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बीते साल के न्यायिक फै़सले : कुछ अच्छे तो कुछ बुरे भी

बीते साल के न्यायिक फै़सले : कुछ अच्छे तो कुछ बुरे भी

अगर न्यायिक इतिहास की दृष्टि से देखें तो बीते साल 2009 को हम मील के पत्थर के तौर पर याद कर सकते हैं. विगत वर्ष की कुछ न्यायिक प्रगतियों और फैसलों की बात करें तो आने वाले वर्षों में वे...

राजनीतिक दलों के दावों की पोल खाली पंचायत चुनावों में एक लाख पदों के लिए चुनाव नहीं

राजनीतिक दलों के दावों की पोल खाली पंचायत चुनावों में एक लाख पदों के लिए चुनाव नहीं

देश के विभिन्न राजनीतिक दल गांव-गांव तक अपनी पहुंच बताते हैं. इस आधार पर पार्टी का व्यापक जनाधार होने की बात करते हैं. लेकिन, क्या यह हक़ीक़त है? सच कहें तो उनके दावों को पूरी तरह से सही नहीं ठहराया...

रुचिका प्रकरणः अपराधी को देर से नाममात्र की सज़ा

रुचिका प्रकरणः अपराधी को देर से नाममात्र की सज़ा

रुचिका गिरहोत्रा के साथ अभद्रता, जिसे बाद में जिंदगी समाप्त करने को मजबूर होना पड़ा था, के मामले में हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक एस पी एस राठौर को मिली छह माह के कारावास की सज़ा के बारे में बस...

वेश्यावृत्ति वैध होनी चाहिए!

वेश्यावृत्ति वैध होनी चाहिए!

उच्चतम न्यायालय ने अपनी एक टिप्पणी में कहा कि महिलाओं की तस्करी रोकने की दिशा में सेक्स व्यापार को क़ानूनी मान्यता देना एक बेहतर विकल्प हो सकता है. इससे यौनकर्मियों के पुनर्वास में भी मदद मिलेगी. एक ग़ैर सरकारी संगठन...

यौन पेशे को कानूनी मान्यता देना घातक होगा

यौन पेशे को कानूनी मान्यता देना घातक होगा

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने ही ओलेगा तेलिस बनाम बंबई नगर निगम मामले (1985 एसएससी-3ए 535) में यह फैसला सुनाया था कि कोई भी व्यक्ति जीविका के साधन के रूप में जुआ या वेश्यावृत्ति जैसे अवैध व अनैतिक पेशे का सहारा...

रक्षक से भक्षक बन गई यूपी पुलिस

रक्षक से भक्षक बन गई यूपी पुलिस

कुछ वर्ष पहले वाराणसी में एक डिप्टी एसपी शैलेंद्र सिंह ने मा़फियाओं से पुलिस की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्ती़फा दे दिया था. विभाग की कलई खोलने वाले इस पुलिस अधिकारी को राजधानी में देर रात...

फर्जी एनकाउंटर के आरोप में दारोगा जेल गए

फर्जी एनकाउंटर के आरोप में दारोगा जेल गए

इस प्रकरण में मुख्य गुनहगार के रूप में दारोगा जी डी भट्‌ट को मीडिया ने चिन्हित किया था, जिसे जेल भेजकर सीबीआई ने जनता में अपना विश्वास पुख्ता कर लिया है

जैसी करनी, वैसी भरनी

जैसी करनी, वैसी भरनी

भारत के संसदीय इतिहास में यह पहला मौक़ा था, जब अदालत ने किसी राज्य सरकार को चेताया हो कि वह आग से न खेलें. बार-बार की अदालती फटकार ने बसपा सरकार को हिलाकर रख दिया है. 4 अक्टूबर को स्मारकों...

आरक्षण में योग्यता बनाम योग्यता में आरक्षण

आरक्षण में योग्यता बनाम योग्यता में आरक्षण

शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण हमेशा से विवादास्पद मुद्दा रहा है. कोई भी इसे समाज और देश में व्याप्त विषमताओं के समाधान के तौर पर नहीं देखता. वैसे आरक्षण हमेशा से बहस का विषय रहा है. यह एक ऐसा मुद्दा...

समय की मांग हैं न्यायिक सुधार

समय की मांग हैं न्यायिक सुधार

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने ख़ुद की संपत्ति को सार्वजनिक करने की घोषणा को सर्वसम्मति से अपनाया. उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश एक सरकारी अधिकारी हैं और उनका कार्यालय सूचना अधिकार अधिनयम...

सूचना के अधिकार को मज़बूती देनी होगी

सूचना के अधिकार को मज़बूती देनी होगी

अक्टूबर 2005 में सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) लागू हुआ था. उस घटना को तीन साल से ज़्यादा हो गए हैं. इसके लागू होने के कुछ ही दिनों के अंदर लोग यह भी आशंका व्यक्त करने लगे कि इस अधिनियम...

मानवाधिकार और राष्ट्रों की संप्रभुता

मानवाधिकार और राष्ट्रों की संप्रभुता

आज मानवाधिकार और उनका पालन या उल्लंघन वैश्विक महत्ता रखता है और सभी देश इनकीअहमियत से वाक़ि़फ हैं. हालांकि समस्या तब होती है, जब वैश्विक मानवाधिकारों के पालन से किसी देश की संप्रभुता से टकराव की स्थिति पैदा होती है.

आर के आनंद मामला:न्यायिक जवाबदेही का नया युग

आर के आनंद मामला:न्यायिक जवाबदेही का नया युग

न्यायिक क्षेत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता-ख़ास तौर पर जजों का अपनी संपत्ति की घोषणा करना-आज बहस का एक अहम मसला है. इस मसले पर कई तरह के विचार आए हैं. इस मामले में माननीय मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में न्यायपालिका...

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