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उत्तराखंडः दूध और ब्रेड को तरसे लोग
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उत्तराखंडः दूध और ब्रेड को तरसे लोग

भारी वर्षा के चलते राज्य में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, लेकिन लोग बारिश को नज़रअंदाज़ करके, जान को जोख़िम में डालकर यात्राएं कर रहे हैं. राज्य सरकार का आपदा प्रबंधन पूरी तरह फिसड्डी साबित हो रहा है, जिसके चलते उत्तरकाशी और रुद्र प्रयाग में आवश्यक सेवाएं चरमरा गई हैं. तेज बारिश के साथ मलबा आने से होने वाले भूस्खलन के चलते गंगोत्री-बद्रीनाथ राजमार्ग पर आवागमन ठप्प हो गया है. भटवाड़ी से लगे पचास गांवों के साथ-साथ अब सेना, आईटीबीपी एवं वीआरओ के समक्ष गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है. उत्तरकाशी और ॠषिकेश को आपस में जोड़ने वाला मार्ग बंद होने के कारण बाज़ार में सब्जी, दूध, ब्रेड और मक्खन की कमी हो गई है. बाज़ार में एक-दो को छोड़कर कोई सब्जी नहीं मिल पा रही है.

राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि सूबे का आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह नाकाम सिद्ध हो रहा है, जिसके चलते पहाड़ी एवं मैदानी, दोनों ही इलाक़ों में जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने सरकार का ध्यान चार धाम यात्रा में फंसे यात्रियों की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि इसका नकारात्मक संदेश पूरे देश में जा रहा है, जिसका राज्य के पर्यटन उद्योग पर विपरीत असर पड़ेगा.

गंगोत्री मार्ग पर डूंडा के नीचे छोटे वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है, जिससे मार्ग में फंसे लोग अपने घर तो पहुंच गए, लेकिन इनकी परेशानी कम नहीं हुई. मनेरी के आगे गंगोत्री राजमार्ग, भटका सौड़, भटवाड़ी बाज़ार, चडेती, हेलंगू, थिरांग एवं सुक्की में आए मलबे और भू-धसान के चलते जनता को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. टकनौर क्षेत्र खाद्यान्न संकट से जूझ रहा है. राज्य सरकार स़िर्फ विज्ञापनों में सरकार जनता के द्वार का नारा लगा रही है. प्रशासन इन इलाक़ों में फंसे स्थानीय नागरिकों एवं पर्यटकों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने में कोई रुचि नहीं ले रहा है. इन इलाक़ों में केरोसिन एवं रसोई गैस की आपूर्ति न हो पाने के कारण जनता को काफी परेशानी हो रही है. इलाक़े में बंद पड़े 42 संपर्क मार्गों में से अब तक केवल दो मार्ग ही खोले जा सके हैं. बद्रीनाथ मार्ग भी जनता की परेशानी का सबब बन गया है. यहां राजमार्ग सहित कई संपर्क मार्ग बंद होने के कारण लोगों को अपनी जान जोख़िम में डालकर पहाड़ी मार्गों से गुजरना पड़ रहा है. वहीं इन दिनों बीमार लोग उपचार के अभाव में काल के गाल में समा रहे हैं. राज्य के मैदानी इलाक़ों में भी बारिश ने कहर ढा रखा है. हरिद्वार के एक दर्जन गांवों में गंगा का पानी प्रवेश कर गया है. इन गांवों के साथ ही लक्सर बाज़ार में भी तीन से पांच फुट पानी हिलोरें ले रहा है. गंगा और सोलानी की उफनती लहरों ने तटों को क्षतिग्रस्त कर दिया है, जिसके चलते लक्सर तहसील के लगभग दो दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में आ गए और एक दर्जन लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. हरिद्वार में भारी वर्षा के चलते विभिन्न गांवों के क़रीब 1500 कच्चे मकान ध्वस्त हो गए. लक्सर के मोहनवाला, दावतीखेड़ा एवं जोगावाला में पांच से छह फुट तक पानी हिलोरें ले रहा है. प्रशासन ने तटबंध टूटने पर पीएसी के जिन जवानों को बचाव-राहत कार्य के लिए भेजा था, वे वापस जा चुके हैं. जनता की परेशानी ज्यों की त्यों बनी हुई है. बरसाती नदी रतमई के किनारे स्थित तटबंध टूटने से औरंगाबाद के ग्रामीण काफी परेशान हैं. इससे फसल तो बर्बाद हुई ही, खेतों में कटाव की समस्या पैदा हो गई. हरिद्वार के शहरी इलाक़ों में बाढ़ का पानी घुसने से लोगों को सिल्ट का कहर झेलना पड़ रहा है. नगरपालिका प्रशासन सिल्ट हटने के बाद सफाई कराने की बात कहकर हाथ पर हाथ रखकर बैठ गया है. सिल्ट जमा होने से कई इलाक़ों में बीमारियां फैल रही हैं. 19 सर्किलों में कूड़ा उठाने का काम ठप्प है, इससे धर्म नगरी का हाल बेहाल है. देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को कूड़े के ढेरों से गुजरना पड़ रहा है. खास तौर से कनखल एवं ज्वालापुर में स्थिति ज़्यादा ख़राब है. राज्य सरकार के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक हरिद्वार में ही रहते हैं, फिर भी जनता की परेशानी से उनका कोई लेना-देना नहीं है. केंद्रीय संसदीय राज्यमंत्री एवं हरिद्वार के सांसद हरक सिंह रावत ने लक्सर एवं सुल्तानपुर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा करके जनता का दु:ख-दर्द जाना. उन्होंने स्थानीय प्रशासन और सिंचाई विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए नाराज़गी व्यक्त की. रावत ने हरिद्वार के ज़िलाधिकारी की भी जमकर क्लास ली. राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि सूबे का आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह नाकाम सिद्ध हो रहा है, जिसके चलते पहाड़ी एवं मैदानी, दोनों ही इलाक़ों में जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने सरकार का ध्यान चार धाम यात्रा में फंसे यात्रियों की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि इसका नकारात्मक संदेश पूरे देश में जा रहा है, जिसका राज्य के पर्यटन उद्योग पर विपरीत असर पड़ेगा. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्या का मानना है कि मुख्यमंत्री को दैवीय आपदा से परेशान जनता को राहत प्रदान करने का काम प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए.

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