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गया एयरपोर्ट: विस्तार पर लगा ग्रहण, भूमि अधिग्रहण में लगा पेंच
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गया एयरपोर्ट: विस्तार पर लगा ग्रहण, भूमि अधिग्रहण में लगा पेंच

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airportगया एयरपोर्ट पर दिनोंदिन देशी-विदेशी फ्लाइट का आना जाना बढ़ता जा रहा है. यहां पर्यटकों के आगमन में भी अच्छी खासी वृद्धि होती जा रही है. परंतु इस एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर का दर्जा मिलने में भूमि अधिग्रहण का मामला फंसा हुआ है. पिछले कई वर्षों से इस हवाई अड्डा को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्‌डा बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें करीब सौ एकड़ भूमि की जरूरत है. इसमें से अभी तक 30 एकड़ भूमि का ही अधिग्रहण हो पाया है. 70.20 एकड़ भूमि के अधिग्रहण पर विवाद चल रहा है.

गया एयरपोर्ट पर 2017-18 में 02 लाख 07 हजार 439 देशी विदेशी टूरिस्ट गया पहुंचे. पिछले साल यह संख्या 01 लाख 99 हजार 731 थी. इस तरह देशी-विदेशी पैसेंजर मूवमेंट में 3.85 फीसदी की वृद्धि हुई है. यात्रियों की संख्या में पिछले साल (2016-17 में) गया एयरपोर्ट पर 16.8 फीसदी  वृद्धि दर्ज की गई थी. विमान प्रचालन में चार फीसदी की वृद्धि हुई थी. गया एयरपोर्ट पर वित्तीय वर्ष 2015-16 में ट्रैफिक राजस्व में 17.55 व यात्रियों की संख्या में 18.44 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी. दिसम्बर 2016 में देश में आए कुल विदेशी पर्यटकों का 84 फीसदी पर्यटक गया आए. दिसंबर 2015 की तुलना में 13 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी.

ग्राहक संतुष्टि सेवा में गया एयरपोर्ट को वर्तमान सत्र 2016-17 में देश के 43 एयरपोर्ट में 10वां स्थान व पूर्वी जोन में तीसरा स्थान मिला. एयरपोर्ट डायरेक्टर दिलीप कुमार ने बताया कि 2015-16 में भी गया एयरपोर्ट को पूर्वी जोन में तीसरा स्थान मिला था. पिछले साल ग्राहक संतुष्टि सेवा में पांच में से 4.53 अंक मिले थे.

गया हवाई अड्डा को कोलकाता का स्टैंडबाई एयरपोर्ट बनाया जाना है. जरूरत पड़ने पर कोलकाता एयरपोर्ट के विकल्प के रूप में गया का इस्तेमाल करने की योजना है. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने 2011 में इस योजना को हरी झंडी दी थी. 954 एकड़ में फैले एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लिए सौ एकड़ अतिरिक्त जमीन के अधिग्रहण के प्रस्ताव का मामला अब पेंचीदा होता दिख रहा है. लगभग 30 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को सौंप दिया गया है. शेष 70 एकड़ जमीन के अधिग्रहण को लेकर विवाद चल रहा है.

इसके तहत पश्चिमी हिस्से में बसे विशुनगंज गांव के ग्रामीणों ने कम मुआवजा की बात करते हुए मामले को कोर्ट ले गए हैं. कोर्ट ने कुछ मामले में फैसला दिया है, जिसके विरुद्ध प्रशासन अपर कोर्ट जा रही है. इससे मामला अधिक लंंबित होगा. वर्तमान में 7500 वर्ग मीटर में टर्मिनल भवन है, जहां 250 यात्रियों के आगमन-प्रस्थान की सुविधा है. हवाई अड्डा का विस्तार दक्षिण पश्चिम में विशुनगंज की ओर ही होना है. भूखंड पर अत्याधुनिक संचार सुविधा से लैस एयर कंट्रोल टावर व टेक्निकल भवन का निर्माण प्रस्तावित है.

गया विमानपत्तन के विस्तारीकरण को लेकर मास्टर प्लान  का ड्राफ्ट रिपोर्ट बन चुका है. मास्टर प्लान के अनुसार इसकी रनवे की लंबाई साढ़े सात हजार फुट से बढ़ा कर नौ हजार फुट करने की योजना है. इसकी चौड़ाई वर्तमान में 45 मीटर है, जिसे 15 मीटर अतिरिक्त बढ़ाने का प्रस्ताव है. इससे जंबो जेट जैसे विमानों का परिचालन शुरू होने से गया एयरपोर्ट दक्षिण पूर्व एशियाई देशों से जुड़ जाएगा.

विशुनगंज के ग्रामीणों ने बताया कि हवाई अड्डा के विस्तार के लिए पूर्वी छोर पर स्थित गांव हरियो की जमीन का बेहतर मूल्यांकन कर अधिक राशि का भुगतान किया गया है. विशुनगंज की जमीन के लिए प्रशासन 7765 रुपए प्रति डिसमिल दे रही थी, जबकि इसके विपरीत हरियो गांव को 10554 रुपये प्रति डिसमिल की दर से भुगतान किया है. कम राशि की बात का विशुनगंज गांव के लोेगों ने मुआवजा लेेने से इंकार कर दिया. सितंबर 2017 में भूमि अर्जन पुनर्वासन प्राधिकार के विशेष कोर्ट के जज एनके श्रीवास्तव ने 299 केसों में 14 मामलों में फैसला किसानों के पक्ष में सुनाते हुए  चार गुनी राशि 12 फीसदी वार्षिक सूद जोड़कर देने का निर्देश दिया.

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