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कारोबार में सफल होते खिलाड़ी : अपना सपना मनी मनी
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कारोबार में सफल होते खिलाड़ी : अपना सपना मनी मनी

खिलाड़ी अब न केवल खेल के माध्यम से पैसा कमा रहे हैं, बल्कि वे इसके अलावा अन्य व्यवसायों में पूंजी लगाकर भी पैसा, शोहरत और इज्ज़त कमा रहे हैं…

 

sportsपहले खिलाड़ी अपने पूरे करियर के दौरान सिर्फ़ खेल पर ध्यान देते थे और खेल से संन्यास लेने के बाद या तो कमेंट्री करते थे या फिर अख़बारों में खेल और खिलाड़ियों का विश्‍लेषण करके अपना जीवन बिता देते थे, लेकिन अब यह चलन बदल रहा है. खिलाड़ी खेलने के दौरान या खेल से संन्यास लेने के बाद अपने भविष्य को आर्थिक रूप से और ज़्यादा सुरक्षित करने के लिए अन्य व्यवसायों में भी निवेश कर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना यह है कि अधिकांश खिलाड़ी कॉरपोरेट जगत में सफल हो रहे हैं.

भारतीय क्रिकेट टीम के तेज़ गेंदबाज़ ज़हीर ख़ान की बात ही निराली है. उनका पुणे में जेकेस नाम से रेस्तरां है, जो कि इन दिनों काफ़ी सफलतापूर्वक चल रहा है. अब ज़हीर ख़ान योजना बना रहे हैं कि इस रेस्तरां की चेन पूरे देश में खोली जाए. पूर्व क्रिकेटर कपिल देव का कपिल इलेवन रेस्तरां आज भी ग्राहकों से भरा रहता है. इसके अलावा, चंडीगढ़ और पटना में उनके होटल भी अच्छे-ख़ासे चल रहे हैं. पूर्व रणजी क्रिकेटर एमजीके महिंद्रा ने श्रीसंत और रॉबिन उथप्पा के साथ मिलकर बैट ऐंड बॉल इन नाम से तीन रेस्तरां बेंगलुरु, चेन्नई और कोच्चि में खोले हैं. क्रिकेटर रवींद्र जडेजा ने गुजरात के राजकोट में जड्डूज फास्ट फील्ड नाम से रेस्तरां खोला है. पूर्व क्रिकेटर अजय जडेजा ने भी 2002 में सिंगापुर के एक व्यवसायी के साथ मिलकर दिल्ली में एक होटल खोला है. अजय जडेजा के इस शीशो नाम के होटल में भारतीय और इटेलियन खाना मिलता है. ऐसा नहीं है कि सभी क्रिकेटर होटल व्यवसाय में सफल ही रहे, दरअसल, कई क्रिकेटर ऐसे भी हैं, जिनके रेस्तरां शुरुआत में चलने के बाद बंद हो गए.

क्रिकेट के एक दिवसीय संस्करण से संन्यास लेने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने तीन रेस्टोरेंट कोलाबा, मुलंड (मुंबई) और पुणे में 2003 और 2004 में खोले थे. अपने शुरुआती दौर में उनके तेंदुलकर्स और सचिन नाम के ये रेस्टोरेंट काफ़ी चर्चा में रहे. मगर 2007 में तेंदुलकर्स और 2009 में सचिन बंद हो गया. सचिन से प्रेरणा लेकर उन्हीं की तरह खेलने वाले दिल्ली के विस्फोटक बल्लेबाज़ वीरेंद्र सहवाग ने भी दिल्ली में रेस्तरां खोला, मगर बदक़िस्मती से उनके रेस्तरां का भी शटर डाउन हो गया. सहवाग ने तो इस मामले में अपने रेस्तरां पार्टनर पर धोखाधड़ी का केस भी दर्ज कर दिया है. बंगाल टाइगर नाम से मशहूर क्रिकेटर सौरभ गांगुली ने भी कोलकाता में चार मंज़िला रेस्तरां सौरव्स-द फूड पवेलियन 2004 में खोला था. कोलकाता के सबसे पॉश इलाक़ों में से एक पार्क स्ट्रीट में यह रेस्तरां था. आश्‍चर्य की बात तो यह है कि 2011 में इसे भी बंद करना पड़ा.

टेनिस में भारत का नाम रोशन करने वाली सानिया मिर्ज़ा अब खिलाड़ी से व्यवसायी भी बन गई हैं. पिछले दिनों उन्होंने हैदराबाद में एक कॉफ़ी शॉप खोली और उनका इरादा इसे एक बड़ी कॉफी चेन बनाने का है. इस व्यवसाय में उन्हें हैदराबाद के एक मशहूर रेड्डी परिवार का सहयोग मिला है. सानिया हैदराबाद के बाद अब विशाखापत्तनम में दूसरी कॉफी शॉप खोलेंगी. दक्षिण भारत में इसकी कई शाखाएं खोलने के बाद वे मुंबई और दिल्ली का रुख़ करेंगी. सानिया मिर्ज़ा पहली खिलाड़ी नहीं हैं, जिन्होंने व्यवसाय में पैसा निवेश किया. खेल जगत के और भी कई खिला़डी हैं, जिन्होंने अपना पैसा अन्य व्यवसायों में लगाया है और इसमें कुछ सफल हुए, तो कुछ असफल.

ज़्यादातर क्रिकेटरों के होटल व्यवसाय में जाने के मुद्दे पर होटल विशेषज्ञों का कहना है कि क्रिकेटर इस खाने के धंधे को इसलिए अच्छा मानते हैं, क्योंकि यहां आने वाला ग्राहक कभी कम नहीं होता, पूरे साल भर आता है, मगर ये लोग यह भूल जाते हैं कि सिर्फ़ अपने नाम से खोल देने से ही वह रेस्तरां कामयाब नहीं हो जाता. उस रेस्तरां को सफलतापूर्वक चलाने के लिए सेलिब्रिटी को ख़ुद वहां मौजूद रहना चाहिए और खाने की गुणवत्ता पर भी पूरा ध्यान देना चाहिए.

कपिल देव अमेरिकन कंपनी मस्को लाइटिंग के साथ मिलकर गोल्फ, हॉकी, टेनिस और क्रिकेट स्टेडियम में फ्लडलाइट लगाने का काम कर रहे हैं. पूर्व क्रिकेटर अतुल वासन ने क़रीब 14 साल पहले कॉलमेट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी खोली है, जो कि मोबाइल एक्सेसरीज और रीटेलिंग का काम करती है. इस कंपनी का सालाना टर्नओवर क़रीब 50 करोड़ रुपये से अधिक है. बीजिंग ओलंपिक में निशानेबाज़ी में स्वर्ण पदक जीत चुके अभिनव बिंद्रा की अभिनव फ्यूचरिस्टिक लिमिटेड कंपनी है, जो कि निशानेबाज़ी से जु़डी बंदूक़े, राइफल और अन्य उपकरण की आपूर्ति करती है. इस कंपनी ने इस काम के लिए जर्मनी की कंपनी वाल्थर से समझौता किया हुआ है.

कुछ क्रिकेटरों ने होटल व्यवसाय में असफलता को देखते हुए अन्य क्षेत्रों में हाथ आज़माए हैं और वे काफ़ी अच्छा नाम और दाम कमा रहे हैं. देश को पहला विश्‍व कप दिलाने वाले पूर्व कप्तान कपिल देव ने अमेरिकन कंपनी मस्को लाइटिंग के साथ मिलकर देव मस्को लाइटिंग प्राइवेट लिमिटेड खोली है. अभी कपिल की यह कंपनी गोल्फ, हॉकी, टेनिस और क्रिकेट स्टेडियम में फ्लडलाइट लगाने का काम कर रही है. कपिल देव का कहना है कि अब हम फुटबॉल, हॉर्स राइडिंग और अन्य खेलों के स्टेडियम में भी फ्लडलाइट लगाने की योजना बना रहे हैं.

भारतीय क्रिकेट टीम में गेंदबाज़ रहे अतुल वासन ने क़रीब 14 साल पहले कॉलमेट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी खोली है, जो कि मोबाइल एक्सेसरीज और रीटेलिंग का काम करती है. इस कंपनी का टर्नओवर सालाना 40 करोड़ रुपये से अधिक है और सालाना ग्रोथ रेट क़रीब तीस फ़ीसदी है. इस कंपनी की भविष्य की योजनाओं के बारे में अतुल वासन का कहना है कि कंपनी अब कंप्यूटर और आईपॉड एक्सेसरीज आयात करके अपने ब्रांड नाम से बेचने की योजना बना रही है. बीजिंग ओलंपिक में निशानेबाज़ी में स्वर्ण पदक जीत चुके अभिनव बिंद्रा की अभिनव फ्यूचरिस्टिक लिमिटेड की कंपनी है, जो कि निशानेबाज़ी से जु़डी बंदूकें, राइफल और अन्य उपकरण की आपूर्ति करती है. इस कंपनी ने इस काम के लिए जर्मनी की कंपनी वाल्थर से समझौता किया हुआ है. भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज़ी के श्रीकांत मोबाइल गेमिंग के कारोबार में हैं. टेनिस खिलाड़ी महेश भूपति की 2002 में शुरू हुई ग्लोबस्पोर्ट इंडिया विश्‍व स्तर पर सेलिब्रिटी प्रबंधन का काम करती है. इनकी कंपनी के ग्राहकों में स़ैफ अली ख़ान, सानिया मिर्ज़ा, फीडा पिंटो, दीपिका पादुकोण जैसे सेलिब्रिटी शामिल हैं. पूर्व गेंदबाज़ दिलीप दोशी ने 1983 में इंग्लैंड में एंट्रैक ग्रुप की स्थापना की. उनकी कंपनी ने 1994 में भारत में अपना कारोबार शुरू किया. इसके तहत दिलीप जर्मनी के लग्जरी पेन मो ब्लां को पहली बार भारत में लेकर आए, जिसके देश भर में पांच स्टोर हैं. पूर्व सलामी बल्लेबाज़ चेतन चौहान की अमरोहा के पास गजरौला में काग़ज़ और बिस्किट बनाने की फैक्ट्री है.

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अब युवाओं को फिट बनाने के काम में भी जुट गए हैं. इसी के लिए उन्होंने फिटनेस के व्यवसाय में क़दम रख दिया है. रांची में उनका विश्‍वस्तरीय फिटनेस सेंटर है. धोनी ने इसके बाद अब देश के चुनिंदा शहरों में फिटनेस सेंटर खोलने का फैसला किया है. अब उनका लक्ष्य है कि देश-विदेश में कम से कम 200 फिटनेस सेंटर हों और इसके लिए उन्होंने स्पोर्ट्स फिट वर्ल्ड प्राइवेट लिमिटेड के ज़रिए अगले पांच सालों में क़रीब 2000 करोड़ रुपये निवेश का बजट रखा है. आगामी मई में दिल्ली, गुड़गांव, फ़रीदाबाद और चंडीगढ़ के फिटनेस सेंटर काम करना शुरू कर देंगे. भारत के चुनिंदा शहरों के अलावा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और पश्‍चिम एशिया के कुछ देशों में भी ये सेंटर खोले जाएंगे.

धोनी के क़रीबियों का कहना है कि वे अपनी स्पोर्ट्स बाइक, अपनी तस्वीरों, बल्ले, ग्लव्स और ट्रॉफियों का एक संग्रहालय बनाना चाहते हैं, जहां टिकट लेकर दर्शक उनसे जु़डी हुई चीज़ों को देखें. कुछ खिला़डी अब क्रिकेट से इतर अन्य खेलों में पैसा लगा रहे हैं. 24 जून, 2013 से होने वाली इंडियन बैडमिंटन लीग (आईबीएस) की मुंबई फ्रेंचाइजी टीम को क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने ख़रीद लिया है. अब सचिन 24 मार्च को इस लीग के लिए खिलाड़ियों की नीलामी में हिस्सा लेंगे और अपनी टीम के लिए खिलाड़ी ख़रीदेंगे. सचिन से पहले भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी खेल की टीम ख़रीद चुके हैं. कप्तान धोनी ने माही रेसिंग नाम से मोटरबाइक रेसिंग टीम ख़रीदी है. ज़ाहिर है कि टीम को ख़रीदने से ये खिलाड़ी जहां अन्य खेलों को प्रमोट कर रहे हैं, वहीं इनका मक़सद पैसा कमाना भी है. टीम ख़रीदने के मसले पर खेल विशेषज्ञों का कहना है कि इससे नीलामी में बिकने वाले खिलाड़ियों को तो आर्थिक रूप से फ़ायदा होगा ही, नामचीन मालिकों के होने से टीमों के साथ प्रायोजकों को जुड़ने में कोई परेशानी नहीं होगी.

बातचीत

निवेश करने में कोई हर्ज नहीं :  मनिंदर सिंह

कारोबार में खिलाड़ियों के बढ़ते निवेश पर पूर्व खिलाड़ी और कमेंटेटर मनिंदर सिंह से संवाददाता की बातचीत-

खेल के मैदान के बाद अब खिला़डी कारोबार के मैदान में अच्छा परफॉर्म कर रहे हैं. आपकी क्या राय है?

अगर खिलाड़ियों के पास पैसा है, तो उसे सुरक्षित जगह पर निवेश करने में कोई हर्ज नहीं है और फिर निवेश करना कोई बुरा काम तो नहीं है. हर कोई चाहता है कि उसका भविष्य आर्थिक रूप से मज़बूत रहे.

 क्या खिलाड़ियों की ब्रांड वैल्यू काम आती है उनके बिजनेस करने में?

हां, एक सकारात्मक फ़र्क़ तो पड़ता है. जब नामी आदमी कोई नया व्यवसाय शुरू करता है, तो उसमें निवेश करने या उसके उत्पाद का इस्तेमाल करने में जनता हिचकती नहीं है. हालांकि यह ज़रूर देखती है कि इसके उत्पाद में नया क्या है.

अधिकांश खिलाड़ी होटल इंडस्ट्री में निवेश कर रहे हैं. ऐसा क्यों?

होटल या रेस्तरां खोलना और दूसरे व्यवसायों के मुक़ाबले थोड़ा आसान होता है और इसमें खिलाड़ियों का नाम जु़डने से कस्टमर में आने की जिज्ञासा बनी रहती है. अगर ऐसे में वहां अच्छा खाना और दूसरी सुविधाएं बेहतर तरी़के से मिलने लगें, तो ऐसे होटल, रेस्तरां ख़ूब और ख़ूब चलते हैं.

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