिक की चादर से ढक दिया गया था, ताकि इसे खोजी कैमरों की नज़र से बचाया जा सके. सरकार के लिए सबसे बड़ी परेशानी की बात यह है कि इतना बड़ा खेत तो मिल गया, लेकिन उसके मालिक का कोई अता-पता नहीं है. इसलिए पुलिस कोई गिरफ्तारी नहीं कर पाई. इससे ड्रग माफियाओं की ताक़त और पहुंच का अनुमान लगाया जा सकता है. इस ड्रग वॉर से मैक्सिको के लोग का़फी त्रस्त हैं. सड़क पर चलते हुए उन्हें हमेशा इस बात का डर सताता है कि कहीं किसी ओर से गोली न चल जाए. जुआघर में गोलीबारी और जेल में हुए संघर्ष से लोग का़फी घबरा गए हैं. नशीली दवाओं के तस्करों ने मीडियाकर्मियों को भी नहीं छोड़ा. कई पत्रकारों का अपहरण कर लिया गया. बीते जून माह में पत्रकार मिगुएल लोपेज, उनकी पत्नी और बेटे की हत्या कर दी गई. इस कारण नशीली दवाओं के तस्करों की रिपोर्टिंग करने से पत्रकार घबराने लगे हैं. यही नहीं, कुछ नेताओं को भी इस ड्रग वॉर का शिकार होना पड़ा. 2010 में 12 मेयरों की हत्या कर दी गई. तामुलिपास राज्य के गवर्नर पद के एक प्रत्याशी को भी मौत के घाट उतार दिया गया. पुलिस का कहना है कि यह हत्या भी नशीली दवाओं के तस्करों ने ही की. इससे सरकार की परेशानी बढ़ गई है. मैक्सिको के राष्ट्रपति फिलिपे काल्डेरान ने तो ड्रग माफियाओं के खिला़फ युद्ध की घोषणा कर दी, लेकिन फिर भी कोई विशेष परिणाम नहीं निकला.

आखिरकार इन तस्करों पर कैसे अंकुश लगाया जाए, सरकार को ड्रग माफियाओं से निपटने के लिए क्या करना चाहिए? इन सवालों पर मैक्सिको के खुफिया विभाग के प्रमुख गुइलेरमो वॉल्डेस का कहना है कि अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है. सरकार को काला धन स़फेद करने की प्रक्रिया रोकने के प्रयास करने होंगे और उन सरकारी संस्थाओं को मज़बूती प्रदान करनी होगी, जो सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के मामले में अभी भी कमज़ोर साबित हो रही हैं. तस्करों के पास हथियारों का ज़खीरा है, जो उन्हें पुलिस से लड़ने में मदद करता है. उनके पास का़फी धन है, जो सरकारी तंत्र को भ्रष्ट बना रहा है. सरकार को इन बातों पर ग़ौर करना चाहिए. मादक द्रव्यों की तस्करी एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है और इससे निबटने के लिए व्यापक सहयोग की आवश्यकता है. विश्व के कई नेताओं एवं विशेषज्ञों ने एक 19 सदस्यीय आयोग गठित किया है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान, अमेरिका के केंद्रीय बैंक के पूर्व चेयरमैन पॉल वॉकर, कोलंबिया के पूर्व राष्ट्रपति सीजर गैविरिया, ग्रीस के वर्तमान प्रधानमंत्री जार्ज पापेंद्रु, प्रसिद्ध लैतिन अमेरिकी लेखक कार्लोस फ्युएंतेस एवं मारियो लोसा, यूरोपीय संघ में विदेश नीति विभाग के पूर्व प्रमुख जैवियर सोलाना, पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री जॉर्ज शुल्ज के अलावा प्रसिद्ध उद्यमी रिचर्ड ब्रैनसन भी शामिल हैं.

इस आयोग ने एक रिपोर्ट पेश की है, जिसमें कहा गया है कि नशीली दवाओं के खिला़फ बनाई गई नीति विफल हो गई है, क्योंकि इससे संगठित अपराध को बढ़ावा मिला है, करदाताओं पर लाखों डॉलरों का बोझ पड़ा है और इस वजह से हज़ारों लोगों की जान चली गई. संयुक्त राष्ट्र के आकलन का हवाला देते हुए कहा गया है कि 1998 से 2008 के बीच दुनिया भर में अफीम युक्त मादक द्रव्यों की खपत में 35 फीसदी, कोकीन की खपत में 27 फीसदी और भांग की खपत में 8.5 फीसदी की वृद्धि हुई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि दमन की नीतियों के ज़रिए नशीली दवाओं की तस्करी समाप्त नहीं की जा सकती और न नशीली दवाओं के खिला़फ चल रही जंग जीती जा सकती है. इसके लिए अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जाना ज़रूरी है. रिपोर्ट में एक सुझाव दिया गया है कि नशा करने वाले लोगों को, जो किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते, उन्हें अपराधी ठहराने के स्थान पर दूसरे कानूनी विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए, जिससे एक तो नशीली दवाओं के कारण हो रहे संगठित अपराधों में कमी आएगी, साथ ही नशीली दवाएं लेने वालों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा सकेंगी, लेकिन इस रिपोर्ट को अमेरिका ने खारिज कर दिया. अमेरिका द्वारा खारिज किए जाने का मतलब है कि इस सुझाव को विफल मान लिया जाना, लेकिन अमेरिका खुद भी ऐसी कोई नीति नहीं बना रहा है, जिससे नशीली दवाओं के कारोबार पर रोक लगार्ई जा सके.

विश्व के सबसे ताक़तवर देश के पड़ोस में ही मादक द्रव्यों का कारोबार इतने बड़े पैमाने पर हो रहा है और वह कुछ नहीं कर रहा, तो अन्य क्षेत्रों में चल रहे इस धंधे के खिला़फ वह भला क्या कार्रवाई करेगा? हालांकि मैक्सिको के इस नशा व्यापार से अमेरिका को भी का़फी नुकसान हो रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक सर्वे के मुताबिक़, कोकीन और मेरिजुआना के इस्तेमाल में अमेरिका प्रथम स्थान पर है. 1970 के दशक से ही मैक्सिको के तस्कर अमेरिका में मेरिजुआना भेज रहे हैं. वे सड़क और समुद्र मार्ग, दोनों के माध्यम से मादक द्रव्यों की आपूर्ति करते हैं, लेकिन अभी तक अमेरिकी सरकार इसे रोकने के लिए कोई कड़ा कदम नहीं उठा सकी. अगर अमेरिका इसे गंभीरता से नहीं लेता है तो मैक्सिको के साथ-साथ उसे भी परेशानी झेलनी पड़ सकती है. मैक्सिको में तेज़ी से बढ़ रहा मादक द्रव्यों का व्यापार और उस पर क़ब्ज़े के लिए हो रहा संघर्ष न केवल इस देश, बल्कि पूरे विश्व के लिए खतरनाक है. ग़ौर करने वाली बात यह है कि आतंकवादी संगठनों को सबसे अधिक धन इसी व्यापार से मिलता है, जिसका उपयोग वे हथियार खरीदने और आतंकी गतिविधियां चलाने के लिए करते हैं. अत: एक वैश्विक नीति बनाने की आवश्यकता है, जिससे इस संगठित अपराध को रोका जा सके. आतंकवाद आज विश्व की सबसे बड़ी समस्या है, लेकिन इस समस्या से निपटने के लिए ज़रूरी है कि आतंकवादी संगठनों के आर्थिक आधार को ध्वस्त किया जाए. आतंकवाद के खिला़फ जिस प्रकार के वैश्विक प्रयास किए जा रहे हैं, उसी प्रकार के प्रयास मादक द्रव्यों की तस्करी खत्म करने के लिए भी करने होंगे, अन्यथा जो मैक्सिको में हो रहा है, उसे अन्य देशों तक फैलने में ज़्यादा व़क्त नहीं लगेगा.

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