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दुःख-निवृत्ति : मायूसी कम कैसे हो
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दुःख-निवृत्ति : मायूसी कम कैसे हो

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sai-baba-best-hd-imagesबाबा की राह पर चलते-चलते जब इंसान को मायूसी चारों ओर से घेर ले तो वह क्या करे?

एक कविता में मैंने लिखा था- जब दिल उदास हो तो साईं का नाम लेना. इंसान जीवन में दुःख और पी़डा का सामना  करते-करते कभी-कभी जरूर मायूसी अनुभव करता है. परन्तु जितने सत्य यह दुःख और पीड़ा हैं, उतने ही सत्य सुख और आनंद भी हैं. बाबा को दोनों ही परिस्थितियोें में देखना चाहिए. सुख में बहुत आनंदित न होकर व्यर्थ समय गंवाए बिना अगर हम बाबा के नाम से दूसरों की मदद करें या बाबा के कार्य करें तो उससे जिस सुख की अनुभूति होगी, वह चिरस्थायी होगी, जबकि भौतिक सुख क्षणिक होता है एवं उसके चले जाने पर दुःख पहुंचता है. जब दुःख पहुंचे तो बाबा का कथन- आगे-आगे देखो होता है क्या? याद करें. बाबा का सान्निध्य और चिंतन करने से दुःख कम होता है. साई सच्चरित्र पढ़ने से, बाबा के भजन गाने से दुःख जरूर कम होता है. बुरे वक्त में जितना हो सके बाबा के बारे में पढ़ना चाहिए, ध्यान करना चाहिए, जपना चाहिए, कीर्तन करना चाहिए और दूसरे दुखियों की मदद करनी चाहिए ताकि जिस पाप-कर्म से दुःख मिला था, वह पाप-कर्म कट जाए.

समस्याओं का समाधान

अनेक लोग अपनी विभिन्न समस्याओं का समाधान चाहते हैं. उन लोगों को क्या करना चाहिए?

मैं बाबा के भक्तों से यही कहता हूं कि उन्हें जो कुछ मांगना है वह मात्र बाबा से मांगें. देने वाले तो बाबा ही हैं. वह मंदिर में बैठकर ध्यान लगाएं, फूल-माला चढ़ाएं. बाबा की आरतियां-जो अधिकांशतः मराठी में और कुछ संस्कृत में हैं- उन्हें पढ़कर उनका अर्थ समझें. साथ ही, श्री साई-सच्चरित्र का पाठ करें. कुछ लोग इस बात को अभी समझ नहीं रहे हैं कि उनके प्रत्येक प्रश्न का उत्तर कहीं न कहीं श्री साई सच्चरित्र में है. मैं यह दृढ़ विश्वास के साथ कह सकता हूं कि उन्हें अपने सभी प्रश्नों के उत्तर श्री साईं-सच्चरित्र में निश्चित रूप से मिल जाएंगे.

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