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लोग तय करते हैं बजट कैसा हो!
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लोग तय करते हैं बजट कैसा हो!

बजट एक जटिल विषय है. आम तौर पर बजट कैसे बनता है, इसकी पूरी प्रक्रिया क्या है, इन सब चीजों से आम आदमी का कोई सीधा संबंध नहीं दिखता. और शायद यही वजह भी है कि आम आदमी के लिए बजट एक नीरस एवं उबाऊ घटना बनकर रह जाता है. बजट बनाने की प्रक्रिया से जुड़ा एक और अहम तथ्य है, पारदर्शिता, यानी बजट बनाने की प्रक्रिया में कितनी पारदर्शिता बरती जाती है और इसे बनाने की प्रक्रिया में आम आदमी की क्या भूमिका होती है. एक अहम सवाल यह भी है कि जिस जनता के लिए बजट बनाया जाता है, उसकी राय कितनी शामिल होती है उसमें. कम से कम भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में तो यही देखने को मिलता है कि बजट निर्माण में आम आदमी का कोई योगदान नहीं होता है. हम आपको ब्राजील का एक उदाहरण बताते हैं, जहां न केवल बजट बनाने की एक शानदार परंपरा का विकास किया गया है, बल्कि वहां बजट बनाने में हर एक आदमी की भूमिका भी होती है. ब्राजील में आम आदमी द्वारा मिल-जुल कर बजट बनाने की प्रक्रिया यहां काफी लोकप्रिय हो चुकी है. 1989 में वर्कर्स पार्टी ने पोर्ट अलेगे्र में इसकी शुरुआत की थी. शहर के लोगों का जीवन-स्तर बढ़िया बनाने के लिए अपनाए गए सुधारों का एक हिस्सा बजट बनाने की यह प्रक्रिया भी थी. शहर की एक तिहाई जनसंख्या झुग्गियों में रहती थी और उसके पास सामान्य जन-सुविधाएं (पानी, शौचालय, स्वास्थ्य सुविधाएं, स्कूल इत्यादि) भी उपलब्ध नहीं थीं. बजट बनाने की यह प्रक्रिया हरेक साल संपन्न होती थी, जिसमें स्थानीय, क्षेत्रीय एवं शहर की आम सभाएं शामिल होती थीं. स्थानीय लोग अपनी प्राथमिकताओं के हिसाब से यह तय करते थे कि पैसा कहां खर्च करना है. ग़ौरतलब है कि पोर्ट अलेगे्र में प्रत्येक साल 200 मिलियन डॉलर स़िर्फ निर्माण और सेवा क्षेत्र पर खर्च किया जाता है. इस शहर के 50 हज़ार लोग बजट बनाने की प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं और उनमें शामिल लोग विभिन्न आर्थिक, राजनीतिक पृष्ठभूमि से आते हैं. इसका नतीजा यह रहा कि 1989 से पोर्ट अलेगे्र के नगर निगम चुनावों में वर्कर्स पार्टी ने लगातार 4 बार जीत दर्ज की. यह पूरे लैटिन अमेरिका में नगर निगम स्तर पर वामपंथी प्रशासकों की असफलता के ख़िलाफ़ आम लोगों की प्रतिक्रिया थी. सच तो यह है कि एक मशहूर बिज़नेस पत्रिका पोर्ट अलेगे्र को जीवन की उच्च गुणवत्ता मानकों के आधार पर लगातार 4 बार ब्राजील के सबसे अच्छे शहर के लिए नामित कर चुकी है. 1989 से पहले इस शहर की वित्तीय स्थिति काफी कमजोर थी. इसकी वजह थी खराब राजस्व प्रणाली, उद्योगों का न होना, कर्ज, पलायन इत्यादि, लेकिन 1991 तक वित्तीय सुधारों का प्रभाव साफ़-साफ़ दिखने लगा था और इस सबमें आम लोगों की भागीदारी से बजट बनाने की प्रक्रिया अहम थी. 1989 से 1996 के बीच वैसे परिवारों की संख्या 80 प्रतिशत से बढ़कर 98 प्रतिशत हो गई, जिनके घरों में अब पानी उपलब्ध था. उसी तरह सीवेज सुविधा के मामले में यह प्रतिशत 46 से बढ़कर 85 प्रतिशत, स्कूल में दाखिला पाने वाले बच्चों की संख्या दोगुनी हो गई. ग़रीब इलाकों में हरेक साल 30 किलोमीटर सड़कें बनाई गईं. प्रशासन में पारदर्शिता के कारण अब लोग करों का भुगतान भी कर रहे थे, जिससे राजस्व में 50 प्रतिशत की वृद्धि हो गई. अब ब्राजील के लगभग 80 शहर पोर्ट अलेगे्र मॉडल को अपना चुके हैं. इस सबका एक बड़ा ही सुखद नतीजा यह रहा कि तकनीकी कर्मचारी, जिनमें बजट बनाने वाले से लेकर इंजीनियर तक शामिल थे, अब आम आदमी से जुड़ने लगे थे. सहभागिता से बजट बनाने की प्रक्रिया ब्राजील में शुरू हुई, लेकिन धीरे-धीरे यह लैटिन अमेरिका के सैकड़ों शहरों में फैल गई. आज यही प्रक्रिया यूरोप, एशिया, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के कई शहरों में भी अपनाई जाने लगी है. बहरहाल, एक अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल बजट पार्टनरशिप ने बजट बनाने की प्रक्रिया को लेकर पूरी दुनिया में एक सर्वे किया और यह पता लगाने की कोशिश की कि कौन सा देश कितने पारदर्शी तरीके से अपना बजट बनाता है. 2012 के इस सर्वे से यह पता चला कि दुनिया के सारे देशों में न्यूजीलैंड पहले स्थान पर है, जो सर्वाधिक पारदर्शी तरीके से बजट बनाता है. उसे 100 में से 90 अंक मिले. दूसरे स्थान पर है दक्षिणी अफ्रीका, जिसे 100 में से 90 अंक मिले. दक्षिणी अफ्रीका अपना बजट बनाने से पहले सारी सूचनाएं जनता के बीच रखता है. चौक-चौराहे पर जाकर जनता की राय ली जाती है. लोगों से यह पूछा भी जाता है कि उन्हें इस बजट में क्या चाहिए. यहां तक कि बच्चों की राय भी ली जाती है. इसके बाद नंबर आता है ब्रिटेन, स्वीडन, नॉर्वे और फ्रांस का. इस सूची में भारत का स्थान 20वां है.

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