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ऐतिहासिक शहर बन रहे हैं : आतंक की नर्सरी

ऐतिहासिक शहर बन रहे हैं : आतंक की नर्सरी

बोधगया विस्फोट और आतंकी यासीन भटकल की गिरफ्तारी के बाद यह बहस छिड़ गई है कि आतंकियों के तार ऐतिहासिक शहरों से क्यों जुड़ रहे हैं? दरभंगा, हैदराबाद और आजमगढ़ जैसे ऐतिहासिक शहरों में युवा आतंकवाद  तेजी से पनप रहा है. आखिर क्या वजह है कि जिन शहरों को इतिहास के पन्नों में सकारात्मक तरजीह मिली, वे आज नकारात्मक उन्माद की पौधशाला बन रहे हैं.

22222कश्मीर से कन्याकुमारी तक पूरा भारत आतंकवाद की गिरफ्त में है. देश में आतंकवाद को लेकर कितनी गंभीरता है, इसका अंदाजा शीर्षस्थ खुफिया एजेंसियों के बीच मतभेद, नेताओं में दॄढ इच्छाशक्ति की कमी और आतंकवाद के प्रति उदासीनता से लगाया जा सकता है. कहना गलत नहीं होगा कि न तो हम आतंकवाद की समस्या की गंभीरता को पहचान पा रहे हैं और न ही उसकी जड़ में जाने की हमारी कोई ईमानदार कोशिश ही नजर आती है. सब कुछ अपनी रफ्तार से चलता रहता है, फिर कोई ऐसी घटना घट जाती है, जिससे पूरा देश दहल उठता है. कुछ दिन तक बड़ी-बड़ी बातें होती हैं और फिर जीवन अपनी पटरी पर लौट आता है, पर अब सबसे ब़डी चिंता की बात यह है कि आतंकवाद अब भारत के ऐतिहासिक शहरों में भी तेजी से पांव पसार रहा है. गरीबी और भूखमरी से आजिज आकर युवा वर्ग आतंकवादी गतिविधियों की तरफ उन्मुख हो रहे हैं, लेकिन जब आपको यह पता चलेगा कि पिछले कुछ सालों से आतंकवाद उन शहरों के युवाओं पर अपनी पक़ड बना चुका है, जो संपन्न परिवारों से हैं तो आप दांतों तले उंगली दबा लेंगे. बिहार के दरभंगा में जिन युवाओं पर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगा है, उनमें से कुछ के पिता राज्य सरकार में ब़डे ओहदों पर काम कर चुके हैं. खुद आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त युवा भी पेशे से इंजीनियर हैं. पिछले कुछ सालों में इंडियन मुजाहिदीन ने दिल्ली, मुंबई, पुणे, बिहार, बेंगलुरु, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान में जबरदस्त तबाही मचाई है. इंडियन मुजाहिदीन द्वारा किए गए विस्फोटों में सैक़डों लोग मारे गए हैं और हजारों बेघर हुए हैं.

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आतंकवाद जिन प्रमुख ऐतिहासिक शहरों में तेजी से पांव पसार रहा है, उनमें प्रमुख हैं दरभंगा, आजमग़ढ, हैदराबाद. सवाल यह उठता है कि इन शहरों में आतंक तेजी से क्यों पनप रहा है. इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं, जिसकी पहचान आतंक फैलाने वाले आकाओं ने कर ली है और उन्हीं कारणों को मोहरा बनाकर अपने नापाक मंसूबों को वे समय-समय पर अंजाम देते आ रहे हैं. पहला कारण है बेरोजगारी. आतंकी संगठन बेरोजगार युवाओं को गुमराह करते हैं और उन्हें ब़डी रकम का झांसा देते हैं. साथ ही इसमें वे दकियानूसी लोगों की मदद भी लेते हैं, ताकि गुमराह नौजवानों के दिलों में नफरत की आग पैदा कर उनके दिमाग में आतंकवाद का जहर भरा जा सके.

दूसरा प्रमुख कारण है मुस्लिमों की घनी आबादी वाले इलाके. ये आतंकवादी संगठन अपना हित साधने के लिए इन इलाकों के मुस्लिमों को अपना निशाना बनाते हैं, जो धर्म के नाम पर बहुत जल्द गुमराह हो जाते हैं. उन्हें यह लगता है कि उनका धर्म खतरे में है और उसे बचाने के लिए वे जेहाद में शरीक हो रहे हैं. तीसरा प्रमुख कारण है इन ब़डे शहरों के युवाओं में पल रहे ब़डे सपने, जिसको पूरा करने के लिए इन शहरों के युवा किसी भी हद तक चले जाते हैं. एक अन्य प्रमुख कारण है स्थानीय प्रशासन और खुफिया तंत्र के बीच सामंजस्य का अभाव, जिससे समय पर पनप रहे आतंकवाद की पहचान नहीं हो पाती और जब इसका पता चलता है, तब तक विस्फोटों में कई लोगों की जानें चली गई होती हैं. गरीबी भी इन शहरों में आतंकवाद को ब़ढावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

बिहार में आतंकवाद के पनपने का प्रमुख कारण इसका भारत-नेपाल सीमा से जु़डा होना है. यह बात कुछ खूंखार आतंकवादियों की गिरफ्तारी के बाद साबित भी होती है. यह पता चला है कि नेपाल के रास्ते आतंकवादी बिहार की सीमा में प्रवेश करते हैं. भारत-नेपाल सीमा से लश्कर-ए-तैयबा के अब्दुल करीम टुंडा की गिरफ्तारी इस बात का पक्का सबूत भी है. बिहार के रक्सौल जिले से इंडियन मुजाहिदीन के संस्थापक यासीन भटकल की हाल ही में गिरफ्तारी इस तस्वीर को पूरी तरह से साफ कर देती है.

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बिहार के कुछ अन्य क्षेत्रों से आतंकवादियों की गिरफ्तारियां जो कहानी बयां करती हैं, उससे यह साबित होता है कि ये क्षेत्र बहुत तेजी से आतंक की शरणस्थली बनते जा रहे हैं. हाल के दिनों में आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिदीन से ताल्लुक रखने वाले 13 लोग गिरफ्तार हुए हैं, जिनका नाम देश में विभिन्न जगहों पर हुए बम विस्फोटों में आया है. उनमें से 12 का बिहार के दरभंगा का निवासी होना संदेह पैदा करता है कि मिथिलांचल का यह पौराणिक शहर कहीं आतंकवाद की नई नर्सरी तो नहीं बन रहा. ज्योतिष एवं शास्त्र के गूढ़ रहस्यों को जानने वाले मिथिलांचल में आतंक की सुराग लेने कभी मुंबई पुलिस पहुंचती है तो कभी दिल्ली पुलिस. देश में कहीं भी विस्फोट हो, लेकिन उसके तार कहीं न कहीं मिथिलांचल से जु़डे हुए पाए जाते हैं. हाल के दिनों में देश के विभिन्न जगहों से गिरफ्तार हुए 16 लोगों में से 14 मिथिलांचल के ही रहने वाले हैं.

आजमग़ढ दूसरा प्रमुख ऐतिहासिक शहर है, जहां से पिछले कुछ बरसों में कई खूंखार आतंकवादियों की गिरफ्तारियां हुई हैं. मशहूर शायर कैफी आजमी, साहित्यकार  राहुल सांकृत्यायन, मौलाना शिबली और अयोध्या सिंह उपाध्याय जैसी महान हस्तियों की कर्मस्थली आज आतंकवाद की नर्सरी के रूप में बदनाम हो चुका है. वर्ष 2008 में दिल्ली के बाटला इलाके में मुठभेड़ में मारे गए युवकों में से कुछ आजमगढ़ के थे. डॉन अबू सलेम, अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और हाजी मस्तान मिर्जा का भी इस शहर से पुराना नाता है. अहमदाबाद सीरियल धमाकों के आरोपी अबू बशर को आजमग़ढ शहर से गिरफ्तार किए जाने के बाद एक-एक कर आतंकी घटनाओं में जिले के लोगों के नाम जुड़ते गए. आजमग़ढ जिले के 25 आतंकियों का नाम खुंखार आतंकवादियों की सूची में है. हैदराबाद बम विस्फोट में असदुल्लाह अख्तर इलियास तबऱेज का नाम सामने आया था. ध्यान देने की बात यह है कि असदुल्लाह आजमग़ढ के मशहूर आर्थोपेडिक डॉ जावेद अख्तर का बेटा है, जो लखनऊ के इंपीरियल यूनिवर्सिटी से फार्मेसी में बैचलर है. मुंबई पुलिस ने इसका नाम जुलाई, 2011 में हुए मुंबई सीरियल बम ब्लास्ट से भी जु़डा था.

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दक्षिण भारत का प्रमुख शहर और आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद 1990 के बाद से ही आतंकवाद का प्रमुख ग़ढ बन चुकी है. यह शहर लश्कर-ए-तैयबा, इंडियन मुजाहिदीन, हिजबुल, आईयूएम जैसे खतरनाक आतंकी संगठनों की पहली पसंद है. खुफिया सूत्रों का मानना है कि आतंकी एजेंटों को यहां डॉक्टरों, इंजीनियरों, शिक्षकों, आईटी प्रोफेशनल्स के बीच पहचान पाना मुश्किल है. यहां के लोगों को बांग्लादेश के रास्ते पाकिस्तान ले जाया जाता है और उसके बाद ट्रेनिंग देकर नेपाल के रास्ते हैदराबाद में दाखिल करा दिया जाता है. और अपने नापाक इरादों के लिए मोहरे बनाए जाते हैं यहां के गरीब मुसलमान बच्चे, जिनके अंदर राजनीति को लेकर गहरी निराशा है. धार्मिक उन्माद पैदा कर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए ऐसे युवकों की भर्ती कर ली जाती है. यहां पक़डे गए कुछ लोगों के संबंध ओसामा बिन लादेन से भी थे. इस बात से यहां के आतंकी तत्वों के खतरनाक मंसूबों और नेटवर्क का पता चलता है. हैदराबाद से 170 लोगों को गिरफ्त में लिया जा चुका है, जो किसी न किसी रूप में आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त थे.

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