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दिल्‍ली का बाबूः विशेष सुरक्षा
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दिल्‍ली का बाबूः विशेष सुरक्षा

कुछ सालों में दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले पूर्वोत्तर भारत के विद्यार्थियों के साथ नस्लीय भेदभाव के कई मामले सामने आए हैं. दिल्ली और आसपास पढ़ने या नौकरी करने के लिए आने वाले पूर्वोत्तर भारत के लोगों को इस बात की भी शिकायत रहती है कि राजधानी में उनके क्षेत्र के बहुत कम अधिकारी हैं, इसलिए उनकी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जाता. हाल-फिलहाल में एक विद्यार्थी ने गुड़गांव में आत्महत्या कर ली. कहा जा रहा है कि उसके साथ भी भेदभाव किया गया. ऐसी खबरें देश के दूसरे राज्यों से भी आ रही हैं. इस तरह की घटनाओं के बाद सरकार ने इन मुद्दों को तवज्जो देना शुरू कर दिया है. पहली बार पूर्वोत्तर भारत के पांच आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति दिल्ली पुलिस में की गई है. सूत्रों के अनुसार, 23 आईपीएस अधिकारियों को कुछ समय पहले ही दिल्ली से बाहर भेजा गया है. लगता है, इन अधिकारियों को दिल्ली से बाहर भेजने की मुख्य वजह यही रही होगी. जिन पांच आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति दिल्ली में की गई है, वे हैं मिजोरम के जॉन नेहलई, अरुणाचल प्रदेश के किम कमिंग, नबाम गूंटे, अपूर्बितिन एवं एल एन रंगचल. उम्मीद की जा रही है कि दिल्ली में इन अधिकारियों की नियुक्ति के बाद पूर्वोत्तर भारत के विद्यार्थियों की हिम्मत बढ़ेगी और उन्हें भेदभाव का शिकार नहीं होना पड़ेगा.

यूटीआई को सीईओ का इंतजार

यूटीआई के नए सीईओ की तलाश जारी है. पिछले साल यूटीआई के सीईओ यू के सिन्हा को सेबी का प्रमुख बनाया गया था, तबसे लेकर आज तक यूटीआई में सीईओ की नियुक्ति नहीं हो सकी. सूत्रों का कहना है कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी जितेश खोसला को इस पद पर नियुक्त करने के लिए यह देर की गई. जितेश खोसला पहले वित्त मंत्रालय में काम कर चुके हैं और उन्हें वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की सलाहकार ओमिता पाल का समर्थन भी हासिल है, लेकिन विदेशी संस्थागत निवेशकों ने जितेश खोसला का विरोध किया था और उनके सीईओ बनने के बाद समस्याएं बढ़ सकती थीं, इसलिए खोसला ने इस दौड़ से बाहर रहने की सोची है. अब हो सकता है कि जल्दी ही यूटीआई के सीईओ के पद पर किसी की नियुक्ति हो जाए.

विशिष्ट क्लब

वर्षों से आईएएस कैडर के अधिकारियों का दबदबा रहा है, जिसे दूसरी अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी पसंद नहीं करते. अब आईपीएस अधिकारी भी अपना दायरा बढ़ाना शुरू कर रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, सीबीआई अब आईपीएस अधिकारियों का एक विशेष क्लब बनाने की योजना बना रही है. स्वाभाविक है कि इससे सीबीआई में काम कर रहे गैर आईपीएस अधिकारी खुश नहीं हैं. सीबीआई सुप्रिटेंडेंट ऑफ पुलिस के दस पद आईपीएस अधिकारियों को सौंपने जा रही है. साथ ही वह डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस की संख्या बढ़ाना चाहती है और वहां पर भी आईपीएस अधिकारियों को लाया जाना है. सूत्रों का कहना है कि सीबीआई निदेशक ए पी सिंह ने कार्मिक विभाग को इस परिवर्तन के बारे में लिखा है. इससे गैर आईपीएस अधिकारी नाराज हैं, क्योंकि कुछ गैर आईपीएस अधिकारियों को उम्मीद थी कि उनकी प्रोन्नति एसपी या एसएसपी रैंक पर हो जाएगी, लेकिन वे नए फैसले से निराश हैं. उन्हें लग रहा है कि उनकी प्रोन्नति अधर में लटक जाएगी.

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