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ऐसे पहचाने बोन कैंसर के लक्षण, सही ज्ञान से बच सकती है जान
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ऐसे पहचाने बोन कैंसर के लक्षण, सही ज्ञान से बच सकती है जान

bone cancer

bone cancer

नई दिल्ली, (राज लक्ष्मी मल्ल) : कैंसर की शुरुआत शरीर की आधारभूत इकाई यानि कोशिकाओं में बदलाव के कारण होती है. शरीर में पुरानी कोशिकाओं का टूटना और नई कोशिकाओं का बनाना एक सतत प्रक्रिया है. लेकिन जब कोशिकाओं के निर्माण की प्रक्रिया असामान्य हो जाती है ऐसे में कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती. इसी तरह का एक कैंसर है हड्डियों का कैंसर. हालांकि अभी तक हड्डियों के कैंसर के कारणों का पता नहीं लग सका है, लेकिन इसे फिर भी अनुवांशिक (जेनेटिक) कारणों और कारकों से जोड़कर देखा जाता है. हड्डियों का कैंसर आम तौर पर शरीर के एक हिस्से से शुरू हो कर शरीर के दुसरे भागों तक पहुंच जाता है.

बोन कैंसर के लक्षण : 

हड्डियों का कैंसर किसी भी उम्र के लोगों मसलन बच्चों बूढ़ों या नौजवान किसी को भी हो सकता है.  समय रहते इसका इलाज कराने के लिए इसके लक्षणों को प्रारंभिक अवस्था में ही पहचानना जरुरी है. जैसे-जैसे कैंसर कोशिकाएं शरीर में विकसित होती हैं उसी तरह शरीर में इसके लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं.

  • हड्डियों के कैंसर का सबसे सामान्य लक्षण हड्डियों में तोज दर्द होना है.
  • दर्द के साथ उस हिस्से में सूजन भी आनी शुरू होती है. दर्द में वक्त के साथ इज़ाफा होता है.
  • कैंसर के स्थान के ऊपरी हिस्से में त्वचा लाल रंग की होती है, वह हिस्सा शरीर के अन्य हिस्से की तुलना में ज्यादा गर्म होता है, उस हिस्से में थोडा सुन्नपन और सूजन होती है.
  • बोन ट्यूमर की वजह से अचानक बुखार आ जाता है व बुखार के दौरान पसीना भी आ सकता है. चक्कर आना, भूख कम लगना, वजन में गिरावट आना इसके अन्य लक्षण हैं.
  • वयस्कों में हड्डियों के कैंसर का पता तब चलता है जब मरीज को बार-बार हड्डियों के फ्रेक्चर होने की शिकायत होने लगती है. हड्डियों का कमजोर होना बोन कैंसर का भी एक लक्षण हो सकता है.
  • यदि आपकी हड्डियां कमजोर हैं तो जरुरी नहीं है कि आपको बोन कैंसर हो. ऐसा शरीर में कैल्शियम की कमी के कारण भी हो सकता है. इसे ऑस्ट्रियोपोरोसिस कहते हैं.
  • बोन डेंसिटी टेस्ट करवारकर इस तरह के वहम से बचा जा सकता है. हड्डी में किसी एक ही जगह पर बार-बार चोट लगने से हड्डी में धाव बन जाता है, उस पर ध्यान न देने पर भी उस स्थान पर कैंसर होने की संभावना होती है.

बोन कैंसर के प्रकार : 

प्राथमिक बोन कैंसर तीन प्रकार का होता है: ऑस्टियोसर्कोमा, कॉन्ड्रोसर्कोमा, इविंगसर्कोमा.

  1. ऑस्टियो सर्कोमा- यह बोन कैंसर का सबसे सामान्य प्रकार है. यह कैंसर आमतौर पर कूल्हे और कंधे व साथ ही घुटने के आसपास के हिस्सों में पाया जाता है. इस प्रकार के कैंसर से हर साल दस लाख लोगों में से 3-4 नए लोग इस तरह के कैंसर का शिकार होते हैं. हालांकि यह बच्चों को भी हो सकता है लेकिन बोन कैंसर का यह रूप आमतौर पर युवाओं में देखने को मिलता है. यह कैंसर महिलाओं के मुकाबले पुरूषों में अधिक पाया जाता है.
  2. कॉन्ड्रोसर्कोंमा – बोन कैंसर के प्रकारों में कॉन्ड्रो सार्कोंमा 40 से 70 वर्ष की उम्र के लोगों को सर्वार्धिक प्रभावित करता है. यह कैंसर भी कूल्हे और कंधे के आसपास अधिक होता है. बोन कैंसर का यह सामान्य प्रकार है. यह कैंसर हड्डियों से शुरू होकर शरीर के अन्य हिस्सों में फैलता है. इस कैंसर में सबसे अधिक दर्द जोड़ों में होता है.
  3. इविंगसरकॉमा – यह कैंसर कम उम्र के लोगों को होता है. यह 5 से 20 साल तक के लोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है. यह आमतौर पर हाथों, पैर, बाजू, पसलियों इत्यादि जगहों से आरंभ होता है.

 

 

 

बोन कैंसर का उपचार :

सर्जरीः सर्जरी करने से पहले ट्यूमर का आकार देखना जरूरी है. सर्जरी के दौरान ट्यूमर के सभी भाग व उसके आसपास के टिश्यू को निकाल दिया जाता है. कभी कभी जिस जगह पर कैंसर हुआ है उस अवयव को हटाना पड़ता है. सर्जरी के दौरान अगर संभव हो तो क्षतिग्रस्त हड्डियों को निकालकर उसकी जगह आर्टीफिशियल हड्डी लगना पड़ती है. यह बोन कैंसर का बहुत ही आम इलाज है.

कीमो थैरेपी चिकित्साः कीमोथेरेपी में कैंसर निवारक दवाओं के जरिए ट्यूमर को खत्म किया जाता है. दवाएं कैंसर सेल्स को बढ़ने व फैलने से रोकती है लेकिन यह स्वस्थ कोशिकाओं को भी प्रभावित करती है लेकिन समय के साथ यह कोशिकाएं ठीक हो जाती हैं. कीमोथेरेपी की वजह से भूख न लगना, मितली आना, वजन कम होना, चक्कर आना जैसी समस्या हो सकती हैं. आमतौर पर सर्जरी के पहले कीमोथेरेपी चिकित्सा की जाती है लेकिन कई बार सर्जरी के बाद भी यह चिकित्सा ट्यूमर को पूरी तरह से खत्म करने के लिए दी जाती है.

रेडियेशन थैरेपी उपचारः रेडियेशन थैरेपी में एक बड़ी मशीन के जरिए कैंसर सेल्स को खत्म किया जाता है. इससे निकलने वाले विकिरण का उपयोग ट्यूमर के आकार या रक्त संचार को कम करने के लिये किया जाता है क्योंकि ट्यूमर प्रभावित अंग में रक्त की आपूर्ति की मात्रा बहुत होती है. इसके परिणाम स्वरूप कैंसर बहुत तेजी से बढ़ रहा होता है। इस विधि का प्रयोग प्रभावित अंग में ऑपरेशन से पहले या सर्जरी के दौरान रक्त की आपूर्ति को कम करने के लिए किया जाता है.

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  • admin

    9261608155

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