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भारत को मिलेंगे नए हथियार जानें भारत ने कौन कौन से ख़रीदे हथियार

भारत को मिलेंगे नए हथियार जानें भारत ने कौन कौन से ख़रीदे हथियार

tejasभारत अपनी सैन्य ताकत को समृद्ध करने के लिए कमर कस चुका है. इसके लिए रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की अध्यक्षता वाली रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) ने 67,000 करोड़ रुपए के डील को मंजूरी दे दी है. सोमवार को डीएसी ने यह फैसला लिया. इस डील के अंतर्गत 83 तेजस हल्के लड़ाकू विमान, 15 हल्के युद्धक हेलिकॉप्टर और 464 टी-90 टैंक खरीदे जाएंगे. इस डील की खास बात यह है कि ये सभी सैन्य साजो-सामान मेड इन इंडिया हैं, यानी इनका उत्पादन भारत की आयुध कंपनियां करेंगी.

डीएसी की मीटिंग में जिन 83 तेजस हल्के लड़ाकू विमानों के खरीद की बात कही गई है, उनमें से 40 विमानों के ऑर्डर पहले से ही हिंदुस्तारन एयरोनॉटिक्स  लिमिटेड (एचएएल) के पास हैं, जो इसी साल से वायुसेना को मिलने शुरू हो चुके हैं. तेजस विमानों के नए ऑर्डर पर सरकार 50,025 करोड़ रुपए खर्च करेगी. सेना और वायुसेना दोनों के लिए खरीदे जाने वाले हेलिकॉप्टरों पर 2,911 करोड़ रुपए खर्च होंगे. जबकि टी-90 टैंकों की खरीद पर 13,448 करोड़ का खर्च आएगा. इसके साथ ही भारतीय सेना के लिए 598 छोटे ड्रोन की खरीदारी पर भी डीएसी ने मुहर लगा दिया है.

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t72तेजस को अभी सेना की तरफ से प्रारंभिक परिचालन की मंजूरी (आईओसी) ही मिली है. इसे अब भी अंतिम परिचालन की मंजूरी का इंतजार है, जो जल्द ही मिल सकता है. अंतिम परिचालन की मंजूरी के बाद ही विमान तैनाती के लिए पूरी तरह तैयार होते है. तेजस विमानों की कई खामियों के बावजूद पिछले साल वायुसेना ने इसे अपने बेड़े में शामिल करने पर सहमति जताई थी. इसका मकसद था कि तेजस कार्यक्रम को जारी रखा जा सके और वायुसेना लगातार घटते विमानों की समस्या से निपट सके. गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना ने इसी साल जुलाई में तमिलनाडु के सुलुर में दो तेजस विमानों के साथ इसकी एक स्न्वाड्रन तैयार की है. एक स्न्वाड्रन में 14 से 16 विमान होते हैं.

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विमानों की पर्याप्त संख्या को बनाए रखने के लिए वायुसेना ने 80 तेजस लड़ाकू विमानों का ऑर्डर और दिया है, जिससे कुल मिलाकर इनकी संख्या 120 हो जाएगी. हालांकि एचएएल द्वारा बनाए जाने वाले 20 विमानों के पहले बेड़े में हवा में ईंधन भरने की क्षमता नहीं होगी जोकि किसी भी अभियान के समय जरूरी है. लेकिन अगले 20 विमानों को बेहतर रडार और विजुअल रेंज से भी आगे मिसाइल दागने की क्षमता से लैस किया जाएगा. भारत इन विमानों में इस्रायली रडार का प्रयोग करना चाहता है. रक्षा मंत्रालय और एचएएल तेजस विमानों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की प्रक्रिया में हैं. योजना है कि कम से कम वर्ष में 8 विमानों का उत्पादन जरूर किया जाए. भविष्य में इसे बढ़ा कर 16 विमान यानी एक स्न्वाड्रन प्रति वर्ष किया जाएगा.

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इधर खबर है कि प्रधानमंत्री जल्द ही सितंबर के सर्जिकल स्ट्राइक के बाद की स्थितियों के मद्देनजर सेना प्रमुखों के साथ सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करेंगे. इस बैठक में रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के अलावा सभी सेनाओं के प्रमुख और सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के भी मौजूद रहने की संभावना है.

गौरतलब है कि 28-29 सितम्बर की रात को भारतीय सेना ने पीओके में लीपा, तत्तापानी, केल और भिंबर स्थित सात आंतकी ठिकानों पर सफल लक्षित हमला किया था. हालांकि भारत के इस दावे को पाकिस्तान ने नकार दिया था. लेकिन इस सर्जीकल स्ट्राइक के बाद आए दिन पाकिस्तान सीमा पर सीज फायर का उल्लंघन कर रहा है. प्रधानमंत्री की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा मीटिंंग में इन सभी मुद्दों पर चर्चा संभव है.

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