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137 वीं जयंती पर याद किए जा रहे हैं साहित्य सम्राट मुंशी प्रेमचंद

137 वीं जयंती पर याद किए जा रहे हैं साहित्य सम्राट मुंशी प्रेमचंद

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प्रेमचंद को हिन्दी कहानी व उपन्यास का सम्राट कहा जाता है.  साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की आज 137वीं जयंती है. 8 अक्टूबर 1936 को 56 वर्ष की उम्र में इनका निधन हो गया था. प्रेमचंद ऐसे उपन्यासकार थे, जिन्होंने अपनी लेखनी के दम पर पूरे विश्व में पहचान बनाई. मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर मध्‍य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान, पूर्व सांसद नवीन जिंदल, झारखंड के पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा ने ट्विटर पर उन्‍हें नमन किया है.

प्रेमचंद का असली नाम धनपत राय था. उनका जन्म 31 जुलाई, 1880 को बनारस शहर से चार मील दूर लमही नामक गांव में हुआ था. प्रेमचंद जब 6 वर्ष के थे, तब उन्हें गांव में रहने वाले एक मौलवी के घर फारसी और उर्दू पढ़ने के लिए भेजा गया. बच्पन में ही बीमारी के कारण इनकी मां का देहांत हो गया. उन्हें अपनी बड़ी बहन से प्यार मिला, लेकिन बहन के विवाह के बाद वह अकेले हो गए.

अकेले होने की वजह से उन्होंने खुद को कहानियां पढ़ने में व्यस्त कर लिया. आगे चलकर वे स्वयं कहानियां लिखने लगे और महान कथाकार बने. प्रेमचंद्र ने लगभग 300 कहानियां तथा चौदह बड़े उपन्यास लिखे.  उनके रचे साहित्य का अनुवाद लगभग सभी प्रमुख भाषाओं में हो चुका है, विदेशी भाषाओं में भी.

15-16 बरस में ही उनका विवाह कर दिया गया, लेकिन कुछ समय बाद ही उनकी पत्नी का देहांत हो गया. उन्होंने चुनार के स्कूल में शिक्षक की नौकरी की और बीए की पढ़ाई भी. बाद में फिर एक बाल विधवा शिवरानी देवी से विवाह किया, जिन्होंने प्रेमचंद की जीवनी लिखी थी.

सत्यजीत राय ने उनकी दो कहानियों पर यादगार फिल्में बनाई. उनकी कहानी ‘कफन’ पर आधारित ‘ओका ऊरी कथा’ नाम से एक तेलुगू फिल्म भी बनी है, जिसे सर्वश्रेष्ठ तेलुगू फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला. उनके उपन्यास पर बना टीवी धारावाहिक ‘निर्मला’ भी बहुत लोकप्रिय हुआ था.

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