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दिल्‍ली का बाबूः बाबुओं के बचाव में शीला

दिल्‍ली का बाबूः बाबुओं के बचाव में शीला

केंद्र सरकार की मनमानी ने दिल्ली सरकार को परेशान कर दिया है. इसमें बाबुओं के तबादले से जुड़े मामले भी शामिल हैं. हाल में दिल्ली सरकार के चार बाबुओं के तबादले से तो ऐसा ही लगा. ये चारों बाबू का़फी महत्वपूर्ण पदों पर थे. इससे मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का़फी परेशान हो गईं. सूत्रों के मुताबिक़, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रमेश नेगी, के के शर्मा, आर के वर्मा एवं जे श्रीवास्तव के तबादले की भनक शीला दीक्षित को भी पहले से नहीं थी. उन्होंने इस पर कहा कि ये तबादले मनमाने ढंग से किए गए. लेकिन शीला दीक्षित की गृहमंत्री पी चिदंबरम से हुई बातचीत के बाद लगता है कि मुख्यमंत्री ने चिदंबरम को इस बात के लिए मना लिया कि इनमें से कुछ बाबुओं के तबादले रोक दिए जाएं. सूत्रों के मुताबिक़, नेगी, वर्मा और उद्योग आयुक्त का तबादला रद्द कर दिया गया है. अन्य बाबू भी, जिनका तबादला हुआ है, अगले महीने बजट पेश होने तक अपने पद पर बने रहेंगे. ये ऐसे बाबू हैं, जो मुख्यमंत्री के क़रीबी सहयोगी हैं और बजट बनाने में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही थी. इसके अलावा दीक्षित सरकार की कई अन्य विकास परियोजनाओं को भी यही लोग देख रहे थे. ज़ाहिर है, इनके तबादले से इन परियोजनाओं पर असर पड़ेगा. इस बात से सभी सहमत हैं कि इस मुद्दे से केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच गतिरोध थोड़ा कम तो ज़रूर हुआ, लेकिन इसके बाद भी केंद्र सरकार तबादले के ऐसे मामलों में राज्य सरकार से परामर्श लेने के मूड में नहीं है.

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पुनर्निर्माण का समय

केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के सलाहकार प्रदीप मेहरा के भविष्य पर छाई अनिश्चितता खत्म हो गई है. गृह मंत्रालय ने इस विवादास्पद आईएएस अधिकारी को दिल्ली बुला लिया है. इसी कॉलम में पहले जैसा बताया गया था कि मेहरा अपने कार्यकाल की शुरुआत से ही विभिन्न मुद्दों पर चंडीगढ़ के प्रशासक एस एफ रोड्रिग्स के साथ चल रहे झगड़ों के लिए प्रसिद्ध रहे हैं. सबसे बड़ा विवाद एक भूमि विकास परियोजना के लिए मूल्य निर्धारित करने को लेकर हुआ था.

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इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि शर्मा ने अपना कार्यकाल चंडीगढ़ में अपने को बचाने में ही व्यतीत किया, क्योंकि उन पर कई आरोप थे और उनके खिला़फ जांच भी चल रही थी. इसके अलावा उनसे अपने मातहतों की सालाना गोपनीय रिपोर्ट लिखने का अधिकार भी छीन लिया गया था. हालांकि सूत्रों का कहना है कि बाद में उन्हें क्लीन चिट दे दी गई थी. सूत्रों का कहना है कि मेहरा की जगह लेने वाले के के शर्मा (1983 बैच)के ज़िम्मे का़फी महत्वपूर्ण काम हैं. मसलन उन्हें मेहरा-रोड्रिग्स विवाद की वजह से केंद्र शासित क्षेत्र के सलाहकार कार्यालय की बिगड़ी छवि को ठीक करना होगा. आशा है कि शर्मा के कार्यकाल के दौरान विकास के काम ज़्यादा होंगे और कड़वाहट कम होगी.

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