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व्हाइट हाउस की काली कहानी

कुछ दिनों पहले नेट पर विदेशी अख़बारों को पढ़ रहा था. अचानक डेली मेल के पन्नों की सर्फिंग करते हुए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी की प्रेमिका और उनसे संबंधित लेख पर नज़र चली गई. लेख में जे एफ कैनेडी और व्हाइट हाउस की इंटर्न के बीच राष्ट्रपति भवन में ही पनपे प्रेम प्रसंग का ज़िक्र था. राष्ट्रपति महोदय के बेडरूम के कुछ अंतरंग प्रसंगों के साथ स्टोरी छपी थी. स्टोरी इस तरह लिखी गई थी कि पाठकों को न स़िर्फ बांध सके, बल्कि वह किताब पढ़ने को लेकर उनके मन में ललक पैदा हो. वहां स्टोरी पढ़ने के बाद मैंने नेट पर खोज प्रारंभ की तो एक अमेरिकी टेलीविज़न की वेबसाइट पर भी इससे ही जुड़ी स्टोरी छपी थी कि किस तरह राष्ट्रपति कैनेडी ने अपनी लिमोजीन भेजकर एक प्रेस इंटर्न को होटल में इश्क़ फरमाने के लिए बुलवाया. एक और अमेरिकी अख़बार में छपा कि तक़रीबन आधी सदी के बाद खुला कैनेडी का एक और प्रेम प्रसंग.

मिमी चार दशकों तक उस वादे को निभाती हैं. उस पूरे प्रसंग को मिमी ने बेहद सधे तरीक़े से लिखा है. यहां आकर यह नहीं लगता कि यह लेखिका की पहली किताब है, न इस किताब में सेक्स प्रसंगों की भरमार है. जहां भी उसकी चर्चा है, वह बेहद संजीदे अंदाज़ में है. हिंदी के कुछ लेखकों को यह देखना चाहिए कि किस तरह सेक्स प्रसंगों को बग़ैर अश्लील बनाए भी लिखा जा सकता है. देखना तो हिंदी के प्रकाशकों को भी चाहिए कि किस तरह पुस्तक की बिक्री बढ़ाने के लिए उसके चुनिंदा अंश सनसनी़खेज़ तरीक़े से अख़बारों में छपवाए जाते हैं.

लब्बोलुआब यह कि जनवरी एवं फरवरी में अमेरिका से लेकर इंग्लैंड और पूरे यूरोप के  अख़बारों एवं तमाम टेलीविज़न चैनलों की वेबसाइट्‌स पर कैनेडी की इस प्रेम कथा की चर्चा थी. हर जगह स्टोरी को सनसनी़ख़ेज तरीक़े से प्रस्तुत किया गया था. सेक्स प्रसंगों को इस तरह पेश किया गया था कि जब पूरा अमेरिका क्यूबा मिसाइल संकट के दौर से जूझ रहा था तो अमेरिका का राष्ट्रपति व्हाइट हाउस की प्रेस इंटर्न के साथ स्वीमिंग पूल और अपनी पत्नी के बेडरूम में रंगरेलियां मना रहा था. मैं भी फौरन अपनी पसंदीदा वेबसाइट फिल्पकॉर्ट पर गया और वहां इस किताब की तलाश की. पच्चीस डॉलर की किताब छूट के बाद एक हज़ार पचपन रुपये में उपलब्ध थी. इस किताब के बारे में विदेशी अख़बारों में इतना छप चुका था कि मेरे अंदर भी इसे पढ़ने की इच्छा प्रबल हो गई. लिहाज़ा फिल्पकॉर्ट पर ऑर्डर कर दिया. चूंकि यह किताब इंपोर्टेड एडिशन थी, इस वजह से पांच दिनों के बाद मुझे मिली. तक़रीबन दो सौ पन्नों की बेहतरीन प्रोडक्शन वाली किताब. इसका पूरा नाम है-वंस अपॉन ए सीक्रेट, माई अफेयर विद प्रेसीडेंट जॉन एफ कैनेडी एंड इट्‌स ऑफ्टरमाथ और लेखिका हैं मिमी अल्फर्ड. प्रकाशक हैं रैंडम हाउस, न्यूयॉर्क. बैक कवर पर लेखिका की हाल में ली हुई तस्वीर और फ्रंट कवर पर उनकी युवावस्था की ऐसी तस्वीर लगी है, जिसमें उनकी मुस्कुराहट दिखाई दे रही है, चेहरा नहीं. बेहद सुरुचिपूर्ण कवर.

मैंने हिंदी में कई ख़ूबसूरत लेखिकाओं एवं सुदर्शन लेखकों को उनकी किताबों पर उनकी ख़ुद की तस्वीर छपवाने की सलाह दी, लेकिन किसी ने मज़ाक़ में उड़ा दिया तो किसी को प्रकाशक ने मना कर दिया. एक मित्र ने तो मुझसे कहा कि अभी वह इतने बड़े लेखक नहीं हुए हैं कि किताब के कवर पर उनकी तस्वीर छपे. लेकिन जब मैंने मिमी की किताब देखी तो मुझे लगा कि कवर पर ख़ुद की तस्वीर लगाने के लिए बड़ा होना ज़रूरी नहीं है. मिमी की यह पहली किताब है और वह कोई लेखिका भी नहीं हैं, फिर भी पूरी किताब में तीन जगह पूरे पेज पर उनकी तस्वीर लगी है. मुझे तो कई बार यह लगता है कि हिंदी के लेखकों एवं प्रकाशकों में ख़ुद को लेकर विश्वास की कमी है. कवर पर लेखक या लेखिका की तस्वीर न छपने का मुझे कोई कारण नज़र नहीं आता. चूंकि सालों से यही परंपरा रही है, इसलिए इसे तोड़ने का जोखिम कोई लेना नहीं चाहता.

यह तो अवांतर प्रसंग है. मैं एक बार फिर से किताब की ओर लौटता हूं. दरअसल, अमेरिका में जॉन एफ कैनेडी के प्रेम प्रसंगों को लेकर किताब छापना एक कुटीर उद्योग की तरह हो गया है. हर साल कैनेडी और उनकी सेक्सुअल लाइफ या फिर उनकी प्रेम कथाओं को लेकर किताबें छपती हैं और फिर चर्चित होकर, बिक कर साहित्य के परिदृश्य से ग़ायब हो जाती हैं. इस किताब की लेखिका मिमी ने स्वीकार किया है, जून 1962 से लेकर नवंबर 1963 तक प्रेसीडेंट कैनेडी से मेरे सेक्स संबंध रहे और पिछले चालीस सालों से मैंने यह रहस्य अपने सीने में दबाए रखा, लेकिन हाल की मीडिया रिपोर्ट के बाद मैंने अपने बच्चों एवं परिवार के साथ इस राज़ को साझा किया. मेरा पूरा परिवार मेरे साथ खड़ा है. इस किताब को पढ़ने के बाद एक तस्वीर जो सा़फ तौर पर उभर कर सामने आती है, वह यह है कि जॉन एफ कैनेडी की कम उम्र लड़कियों में रुचि थी और दूसरी जो भयावह तस्वीर सामने आती है, जिसे मिमी ने रेखांकित नहीं किया है, वह यह कि कैनेडी के कार्यकाल में उनके कुछ दोस्त उनकी सेक्सुअल डिजायर का खास तौर पर ख्याल रखते थे और उन्हें लड़कियां उपलब्ध हों, इसके लिए प्रयासरत भी रहते थे. दौरों के समय भी कैनेडी के लिए लड़कियों का इंतज़ाम यही गैंग करता था. कैनेडी का स्पेशल असिस्टेंट डेव पॉवर्स इसके केंद्र में था और दो लड़कियां उसकी मदद किया करती थीं. यूं तो डेव अमेरिका के राष्ट्रपति के स्पेशल असिस्टेंट के पद पर तैनात था, लेकिन देश भर में वह प्रथम मित्र के रूप में जाना जाता था. जब मिमी व्हाइट हाउस के प्रेस कार्यालय में इंटर्न के तौर पर आईं तो उन्होंने कोई आवेदन नहीं किया था, उन्हें तो राष्ट्रपति भवन से बुलावा आया था. दरअसल, वह कैनेडी के राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी पत्नी से इंटरव्यू करने आई थीं, क्योंकि जिस स्कूल में मिमी पढ़ रही थीं, वहीं से कैनेडी की पत्नी ने भी स्कूलिंग की थी. उसी व़क्त मिमी इस गैंग की नज़र में आ गई थीं. बाद में राष्ट्रपति भवन के बुलावे पर उन्हें प्रेस कार्यालय में इंटर्न के तौर पर ज्वाइन कराया गया. एक दिन अचानक डेव ने उन्हें फोन करके राष्ट्रपति भवन के स्वीमिंग पूल में दोपहर की तैराकी का आनंद लेने का निमंत्रण दिया, जिसे मिमी ने स्वीकार कर लिया.

उसी स्वीमिंग पूल में उनकी और कैनेडी की पहली मुलाक़ात हुई. उसके बाद फिर से डेव ने उन्हें राष्ट्रपति भवन घूमने का न्योता दिया, लेकिन यहां कैनेडी उसे व्हाइट हाउस घुमाने के बहाने अपने बेडरूम में ले गए और उनके साथ शारीरिक संबंध बनाए. लेखिका ख़ुद इस बात को लेकर भ्रम में हैं कि कैनेडी ने उनके साथ ज़बरदस्ती संबंध बनाए या फिर उनकी भी रज़ामंदी थी. बेहद सा़फगोई से उन्होंने यह स्वीकार भी किया है. अट्ठारह साल की उम्र में पैंतालीस साल के पुरुष से शारीरिक संबंध बनाने का बेहद ही शालीन, लेकिन सेंसुअल तरीक़े से वर्णन किया गया है. वर्णन में कहीं कोई अश्लीलता नहीं है. पहले सेक्सुअल एनकाउंटर के बाद एक लड़की की मन:स्थिति का जो चित्रण मिमी ने किया है, वह पठनीय है. उसके मन में यह द्वंद्व चलता है कि अपने से दोगुनी उम्र के पुरुष से संबंध बनाना कहां तक उचित है, वहीं मन के कोने-अंतरे में यह बात भी है कि दुनिया के सबसे ताक़तवर पुरुष से उसके ताल्लुक़ात हैं, वह उसका प्रेमी है. इस किताब में कैनेडी की वह छवि और मज़बूत होती है कि वह महिलाओं को उपभोग की वस्तु समझते थे. इसे अंग्रेजी में सेक्सुअल प्लेजर के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला औज़ार भी कह सकते हैं. मिमी के साथ ही उन्होंने शारीरिक संबंध ही नहीं बनाए, बल्कि अपने सामने अपने स्पेशल असिस्टेंट डेव पॉवर्स के साथ भी सेक्स एक्ट परफॉर्म करने के लिए मजबूर किया. अगली गर्मी में कैनेडी ने फिर से यही काम अपने भाई के लिए करने को कहा, जिसे मिमी ने ठुकरा दिया. एक पार्टी में उन्होंने ज़बरदस्ती मिमी को ड्रग्स लेने को मजबूर किया. सेक्स प्रसंगों के अलावा भी मिमी की जो दास्तां इस किताब में है, उससे एक लड़की के मनोविज्ञान को समझा जा सकता है कि एक तऱफ तो वह कैनेडी से सेक्सुअल रिलेशनशिप में है, वहीं दूसरी तऱफ अपने मित्र से शादी भी तय कर रही है.

जिस दिन कैनेडी की हत्या होती है, उस दिन मिमी अपने मंगेतर के साथ होती हैं. का़फी देर तक सदमे में रहने के बाद वह अपने मंगेतर को यह बताती हैं कि उनके और कैनेडी के बीच संबंध थे. उनका मंगेतर यह सुनकर दूसरे कमरे में चला जाता है, लेकिन अचानक से आकर मिमी पर टूट पड़ता है और उनके साथ शारीरिक संबंध बनाता है. उसके बाद वह मिमी से वादा करवाता है कि वह कैनेडी के साथ अपने संबंधों के बारे में किसी को नहीं बताएंगी. मिमी चार दशकों तक उस वादे को निभाती हैं. उस पूरे प्रसंग को मिमी ने बेहद सधे तरीक़े से लिखा है. यहां आकर यह नहीं लगता कि यह लेखिका की पहली किताब है, न इस किताब में सेक्स प्रसंगों की भरमार है. जहां भी उसकी चर्चा है, वह बेहद संजीदे अंदाज़ में है. हिंदी के कुछ लेखकों को यह देखना चाहिए कि किस तरह सेक्स प्रसंगों को बग़ैर अश्लील बनाए भी लिखा जा सकता है. देखना तो हिंदी के प्रकाशकों को भी चाहिए कि किस तरह पुस्तक की बिक्री बढ़ाने के लिए उसके चुनिंदा अंश सनसनी़खेज़ तरीक़े से अख़बारों में छपवाए जाते हैं.

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