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साई बाबा : आध्यात्मिक ज्ञान और विज्ञान

साई बाबा : आध्यात्मिक ज्ञान और विज्ञान

कुछ लोग वैज्ञानिक ज्ञान को विभिन्न प्राकृतिक नियमों को समझने की एक पद्धति के रूप में देखते हैं. इस सन्दर्भ में उनका मानना है कि विज्ञान का उद्देश्य विभिन्न प्राकृतिक नियमों पर नियंत्रणऔर मानव-प्रजाति के हित के लिए उनका प्रयोग...

साई बाबा : जैसा भाव वैसा गुरु

साई बाबा : जैसा भाव वैसा गुरु

अपने सांसारिक ज्ञान के आधार पर आध्यात्मिक कार्य की विवेचना करना मनुष्य की एक बहुत बड़ी कमी है. आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के बाद संासारिक ज्ञान का लोक-कल्याण के लिए ज्यादा उपयोग किया जा सकता है. अपर पक्ष में सांसारिक धर्म...

श्री साईं अवतार

श्री साईं अवतार

शिरडी के श्री साईंबाबा को वास्तव में सद्गुरु, फकीर, औलिया, महायोगी और विशेष रूप से ‘युग का अवतार’ कहा जाता है. बाबा जब शिरडी में थे, तो कुछ संत वहां आया करते थे. शिरडी आने वाले एक ऐसे ही संत...

साईं-साहित्य के कुछ आधार

साईं-साहित्य के कुछ आधार

शिरडी में बाबा के प्रवास-काल (लगभग 1860-1918 ई.) में महाराष्ट्र में प्रकाशित होने वाले समाचार-पत्र एवं पत्रिकाओं की संख्या बहुत कम थी. इन समाचार-पत्रों एवं पत्रिकाओं का अध्ययन करने से पता चलता है कि इस काल में इनमें शायद ही बाबा...

जरूरतमंद व्यक्ति की पहचान कैसे सम्भव है?

जरूरतमंद व्यक्ति की पहचान कैसे सम्भव है?

सत्कर्म-विचार पूरा करें कभी-कभी ऐसा होता है कि हम गाड़ी से कहीं जा रहे हैं और रास्ते में किसी गरीब द्वारा भीख मांगने पर मन में यह इच्छा होती है कि उसे कुछ दे दें किंतु किन्हीं कारणों से उस...

आध्यात्मिक या धार्मिक गुरु के शिष्यत्व का संबंध

आध्यात्मिक या धार्मिक गुरु के शिष्यत्व का संबंध

गुरु का संरक्षण गुरु मार्ग पर चलते हुए गलतियां जरूर करेंगे, तो श्री गुरु को इस बात से कब और कैसे अवगत कराएं? मनुष्य से गलतियां होती ही हैं. सद्गुरु को विदित है कि माया के खेल में उनका शिष्य...

इस संसार में ऐसे असंख्य लोग हैं, जो किसी गुरु को नहीं मानते

इस संसार में ऐसे असंख्य लोग हैं, जो किसी गुरु को नहीं मानते

गुरु-कृपा पानेवाले का धर्म सद्गुरु जब कृपा करते हैं, तो कृपा पाने वाले का क्या धर्म होना चाहिए? सद्गुरु ़फकीर होते हैं अर्थात जो सब कुछ त्यागकर ईश्वर से लौ लगाए रहते हें. जब वे किसी पर कृपा करते हैं...

सद्गुरु तक पहुंचने के लिए निरंतर प्रयास करना ज़रूरी

सद्गुरु तक पहुंचने के लिए निरंतर प्रयास करना ज़रूरी

आज के युग में इतने गुरु हैं, तो कैसे पता चले कि हमें सही श्री गुरु मिल गए हैं? गुरु कई प्रकार के हैं- पिता-माता प्रथम गुरु, शिक्षा गुरु, मंत्र गुरु, कुल गुरु आदि. हर व्यक्ति कहीं न कहीं गुरु...

गुरु-शिष्य : गुरुओं का आध्यात्मिक स्तर

गुरु-शिष्य : गुरुओं का आध्यात्मिक स्तर

क्या आध्यात्मिक जगत में गुरुओं का भी स्तर होता है? जी हां. जैसे सांसारिक जगत में कई गुरु होते हैं- कुल गुरु, विद्या गुरु, विद्यालय के गुरु, महाविद्यालय के गुरु-उसी प्रकार आध्यात्मिक जगत में भी गुरुओं का स्तर होता है....

दुःख-निवृत्ति : मायूसी कम कैसे हो

दुःख-निवृत्ति : मायूसी कम कैसे हो

बाबा की राह पर चलते-चलते जब इंसान को मायूसी चारों ओर से घेर ले तो वह क्या करे? एक कविता में मैंने लिखा था- जब दिल उदास हो तो साईं का नाम लेना. इंसान जीवन में दुःख और पी़डा का...

साई वंदना : सद्‌गुरु का मूलभूत गुण है ईश्वरीय करुणा

साई वंदना : सद्‌गुरु का मूलभूत गुण है ईश्वरीय करुणा

क्या पाप-कर्म करने वालों की मुक्ति सम्भव है? जीवन में किए गए नकारात्मक एवं सकारात्मक कर्मों का स्त्रोत एक ही है. चरम सीमा तक किसी गुण में जाने से व्यक्ति गुण के अंत में पहुंचता है, गुणातीत होता है. पाप...

साईं की आराधना श्रद्धा सबुरी के साथ करनी चाहिए

साईं की आराधना श्रद्धा सबुरी के साथ करनी चाहिए

क्या सदगरु से सांसारिक मांगे करना अनुचित हैं? बाबा भक्तों की मांगों को पूरी करते रहे और आज भी पूरी कर रहे हैं, जिसका अनुभव असंख्य लोगों को है. श्री साईं ने इस प्रकार की  मागों की पूर्ति के लिए...

सद्गुरु भक्तों के अर्न्तमन को जानते हैं

सद्गुरु भक्तों के अर्न्तमन को जानते हैं

गुरु-मुख होने की आवश्कता संसार में जो अनेक तरह के बंधन हैं, मनुष्य उनमें क्यों फंसता है? संसार के अनेक बंधनों में हम इसलिए फंसते हैं, क्योंकि हमारे मन में संसार के प्रति आकर्षण होता है. हम उस भावना के अनुरूप...

गुरु के बताए सन्मार्ग का अनुसरण करें

गुरु के बताए सन्मार्ग का अनुसरण करें

यह सत्य है कि मन बहुत जल्दी विचलित हो जाता है. विचलित में वि उपसर्ग है और चल धातु है, जिसका तात्पर्य है-विशेष रूप से चलायमान. मन का स्वभाव ही है-चंचल होना. वस्तुत: मन अपने मन में कुछ नहीं है....

सबूरी को मन में कैसे बसाए रखें

सबूरी को मन में कैसे बसाए रखें

गुरु के प्रति आस्था हर परिस्थिति में बनाए रखना ही एक मात्र मार्ग है, उन लोगों के लिए जो उनके समीप आना चाहते हैं. पर कुछ लोग जो सांसारिक वस्तुओं को पाने की इच्छा से सद्गुरु के पास आते हैं...

सद्गुरु प्रकाशमान सूर्य की भांति हैं

सद्गुरु प्रकाशमान सूर्य की भांति हैं

करोड़ो प्रकार के विभिन्न प्राणी-जिनमें मानव सबसे उन्नत है, जीवन के अलग-अलग गलियारों में चलते रहते हैं- राजपथ पर पहुंचने के लिए इसका अर्थ यह है कि विभिन्न लोग जीवन की संकीर्ण गलियों के भीतर दुख और कष्ट के बोझ उठाते...

आध्यात्मिक पथ पर प्रगति

आध्यात्मिक पथ पर प्रगति

सदगुरु ने जब भी जब भी किसी की मदद की, अकस्मता की. जब वे यह देखते हैं कि व्यक्ति अपनी पूरी शक्ति लगाकर अपने को अच्छा या निर्मल बनाने का प्रयत्न कर रहा है, पर ऐसा नहीं कर पा रहा...

शाश्वत साई चेतना

शाश्वत साई चेतना

अब जरा हम अपने सदगुरु श्री शिरडी साई बाबा का उदाहरण लें. अपना शरीर छोड़ने के पहले बाबा ने बहुत स्पष्ट शब्दों में अपने भक्तों को कुछ आश्वासन दिए थे जो कि बाबा के ग्यारह वचनों के रूप में प्रसिद्ध...

साई की लीला अपरंपार है

साई की लीला अपरंपार है

साई बाबा अल्पाहारी थे और वे थोड़ा बहुत जो कुछ भी खाते थे, वह उन्हें केवल दो गृहों से ही भिक्षा में उपलब्ध हो जाया करता था, लेकिन जब उनके मन में सभी भक्तों को भोजन कराने की इच्छा होती...

साई समस्त प्राणियों में विराजमान हैं

साई समस्त प्राणियों में विराजमान हैं

माया के कारण जीव के हृदय में घोर अंधकार भरा रहता है. घने अंधकार के कारण जीव माया के बंधन की गांठ सुलझाने में अक्षम सिद्ध होता है. बंधन की गांठ खोलने के लिए प्रकाश की आवश्यकता होती है. प्रकाश...

साई बाबा संत शिरोमणि हैं

साई बाबा संत शिरोमणि हैं

श्री मती खापर्डे श्रद्घालु तथा पूर्ण भक्त थी, इसलिये उनका साई चरणों में अत्यन्त प्रेम था. प्रतिदिन दोपहर को वे स्वयं नैवेघ लेकर मस्जिद को जातीं और जब बाबा उसे ग्रहण कर लेते, तभी वे लौटकर आपना भोजन किया करती...

सुख और शान्ति प्रदान करते हैं साई

सुख और शान्ति प्रदान करते हैं साई

यह सामयिक और उपयुक्त कथा पढ़कर आम्बडेकर को महान आश्चर्य हुआ. यदि इस कथा द्घारा उन्हें बाबा का संकेत प्राप्त न होता तो अभी तक उनका प्राणान्त ही हो गया होता. बाबा की व्यापकता और दयालुता देखकर उनका विश्वास दृढ़...

साई का हर संदेश राह दिखाता है

साई का हर संदेश राह दिखाता है

इस विश्व में असंख्य संत हैं, परंतु अपना पिता (गुरु) ही सच्चा पिता (सच्चा गुरु) है. दूसरे चाहे कितने ही मधुर वचन क्यों न कहते हों, परंतु अपने गुरु का उपदेश कभी नहीं भूलना चाहिए. संक्षेप में सार यही है...

साई ज्ञानज्योति स्वरूप हैं

साई ज्ञानज्योति स्वरूप हैं

नासिक के एक मर्मनिष्ठ, अग्निहोत्री ब्राह्मण थे, जिनका नाम मुले शास्त्री था. उन्होंने 6 शास्त्रों का अध्ययन किया था और ज्योतिष तथा सामुद्रिक शास्त्र में भी पारंगत थे. वे एक बार नागपुर के प्रसिद्ध करोड़पति श्री बापूसाहेब बूटी से भेंट...

आशा और विश्वास जगाते हैं साई बाबा

आशा और विश्वास जगाते हैं साई बाबा

एक बार गोवा के एक मामलतदार ने, जिनका नाम राले था, लगभग 300आमों का एक पार्सल शामा के नाम शिरडी भेजा. पार्सल खोलने पर प्रायः सभी आम अच्छे निकले. भक्तों में इनके वितरण का कार्य शामा को सौंपा गया. उनमें...

भक्तों को आत्मदर्शन कराते हैं साई

भक्तों को आत्मदर्शन कराते हैं साई

श्री साई, जो सन्त शिरोमणि है, उनका तो मुख्य ध्येय ही यही है. जो उनके श्री-चरणों की शरण में जाते है, उनके समस्त पाप नष्ट होकर निश्‍चित ही दिन-प्रतिदिन उनकी प्रगति होती है. उनके श्री-चरणों का स्मरण कर पवित्र स्थानों...

साई बाबा मोक्षदाता हैं

साई बाबा मोक्षदाता हैं

बाबा ने उसका अंतकाल समीप देखकर उसे यह उपचार बता दिया और साथ ही रामविजय पढ़ने की भी आज्ञा दी, जिससे यमराज अधिक प्रसन्न होते हैं. दूसरे दिन स्नानादि तथा अन्य शुद्घि के कृत्य कर उसने लेंडी बाग के एकांत...

शिरडी यात्रा की विशेषता

शिरडी यात्रा की विशेषता

शिरडी यात्रा की एक विशेषता यह थी कि बाबा की आज्ञा के बिना कोई भी शिरडी से प्रस्थान नहीं कर सकता था और यदि किसी ने किया भी, तो मानो उसने अनेक कष्टों को निमंत्रण दे दिया. परंतु यदि किसी...

शिरडी साई बाबा का जीवन ही संदेश है

शिरडी साई बाबा का जीवन ही संदेश है

आज इसे साई बाबा की शिरडी के नाम से दुनिया भर में जाना जाता है. साई बाबा पर यह विश्‍वास जाति-धर्म व राज्यों से परे देशों की सीमा लांघ चुका है. यही वजह है कि बाबा की शिरडी में भक्तों...

साई बाबा व्रत कथा का महत्व

साई बाबा व्रत कथा का महत्व

एक शहर में कोकिला नाम की स्त्री और उसके पति महेशभाई रहते थे. दोनों का वैवाहिक जीवन सुखमय था. दोनों में आपस में स्नेह और प्रेम था. पर महेश भाई की कभी-कभार झगड़ा करने की आदत थी. परंतु कोकिला अपने...

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