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दिल्‍ली का बाबू : सीबीआई आंकड़े में पीछे

दिल्‍ली का बाबू : सीबीआई आंकड़े में पीछे

भ्रष्टाचार के मामलों में दोषियों पर आरोप सिद्ध कराने के मामले में सीबीआई इस साल पीछे रह गई है. इस साल सीबीआई भ्रष्टाचार के 64 फीसदी मामलों में ही आरोपों को प्रामाणित करने में कामयाब हो पाई है. हालांकि, सीबीआई की सफलता की यह दर पिछले कुछ साल से यूं ही घटती जा रही है. 2006 में सीबीआई ने भ्रष्टाचार के 73 फीसदी मामलों में सफलता प्राप्त की थी, जो 2009 में घटकर 58 फीसदी रह गई. इस दौरान निदेशकों के आने-जाने का दौर जारी है, लेकिन इस शीर्ष संस्था के कामकाज में कोई ख़ास अंतर नज़र नहीं आ रहा है.

सरकार ने अब जाकर स्वतंत्र रूप से काम कर रहे विशेषज्ञ वकीलों को अनुबंधित करने का फैसला किया है. सीबीआई निदेशक अश्विनी कुमार की अध्यक्षता में एक समिति ऐसे विशेषज्ञ वकीलों की पहचान कर रही है जो भ्रष्टाचार के मामलों में तीन से लेकर सात साल तक का अनुभव रखते हों. इन वकीलों को चालीस से साठ हज़ार तक वेतन दिया जाएगा और वे भ्रष्टाचार के मामलों को सुलझाने में तीन साल तक सीबीआई की मदद करेंगे.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जब यह चेतावनी दी कि भ्रष्टाचार के ज़्यादा से ज़्यादा मामले पकड़ कर ही देश में विकास की गति को तेज़ किया जा सकता है, तो सीबीआई ने अब अपने लिए एक नया लक्ष्य निर्धारित कर लिया है. संस्था ने इस साल 2010 में भ्रष्टाचार के 70 प्रतिशत मामलों में आरोपियों के ख़िला़फ आरोप सिद्ध करने के लिए कमर कस ली है. हालांकि, केवल लक्ष्य निर्धारित कर लेने भर से कितना फायदा होगा, यह अंदाज़ा लगाना मुश्किल है क्योंकि सूत्रों का यह भी कहना है कि सीबीआई योग्य अधिकारियों की कमी की समस्या से जूझ रही है. फिलहाल विभाग में 762 पद खाली हैं जबकि भ्रष्टाचार के 988 मामले लंबित हैं. इनमें से 438 ऐसे मामले हैं जिनमें पिछले दस सालों में चार्जशीट भी दायर नहीं की गई है क्योंकि ऐसा करने के लिए विभाग के पास अधिकारियों की भारी कमी है.

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इन आकड़ों से सकते में आई सरकार ने अब जाकर स्वतंत्र रूप से काम कर रहे विशेषज्ञ वकीलों को अनुबंधित करने का फैसला किया है. सीबीआई निदेशक अश्विनी कुमार की अध्यक्षता में एक समिति ऐसे विशेषज्ञ वकीलों की पहचान कर रही है जो भ्रष्टाचार के मामलों में तीन से लेकर सात साल तक का अनुभव रखते हों. इन वकीलों को चालीस से साठ हज़ार तक वेतन दिया जाएगा और वे भ्रष्टाचार के मामलों को सुलझाने में तीन साल तक सीबीआई की मदद करेंगे. क्या इसे सीबीआई के अति उत्साह का प्रतीक माना जाए? चाहे जो भी हो, लेकिन इतना ज़रूर है कि सीबीआई की समस्याएं इतनी आसानी से ख़त्म होती नहीं दिखाई देतीं.

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