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कुशवाहा होंगे कांग्रेस का चेहरा
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कुशवाहा होंगे कांग्रेस का चेहरा

upendra kushwaha

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लोकसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे से ठीक पहले राहुल गांधी के दूत अहमद पटेल और उपेंद्र कुशवाहा के बीच हुई भेंट ने कई सियासी विकल्पों को एक साथ खोल दिया है. वैसे तो इस मुलाकात का एजेंडा रालोसपा को मिलने वाली सीटें थीं पर जब बात आगे बढ़ी तो बढ़ती ही चली गई. पहले बता दें कि महागठबंधन की ओर से रालोसपा को छह सीट दी जा रही हैं जिसका ऐलान खरमास के बाद हो जाएगा. उपेंद्र कुशवाहा इस बात पर भी राजी हो गए हैं कि लोकसभा का चुनाव राहुल गांधी के चेहरे को आगे करके लड़ा जाएगा. यह भी तय हुआ कि उपेंद्र कुशवाहा काराकाट से ही चुनावी अखाड़े में उतरेंगे.

कुशवाहा करेंगे नेतृत्व

इस सियासी मुलाकात में जो बात सबसे खास रही वह यह थी कि कांग्रेस उपेंद्र कुशवाहा के चेहरे का इस्तेमाल विधानसभा चुनाव के लिए करना चाहती है. कांग्रेसी सूत्रों का कहना है कि पार्टी चाहती है कि अगर लोकसभा चुनाव में तालमेल बेहतर रहा और अच्छे नतीजे आए तो 2020 के विधानसभा चुनावों के लिए उपेंद्र कुशवाहा को आगे करके चुनावी अखाड़े में कूदा जाए. गौरतलब है कि कुशवाहा वोट बैंक मोटे तौर पर कभी भी कांग्रेस के साथ नहीं रहा है. पार्टी के चुनावी रणनीतिकार चाहते हैं कि लोकसभा और खासकर विधानसभा चुनावों में उस वोट बैंक को उपेंद्र कुशवाहा के माध्यम से कांग्रेस के साथ जोड़ा जाए.

 

नहीं खुलेगा एनडीए का खाता

इधर नरेंद्र मोदी सरकार से इस्तीफा देने के बाद जब उपेंद्र कुशवाहा पहली बार पटना आए तो उनके समर्थकों ने अपने नेता के स्वागत के लिए जी जान लगा दिया. एयरपोर्ट से निकलकर गाड़ी में बैठने में ही कुशवाहा को एक घंटे का समय लग गया. बाद में मिलन समारोह में उपेंद्र कुशवाहा ने दावा किया कि लोकसभा चुनाव में एनडीए का खाता नहीं खुलेगा. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार कहते थे कि मिट्टी में मिल जाऐंगे पर भाजपा से हाथ नहीं मिलाऐंगे. अब तो जनता ही उन्हें मिट्टी में मिला देगी. नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कुशवाहा ने कहा कि उनके पास मेरी बात सुनने के लिए दो मिनट का भी समय नहीं था. अब वह पूरे बिहार के लोगों को बताएंगे कि कैसे नीतीश सरकार ने सूबे को बर्बाद करने का काम किया है.

भाजपा के निशाने पर कुशवाहा

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा को नरेंद्र मोदी के खिलाफ बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है. साढ़े चार साल मंत्री रहते उन्हें कुछ पता नहीं था अब जब महागठबंधन में जाना है तो उन्हें दिव्य ज्ञान प्राप्त हो गया. सम्राट चौधरी का कहना है कि कुशवाहा समाज अवसरवादियों का कभी साथ नहीं देता है. बिहार की जनता उपेंद्र कुशवाहा को नकार चुकी है.

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