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दलितों की ज़मीन ह़डप रहे हैं बसपा नेता

दलितों की ज़मीन ह़डप रहे हैं बसपा नेता

उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के सियासतदारों के काले कारनामे थमने का नाम नहीं ले रहा है. विंध्य क्षेत्र के भूमिहीन दलितों और आदिवासियों के अधिकारों की राजनीति करके अपनी दुकानें चमकाने वाले रहनुमा अब ख़ुद खुलेआम लूटखसोट पर आमादा हैं. इस बार तीन विधायकों समेत आधा दज़र्र्न बसपा नेताओं की काली करतूतें सामने आई हैं, जिन्होंने असहाय दलितों की ज़मीन पर अपनी नीयत ख़राब कर दी है.

राजगढ़ से विधायक अनिल कुमार मौर्या 2006 के हवाला ऑपरेटर कांड में पूरे देश में चर्चित हो चुके हैं. मौर्या ने बीते लोकसभा चुनाव में मिर्जापुर संसदीय सीट से बसपा के टिकट पर हाथ आजमाया था, लेकिन हार गए. हवाला के ज़रिए सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगा चुके बसपा विधायक मौर्या ने इस बार लाखों रुपए की स्टांप चोरी को अंजाम दिया है. साथ ही वन विभाग को करोड़ों रुपए का चूना लगाने की साज़िश रच रहे हैं. विधायक मौर्या ने राबटर्‌‌सगंज तहसील अंतर्गत विजयगढ़ परगना के सिलहट गांव में अपने भतीजों संदीप कुमार मौर्या व मधुकर मौर्या के नाम ऐसी ज़मीन ख़रीदी, जिस पर वन विभाग के करोड़ों रुपए के साखू, महुआ, कहु, पियार, आसन, आंवला और बरगद आदि के पेड़ हैं. मौर्या के भतीजों ने उक्त विवादित ज़मीन पनिकपकला निवासी चंद्रभूषण सिंह से ख़रीदी है.

विधायक मौर्या के भतीजों द्वारा ख़रीदी गई 14.06 हेक्टेयर  (आराजी संख्या 66 मी0) भूमि 1960 के सर्वे सेटलमेंट के दौरान वन विभाग की ज़मीन थी. वर्ष 1997-98 के दौरान हुए सर्वे-चकबंदी में भू-राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से उक्त भूमि पनिकपकला निवासी चंद्रभूषण सिंह के नाम दर्ज़ हो गई, जबकि पूरी भूमि पर घना जंगल है.

चंद्रभूषण सिंह ने आराजी संख्या 66 मी. की 14.06 हेक्टेयर भूमि 11 दिसंबर, 2008 को विधायक मौर्या के भतीजों संदीप व मधुकर को बेच दी. भूमि का बैनामा पेड़ व सड़क आदि तथ्यों को छुपाकर कराया गया, जिससे शासन को स्टांप शुल्क के रूप में लाखों रुपये की क्षति हुई. भूमि का बैनामा होते ही विधायक मौर्या और उनके लोग पेड़ों को कटवाने लगे. इस दौरान वन विभाग और ज़िला प्रशासन सोता रहा.

क्षेत्रीय लोगों द्वारा विरोध करने पर वन विभाग के अधिकारियों की नींद टूटी और उन्होंने विवादित पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी. रामगढ़ वन प्रभाग के वन रेंज अधिकारी आर के प्रेमी का कहना है कि आराजी संख्या-66 की भूमि वन विभाग की है. विवादित भूमि के संदर्भ में धारा-4 की कार्रवाई पूरी की जा चुकी है और धारा-20 की कार्रवाई के लिए रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है. शासन की ओर से धारा-20 की कार्रवाई में हो रही देरी को लोग बसपा विधायक की ऊंची पहुंच से जोड़कर देख रहे हैं. अब बात करते हैं विधानसभा सीट राबटर्‌‌सगंज से बसपा विधायक सत्यनारायण जैसल की. जैसल पार्टी के मंडल संयोजक रह चुके हैं और मायावती के ख़ास बताए जाते हैं. चुर्क निवासी विधायक जैसल राबटर्‌‌सगंज के मुसही गांव निवासी दलित अशोक कुमार का हक़ छीनने की कोशिश कर रहे हैं. जैसल ने अशोक कुमार के चाचा स्व. चंद्रदेव प्रसाद नागर की कई बीघा ज़मीन ़फर्ज़ी दस्तावेज़ों के आधार पर अपनी पत्नी के नाम बैनामा करा ली और अब वह उसे ज़मीन से बेदख़ल कर रहे हैं. विधायक जैसल ने जिस ज़मीन का बैनामा कराया है, वह विवादित है और उसे लेकर एक मुक़दमा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सोनभद्र की अदालत में विचाराधीन है. अशोक के चाचा चंद्रदेव प्रसाद गोंडा ज़िले में कस्टम अधीक्षक थे, जिनकी शादी 10 साल पहले बलिया के चेतन किशोर गांव निवासी परीखाराम की पुत्री कंचन से हुई थी. कुछ समय बाद दोनों के बीच विवाद हो गया और कंचन अपने मायके चली गई. बाद में उसने बलिया में ही चरौवा गांव निवासी बेचू से दूसरी शादी कर ली.

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उधर 14 जनवरी, 2003 को कस्टम अधीक्षक चंद्रदेव प्रसाद का शव रेलवे ट्रैक पर पाया गया. बलिया के गौरा गांव निवासी विश्राम की पुत्री पुष्पा उर्फ चिलरी शव को लेकर मुसही आई और उसने ख़ुद को कंचन बताया. परिजनों ने शव का दाह संस्कार कर दिया. पुष्पा ने कंचन बनकर कस्टम अधीक्षक नागर की 10 बीघा 09 बिस्वा (आराजी संख्या-356मी0 व 357मी0) भूमि 24 मार्च, 2007 को अपने नाम करा ली. अशोक ने अपने चाचा नागर की मृत्यु केपहले की वसीयत को आधार बनाकर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सोनभद्र की अदालत में मुक़दमा दाख़िल किया. कोर्ट ने सबूतों के आधार पर गत 24 अप्रैल को राबटर्‌‌सगंज पुलिस को आई पी सी की धारा 419, 420, 467, 468 के तहत प्राथमिकी दर्ज़ कर जांच करने का आदेश दिया है. कोर्ट के आदेश के बावजूद बसपा विधायक जैसल ने 17 जून, 2009 को पुष्पा उर्फ चिलरी उर्फ कंचन से आराजी संख्या 357 मी0 की 2.023 हेक्टेयर भूमि का बैनामा अपनी पत्नी मीरा कुमारी के नाम करा लिया. अगले दिन यानी 18 जून, 2009 को जैसल ने शेष बचे आराजी संख्या-357 मी. की 0.644 हेक्टेयर भूमि का बैनामा भी दल श्रृंगार मेमोरियल शिक्षा समिति, रौंप, सोनभद्र की प्रबंधक/सचिव मीरा कुमारी के नाम पुष्पा उर्फ कंचन से करा लिया. बैनामा कराने के बाद विधायक जैसल और उनके लोग अशोक को ज़मीन से बेदख़ल करने लगे. अशोक ने मामले की शिकायत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष, मुख्यमंत्री व पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश शासन, मंडलायुक्त व पुलिस उप महानिरीक्षक विंधायचल समेत ज़िलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक सोनभद्र से की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.

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ज़िला प्रशासन की उदासीनता और विधायक से मिल रही धमकियों से सहमा अशोक न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है. राबटर्‌‌सगंज के पूर्व सपा विधायक एवं वर्तमान बसपा नेता परमेश्वर दयाल भी एक दलित की ज़मीन को हड़पने की कोशिश कर रहे हैं. पूर्व विधायक दयाल राबटर्‌‌सगंज नगर स्थित एक सरकारी भवन पर अभी भी क़ब्ज़ा जमाए हुए हैं. दयाल ने अपने कार्यकाल के दौरान 16 नवंबर, 2006 को राबटर्‌‌सगंज तहसील के कम्हारी गांव में फर्ज़ी दस्तावेजों के आधार पर अपनी पत्नी गंगाजली के नाम 0.491 हेक्टेयर (आराजी संख्या-156मी.) भूमि का बैनामा दुखंती से कराया था.

पूर्व विधायक की पत्नी ने जिस ज़मीन का बैनामा कराया है, वह पहले राबटर्‌‌सगंज (टाड़ के डौर) निवासी दलित बलई उर्फ महादेव की पत्नी विफनी देवी के नाम थी. विफनी की एक पुत्री फुलवा देवी है जिसकी शादी चंदौली के चकिया तहसील के जनकपुर गांव निवासी गोकुल प्रसाद से हुई थी. विफनी देवी का दुखंती से कोई संबंध नहीं था.

विफनी की मौत के बाद उसी के गांव के दुखंती ने 20 मई 1970 को लिखी गई वसीयत के आधार पर विफनी देवी की एक बीघा 18 बिस्वा 15 धूर ज़मीन  31 मार्च 1986 को अपने नाम करा ली. दुखंती ने 16 नवंबर, 2006 को आराजी संख्या-156मी. की ज़मीन पूर्व विधायक दयाल की पत्नी गंगाजली को बेच दी. ज़मीन का बैनामा होते ही पूर्व विधायक और उनके आदमियों ने फुलवा देवी को ज़मीन से बेदख़ल कर दिया. फुलवा देवी के पति गोकुल प्रसाद ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सोनभद्र की अदालत में मुक़दमा संख्या 1938 दाख़िल कर न्याय की गुहार लगाई. कोर्ट ने सबूतों के आधार पर पूर्व विधायक परमेश्वर दयाल, गंगाजली देवी, दुखंती, विमलेश और रघुनाथ प्रसाद को आईपीसी की धारा 147, 467, 468, 420, 471 और 120बी का आरोपी पाते हुए तलब किया है. अति नक्सल प्रभावित विधानसभा सीट दुद्धी के बसपा विधायक सी.एम. प्रसाद भी ज़मीन के गोरखधंधे में शामिल हैं.

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पूर्व में पुलिस अधिकारी रहे प्रसाद ने दुद्धी नगर पंचायत में को-आपरेटिव बैंक की दो चौथाई भूमि पर अवैध रूप से क़ब्ज़ा कर रखा है. विवादित भूखंड में बसपा विधायक प्रसाद एक चौथाई भाग के मालिक हैं, शेष तीन चौथाई भूमि का मालिक को-आपरेटिव बैंक है.बावजूद इसके, बसपा विधायक प्रसाद विवादित भूखंड के तीन चौथाई भाग पर क़ब्ज़ा किए हुए ह़ै  सूबे में पार्टी की सरकार होने के कारण प्रशासन भी चुप्पी साधे हुए है. विंध्य क्षेत्र में बसपा के छुटभैया नेता भी किसी से कम नहीं हैं. राबटर्‌‌सगंज तहसील की ग्राम सभा बहुअरा में बसपा नेता सुखराम भारती और श्याम जी कुशवाहा का क़हर एक दलित महिला पर जारी है. दोनों बसपा नेता अब भूमिहीन दलित महिला के घर को गिराकर कर उसे खुले आसमान के नीचे सोने को मज़बूर कर रहे है. पूर्व में भी बहुअरा निवासी बसपा नेताओं बनवारी, श्याम सुंदर कुशवाहा और बलवंत ने दलित रामनरेश भारती की 0.132 हेक्टेयर भूमि का फर्ज़ी बैनामा कराया था. रामनरेश ने ज़िला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात वाला ही रहा.

इसके बाद रामनरेश ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में मुक़दमा दाख़िल किया. कोर्ट ने आईपीसी की धारा 323, 504, 506, 420, 467, 468 व 120बी का आरोपी पाते हुए तीनों पर प्राथमिकी दर्ज़ कर पुलिस को जांच करने का आदेश दिया. राबटर्‌‌सगंज के ब्लॉक प्रमुख एवं बसपा नेता कमलाकांत पांडेय ने भी  लोक निर्माण विभाग की भूमि पर अतिक्रमण कर मकान बनवा रखा है.

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